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कवर्धा के 61 साल पुराने शारदा संगीत महा. की संबद्धता समाप्त

नगर स्थित 61 साल पुराने शारदा संगीत महाविद्यालय की स्थायी संबद्धता को खत्म कर दिया है। क्योंकि यहां ग्रेजुएशन...

Danik Bhaskar | Jun 07, 2018, 02:50 AM IST
नगर स्थित 61 साल पुराने शारदा संगीत महाविद्यालय की स्थायी संबद्धता को खत्म कर दिया है। क्योंकि यहां ग्रेजुएशन कोर्स चलाने 8 शिक्षक (प्रशिक्षक) की जरूरत थी, लेकिन दशकों बाद भी नगर पालिका नियुक्ति नहीं कर पाई। हाल ही में जांच के लिए पहुंची इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की टीम ने खामियां दूर न होते देख यह फैसला लिया।

स्थायी संबद्धता खत्म करने के इस फैसले से उन 130 स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में पड़ गया है, जो यहां संगीत शिक्षा ले रहे हैं। वहीं नए एडमिशन भी नहीं हो पाएंगे। खास बात यह है कि 5 दशक पहले कवर्धा के राज परिवार ने नगर पालिका को ग्राम इंदौरी 30 एकड़ 69 डिसमिल काश्तकारी जमीन दान दी थी ताकि इसमें खेती करने से मिलने वाली फसल को बेचकर संगीत महाविद्यालय का उचित संचालन करें और बच्चों को सुविधाएं दे सकें, लेकिन हुआ इसके उलट। इस काश्तकारी जमीन को हर 3 साल के लिए ठेके पर देकर पालिका 9 लाख रुपए कमा रही है, लेकिन राशि अन्य कार्यों में खर्च हो रही है।

लिखा पत्र, यूनिवर्सिटी को भेजा: महाविद्यालय में बांसुरी, गिटार, सितार, कथक, वायलिन, वीणा, भारत नाट्यम व लोक संगीत सिखाने के लिए शिक्षक नहीं है, जिसके चलते इंदिरा कला संगीत विवि खैरागढ़ ने ग्रेजुएशन की संबद्धता खत्म कर दी। महाविद्यालय बंद न हो जाए, इसलिए प्रेसीडेंट इन काउंसिल ने मीटिंग कर यहां 6 वर्षीय डिप्लोमा कोर्स के लिए संबद्धता लेने पत्र लिखा है।

फसल से मिली राशि अन्य कामोें पर खर्च की

कवर्धा. वीर स्तंभ चौक स्थित शारदा संगीत महाविद्यालय।

यूं संचालन

दशकों से सिर्फ 2 शिक्षकों के भरोसे चल रहा संगीत महाविद्यालय: शारदा संगीत महाविद्यालय दशकों से सिर्फ 2 शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। संगीत शिक्षक प्रबुद्ध शर्मा को प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि दूसरा शिक्षक राजेश केशरी है। तबला वादन सिखाने के लिए प्लेसमेंट के जरिए हरणदास मानिकपुरी की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा यहां न सफाईकर्मी की नियुक्ति हुई है न अन्य स्टाफ।

बगैर सेटअप स्वीकृत हुए चल रहा था ग्रेजुएशन कोर्स, इसलिए छिन गई संबद्धता: संबद्धता छिनने के पीछे सबसे बड़ा कारण शासन से संगीत महाविद्यालय में सेटअप का स्वीकृत न होना है। बीते 61 साल से इस महाविद्यालय में बगैर सेटअप के लिए ग्रेजुएशन काेर्स चल रहा था। इस बीच नगर पालिका के नुमाइंदों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया या जान-बूझकर अनदेखी करते रहे, जिसके चलते ये स्थिति बनी।

इसलिए छिनी संबद्धता

अफसोस

1957 को हुई थी स्थापना, 61 साल में कोई फनकार नहीं निकला: कवर्धा के राज परिवार ने 1957 में इस महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसका संचालन नगर पालिका कर रही है। 14 जोड़ी तबला और 13 नगर हारमोनियम समेत गिने-चुने वाद्य यंत्रों से संगीत शिक्षा दी जा रही है। शिक्षकों की कमी से इन 61 वर्षों में इस कॉलेज से ऐसा कोई भी फनकार नहीं निकला, जिससे कि उपलब्धि गिना सकें।

सीधी बात

सुनील अग्रहरि, सीएमओ, नपा कवर्धा

...तो सीएमओ, अकाउंटेंट से रिकवरी होती


- यूनिवर्सिटी की टीम जांच के लिए आई थी। कोर्स चलाने के लिए शिक्षकों की कमी के कारण संबद्धता खत्म की गई।


- शासन से सेटअप स्वीकृत नहीं हुआ है। यदि व्यवस्था के लिए शिक्षक नियुक्त किया, तो सीएमओ और अकाउंटेंट से रिकवरी करने होती।


- उस राशि से महाविद्यालय के बिजली बिल, पानी और शिक्षक की सैलरी भुगतान हो रहा है। शासन को स्टॉफ स्वीकृति के लिए पत्र भेजा है।

ग्रेजुएशन कोर्स की स्थायी संबद्धता खत्म की