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11 गांव के बैगाओं के साथ मारपीट के बाद तोड़े घर

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगाओं की स्थिति जिले में ठीक नहीं है। पहले खुद ही रहने को जमीन दी। अब पुन:...

Dainik Bhaskar

Jul 06, 2018, 02:50 AM IST
11 गांव के बैगाओं के साथ मारपीट के बाद तोड़े घर
राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगाओं की स्थिति जिले में ठीक नहीं है। पहले खुद ही रहने को जमीन दी। अब पुन: विस्थापित करने के नाम पर 11 गांव के बैगाओं से मारपीट कर उनके घर तोड़े जा रहे हैं। मामला पंडरिया ब्लॉक का है। मारपीट से सहमे 100 से अधिक बैगा पुरुष और महिलाएं गुरुवार शाम को कलेक्टोरेट पहुंचे।

हड़बड़ाए कलेक्टर और एसपी उनके मिलने के लिए बाहर आए। बैगाओं ने अपने साथ हुई ज्यादती पर एक-एक कर बोलना शुरू किया, तो अफसरों के कान खड़े हो गए। आरोप है कि पुन: विस्थापन के नाम पर वन विभाग, राजस्व और पुलिस विभाग के कर्मचारी पंडरिया ब्लॉक के 11 गांव के बैगाओं से मारपीट कर रहे हैं। कई के घर भी तोड़ दिए हैं। ताकि डर से वे खुद वहां से भाग जाए।

कलेक्टोरेट कैंपस में हंगामा हुआ तो पहुंचे कलेक्टर और एसपी: गुरुवार सुबह 10 बजे से ही बैगाओं का कलेक्टोरेट पहुंचना शुरू हो गया था। दोपहर बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हो पाई तो शाम को बैगाओं ने कलेक्टोरेट परिसर में ही हंगामा शुरू कर दिया। इसे देखते हुए कलेक्टर अवनीश शरण और एसपी डॉ. लाल उमेंद सिंह वहां पहुंचे और बैगाओं से चर्चा की। समस्या सुनकर उस पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

जानिए, बैगाओं की जुबानी, पुलिस, राजस्व व वन विभाग का जुल्म

कुकदूर थाना प्रभारी ने की मारपीट : इतवारी बैगा ने बताया कि कुकदूर थाना प्रभारी सत्यम साहू ने विस्थापन के नाम पर 11 गांव में आतंक मचा रखा है। टीआई और कुकदूर थाना स्टॉफ गांव में जाकर मारपीट करते हैं। 1 से 3 जुलाई तक इन 11 गांव में जाकर जबरदस्ती बैगाओं के साथ मारपीट की गई है।

मामला बेहद गंभीर, जानकारी लेंगे


मोबाइल बना लिए जब्ती: ग्राम बकेला के प्यारे बैगा बताते हैं कि पंडरिया एसडीएम अनिल सिदार गांव में दौरा करने आते हैं। उन्हीं के सामने बैगाओं के घर को तोड़ा जा रहा है और मारपीट की जाती है। एसडीएम के आने पर ग्रामीणों का मोबाइल जब्त कर लिया जाता है। ताकि कोई वीडियो न बना सके।

कवर्धा.एसपी-कलेक्टर से लगाई गुहार।


वन विभाग के कर्मचारी देते हैं फंसाने की धमकी: ग्राम पंचायत दमगढ़ के सरपंच गैठुराम बैगा ने बताया कि पूरे विवाद की मुख्य जड़ वन विभाग है। विस्थापन की उलझन इसी विभाग से शुरू हुई है। गांव में पश्चिम पंडरिया के रेंजर ने बैगाओं को विभिन्न धारा में फंसा देने की बात कहीं जा रही है।

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