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मारे गए माओवादी की पहचान नहीं मुठभेड़ में आधी महिला नक्सली थीं

Kawardha News - कबीरधाम जिले में पहली बार हुए पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गए माओवादी की पहचान दूसरे दिन नहीं हो सकी। हालांकि...

Dainik Bhaskar

Jun 02, 2018, 02:50 AM IST
मारे गए माओवादी की पहचान नहीं मुठभेड़ में आधी महिला नक्सली थीं
कबीरधाम जिले में पहली बार हुए पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में मारे गए माओवादी की पहचान दूसरे दिन नहीं हो सकी। हालांकि पोस्टमार्टम करा लिया गया है। मुठभेड़ बाद जो महत्वपूर्ण तथ्य निकलकर आ रहे हैं, उनके मुताबिक 12 से 15 नक्सलियों की टुकड़ी में आधी महिला नक्सली भी शामिल थीं। एक तथ्य और निकलकर आया है कि उन्होंने आधुनिक एसएलआर, थ्री नॉट थ्री जैसे हथियार रखे थे। 315 बोर इंडियन आर्डिनेंस मेक रायफल भी उनके पास थी।

जिन माओवादियों से पुलिस की मुठभेड़ हुई वे विस्तार प्लाटून 3 के सदस्य हैं। ये ग्रामीणों की बैठक लेकर निकल रहे थे। तभी पुलिस से इनका सामना हुआ। इस दौरान एक नक्सली तो मारा गया, लेकिन बाकी भाग गए। हालांकि, एक और नक्सली के घायल होने की पुलिस पुष्टि कर रही है, लेकिन घायलों की संख्या ज्यादा भी हो सकती है। जहां मुठभेड़ हुई, वह मंडला जिले से 10 किमी पहले का इलाका है।

इस सफलता पर दुर्ग रेंज के आईजी जीपी सिंह भी कवर्धा पहुंचे। उन्होंने अभियान में शामिल जवानों को एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया। साथ ही कुछ का नाम गैलेंट्री अवाॅर्ड के लिए भी भेजा जाएगा।

धूमाछापर का घना जंगल, जहां पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

पोस्टमार्टम, शरीर में गोली से घाव के चार निशान

माओवादी का पीएम शुक्रवार की दोपहर 12 से 2 बजे के बीच की गई। पोस्ट मार्टम की प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी कराई गई। पंचनामा के दौरान माओवादी के शरीर पर गोली के 4 घाव नजर आए हैं। एक गोली उसके सिर पर लगी हुई थी। दूसरा घाव कान के नीचे वाले हिस्से में, तीसरा घाव गले के दाहिने हिस्से में व चौथा घाव सीने में बायीं ओर नजर आया। शव का एक्सरे भी कराया गया।

पुलिस छोटी टुकड़ियों में बंटी, यू आकार में की नक्सलियों की घेराबंदी तब फंसे, अलग-अलग रास्तों से गए थे जवान

कवर्धा|पुलिस को गुरुवार की सुबह सूचना मिली कि धूमाछापर गांव के आसपास नक्सली ग्रामीणों की बैठक ले रहे हैं। तत्काल तीन टीम बनाई गई। एक-एक टीम में 36 से 40 जवान थे। जवान अलग-अलग रास्तों से मौके के लिए रवाना हुए। टीम को बोड़ला एसडीओपी आशीष बंछोर लीड कर रहे थे। टीम सुबह 10 बजे रवाना हुई।

मुठभेड़ की जगह तरेगांव थाना से लगभग 18 से 20 किलोमीटर थी। धूमाछापर गांव के 2 किलोमीटर आगे ही पुलिस ने एंबुश लगा लिया। तीनों टीम इस इलाके में छोटी-छोटी टुकड़ी में पांच भागों में बंट गई। हथियारबंद नक्सलियों की आहट आई। जवान चौकन्ने हो गए। पुलिस ने पहले ही यू आकार में घेराबंदी कर रखी थी। पुलिस की हलचल देखते ही नक्सलियों ने पहली फायरिंग की। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग कर दी।

10 मिनट तक ताबड़तोड़ फायरिंग चलती रही। इसके बाद भी रह-रहकर फायरिंग तकरीबन एक घंटे जारी रही। यह घटना दोपहर में 2 बजे के बाद हुई। इसी दरमियान पहाड़ के ऊंचे हिस्से की ओर तीन लोग भागते दिखे। दो तो पहाड़ की आड़ में छिपते हुए भाग निकले, लेकिन जो सबसे पीछे था, उस नक्सली को गोली लगी। उसने भी अपने 315 बोर के रायफल से फायरिंग की। इसके बाद उसे फिर गोली लगी। वह वहीं ढेर हो गया। फायरिंग रुकने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके की सर्चिंग की, वहां उन्हें खून के धब्बे और घसीटने के निशान भी मिले। हालांकि, इसके बाद तेज आंधी और बारिश के कारण ये निशान धुल गए। पुलिस देर शाम मारे गए नक्सली का शव लेकर तरेगांव पहुंची और यहां से उसे कवर्धा जिला मुख्यालय लाया गया।

माओवादियों के कैम्प लगे होने की भी संभावना

धूमाछापर के जिस जंगल में पुलिस की माओवादियों से मुठभेड़ हुई। पुलिस ने वहां उसके आसपास उनके कैंप लगे होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। बताया जाता है कि वे गांव से बैठक लेकर निकल रहे थे, तभी पुलिस से उनका सामना हुआ। वे 12 से 15 की संख्या में थे और उनके पास सामान कम था। अक्सर माओवादी पिट्ठू के जरिए बड़ी मात्रा में रसद लेकर चलते हैं, मुठभेड़ के दौरान ऐसा नजर नहीं आया।

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