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प्रति क्विंटल बीज खरीदने देना पड़ेंगे 200 रु. ज्यादा

राज्य सरकार ने बीजों पर मिलने वाली सब्सिडी (अनुदान) को खत्म कर दिया है, जिसके चलते इस साल किसानों को प्रति क्विंटल...

Dainik Bhaskar

Jun 08, 2018, 02:50 AM IST
प्रति क्विंटल बीज खरीदने देना पड़ेंगे 200 रु. ज्यादा
राज्य सरकार ने बीजों पर मिलने वाली सब्सिडी (अनुदान) को खत्म कर दिया है, जिसके चलते इस साल किसानों को प्रति क्विंटल खरीदी पर 200 रुपए एक्स्ट्रा देना पड़ेगा। इसका सीधा असर 50 हजार से ज्यादा धान और सोयाबीन उत्पादक किसानाें पर पड़ेगा, जो सेवा सहकारी समितियों से बीज उठाते हैं।

बीज के दाम बढ़ने से उन किसानों को होगी, जिनकी फसल पिछले साल कम बारिश व सूखे के कारण खराब हो गई। क्योंकि उन्हें इतनी उपज मिली ही नहीं, जिससे कि वे बीज के रूप में इस्तेमाल कर सके। अफसरों की मानें तो अधिकांश समितियां कागजों पर बीज की ज्यादा बिक्री दिखाकर सब्सिडी का पैसा डकार जाती थी। शिकायतें तो आई, लेकिन दोषी पकड़े नहीं गए इसलिए सरकार ने सब्सिडी को खत्म करने का फैसला लिया।

जो बीज 1650 रुपए में मिलता था उसके लिए देने पड़ रहे 1850 रुपए: पिछले साल के मुकाबले इस साल धान और सोयाबीन के बीजों में 200 रुपए का अंतर है। वर्ष 2017 में किसानों ने जो मोटा धान का बीज 1650 रुपए में खरीदा था, उसके लिए अब 1850 रुपए देना पड़ रहा है। पतला धान बीज के लिए 2000 रुपए भुगतान करना पड़ रहा है।

खत्म की सबसिडी

कागजों में बिक्री ज्यादा दिखाकर पैसा डकार जाती थी समितियां, चालू सीजन में 16,727 क्विंटल बीज भंडारण का लक्ष्य

कवर्धा.घोठिया बीज निगम के गोदामों में बीजों का भंडारण करते मजदूर।

किसानों ने 3 क्विंटल बीज अग्रिम उठाए

इस खरीफ सीजन 16,727 क्विंटल बीज भंडारण का लक्ष्य रखा है। लक्ष्य के विपरीत अब तक निगम 8,257 क्विंटल बीज ही उपलब्ध करा पाई है। इनमें से 702 क्विंटल बीज समितियों के गोदाम में पहुंचा दिया गया है। धान बीज 4603, सोयाबीन बीज 2,051 क्विंटल, अरहर बीज 278 क्विंटल, उड़द 32 क्विंटल और 40 क्विंटल मूंग बीज का भंडारण हाे चुका है। किसानों ने अब तक 3 हजार क्विंटल बीज का अग्रिम उठाव किया है।

गड़बड़ी रोकने 60 समितियों में लगाई पीओएस मशीन

सब्सिडी खत्म करने से अब बीजों की कालाबाजारी न शुरू हो जाए, इसलिए समितियों में प्वाइंट ऑफ सेल मशीन उपलब्ध करा दी हैं। जिले के 60 सेवा सहकारी समिति और 15 ब्रांचों में ये मशीन है। किसानों का थंब इंप्रेशन लेकर बीज दिया जा रहा है। अंगूठा लगाने पर आंकड़े कंप्यूटर में ऑनलाइन दर्ज हो जाते हैं।

अनुदान बंद होने से बीज के दाम बढ़ गए हैं


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