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ओवरहेड टंकी बनाने नहीं मिली जमीन इधर 24 महीने में पूरा करना है काम

शहर में नए पेयजल व्यवस्था के लिए 4 ओवरहेड टंकियाें का निर्माण किया जाना है। टेंडरिंग के बाद एजेंसी तय की जा चुकी है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 03, 2018, 02:50 AM IST

ओवरहेड टंकी बनाने नहीं मिली जमीन इधर 24 महीने में पूरा करना है काम
शहर में नए पेयजल व्यवस्था के लिए 4 ओवरहेड टंकियाें का निर्माण किया जाना है। टेंडरिंग के बाद एजेंसी तय की जा चुकी है। वर्क आर्डर भी जारी हो चुका है, लेकिन जिस जगह पर टंकी बनाया जाना है, वह जमीन अभी नगर पालिका को नहीं मिल पाई है। क्योंकि उस जगह पर कुछेक प्राइवेट लैंड आ रहे है, जिससे विवाद खड़े हो गया है।

ऐसी समस्या एक या दो नहीं बल्कि 3 जगहों पर सामने आ रही है। जबकि जमीन चिह्नांकन के लिए खुद अफसरों ने मौका मुआयना किया था। जमीन के पेच में 24 करोड़ रुपए की जलावर्धन योजना अटक गई है।

इधर एजेंसी भी पशोपेश में है। क्योंकि कांट्रेक्ट के मुताबिक उसे 24 महीने में काम पूरा कर के हैंडओवर करना है। वर्क आर्डर जारी हो चुका है, लेकिन दो महीने ऐसे ही बीत गए हैं। सबसे बड़ी समस्या उन हजारों परिवारों की है, जिन्हें योजना के जरिए पीने का पानी मुहैया कराना जाना है। बता दें कि ओवरहेड टंकी निर्माण के लिए 100-100 वर्ग मीटर जमीन चाहिए।

कवर्धा.निचले वार्डों में टैंकर से पीने का पानी जुटाते लोग।

इन जगहों पर जमीन विवाद से कार्य में अवरोध

सीन 1. घोठिया रोड:

घोठिया रोड में तिराहे पर ओवरहेड टंकी बनाने के लिए जमीन चिह्नांकन किया जा चुका था। 100 वर्ग मीटर जमीन आरक्षित कर ली गई थी, लेकिन जहां पर टंकी बननी है, वह निजी है।

जलावर्धन योजना की स्थिति पर एक नजर

24 करोड़ रुपए से बनेगा नया वाटर फिल्टर प्लांट

4 नई ओवरहेड टंकी

15.62 किमी लंबी पाइप लाइन बिछेगी प्लांट से टंकियों में पानी पहुंचाने

36.68 किमी लंबी डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन बिछेगी

सीन 2. बूढ़ा महादेव मंदिर: मठपारा में बूढ़ामहादेव मंदिर के पास जहां आंगनबाड़ी केंद्र है, वहां टंकी निर्माण किया जाना था। इसके लिए वहां मौजूद सार्वजनिक मंच को तोड़ना पड़ेगा।

सीन 2. शिक्षक कॉलोनी: शिक्षक कॉलोनी में भी टंकी निर्माण के लिए 100 वर्ग मीटर जमीन चिह्नांकित कर ली गई थी। एेन वक्त पर कुछेक लोगों ने इसे अपनी जमीन बताकर आपत्ति जताई।

वाटर फिल्टर प्लांट इसलिए जरूरी

सर्वे के मुताबिक शहर में 10,265 कच्चे व पक्के मकान हैं। यहां करीब 45 हजार आबादी रहती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के मुताबिक प्रति व्यक्ति 135 लीटर के हिसाब से नगर में रोज 60 लाख लीटर पानी की जरूरत है। लेकिन मौजूदा प्लांट से 40 लाख लीटर जलापूर्ति हो रही है, जो कि मानक से 20 लाख लीटर कम है। वहीं अब भी साढ़े 3 हजार घर ऐसे हैं, जहां नल कनेक्शन ही नहीं पहुंचे।

आगामी 30 साल के लिए योजना

नपा अफसरों की मानें, तो 24 करोड़ रुपए के इस जलावर्धन योजना से शहर के करीब 20 हजार आबादी को पानी मिल सकेगा। अगले 30 साल यानि 2050 तक पानी की समस्या नहीं रहेगी। खैरबना कला में जहां पहला वाटर फिल्टर प्लांट स्थापित हैं, वहीं 6.5 एमएलडी क्षमता वाला नया प्लांट बनेगा।

सीधी बात: सुनील अग्रहरि,सीएमओ, नपा कवर्धा

दूसरी जमीन की तलाश जारी

नए फिल्टर प्लांट का काम क्यों शुरू नहीं हुआ?

- चार जगहाें पर टंकी बनना है। इनमें से 3 के लिए जो जमीन चिह्नांकन किया था, वहां दिक्कत आ रही है। क्योंकि कुछ लोग इसे निजी बताकर काम होने नहीं दे रहे हैं।

जब जमीन मिली नहीं, तो एजेंसी को वर्क आर्डर कैसे दे दिया?

- तब स्थिति दूसरी थी। प्रस्तावित जगह के आसपास ही दूसरी जमीन तलाश की जा रही है।

..तो क्या दो साल में काम पूरा हो जाएगा?

- हां, क्योंकि जब तक टंकी के लिए जमीन की समस्या सुलझाएंगे, तब तक एजेंसी नए प्लांट और पाइप लाइन बिछाने का काम कर सकता है।

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