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110 में से 30 छात्र फेल, 70 को सेप्लीमेंट्री

दुर्ग यूनिवर्सिटी (डीयू) से संबद्धता प्राप्त पीजी कॉलेज कवर्धा में बीकॉम फाइनल ईयर का रिजल्ट इस बार थर्ड क्लास है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 06, 2018, 02:50 AM IST

110 में से 30 छात्र फेल, 70 को सेप्लीमेंट्री
दुर्ग यूनिवर्सिटी (डीयू) से संबद्धता प्राप्त पीजी कॉलेज कवर्धा में बीकॉम फाइनल ईयर का रिजल्ट इस बार थर्ड क्लास है। इसमें पास होने वालों से ज्यादा फेल और सेप्लीमेंट्री (पूरक) आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या ज्यादा है। खास बात ये भी है कि फेलियर को आयकर के पर्चे में 12 से ज्यादा अंक नहीं मिले हैं।

पीजी कॉलेज में मार्च-अप्रैल 2018 को बीकॉम फाइलन ईयर की परीक्षा ली गई। 110 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिलाया था। नतीजे जानकर हैरानी होगी क्योंकि 110 में से सिर्फ 10 स्टूडेंट्स ही पास हो पाए हैं। जबकि 30 स्टूडेंट्स फेल हो गए और 70 पूरक आए हैं। बीकॉम फाइनल के आयकर के पर्चे में सर्वाधिक 80 स्टूडेंट्स फेल हुए हैं। पर्चे में किसी को 8 तो किसी को 12 अंक मिले हैं। छात्रों का तर्क है कि गलत तरीके से पर्चे की जांच की गई। फाइनल ईयर में इतने साले स्टूडेंट्स फेल नहीं हो सकते। क्योंकि पिछले साल यहां उत्तीर्ण होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 55 फीसदी से ज्यादा थी।

नतीजे

पीजी कॉलेज कवर्धा में बी कॉम फाइनल ईयर का थर्ड क्लास रहा रिजल्ट

कवर्धा. पीजी कॉलेज कवर्धा।

रोज 12 में से 14 छात्र आते हैं कक्षा में: प्रबंधन

खराब नतीजों को लेकर कॉलेज प्रबंधन सफाई देने में लगा है। प्रबंधन का कहना है कि पूरे साल स्टूडेंट्स क्लास नहीं आते हैं। रोज औसतन 12 से 14 छात्र ही कॉलेज आते हैं। बीकॉम फाइनल में प्रोफेसर के 2 पद स्वीकृत हैं। इनमें एक असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत है, जबकि दूसरे पद के लिए संविदा से काम चलाई जा रही है।

पूरी यूनिवर्सिटी में 26.58 फीसदी स्टूडेंट ही पास

यूनिवर्सिटी में बीकॉम फाइनल ईयर का नतीजा ही खराब रहा है। पूरे यूनिवर्सिटी में 3991 स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिलाया था। इसमें से 1061 उत्तीर्ण हुए हैं, जबकि 1083 फेल हो गए हैं। 1594 स्टूडेंट्स पूरक आए हैं। वहीं 230 के परीक्षा परिणाम रोके गए हैं, जबकि 23 नकल प्रकरण सामने आए हैं।

खराब रिजल्ट आने के कारण का पता नहीं

बीकॉम फाइनल ईयर के रिजल्ट खराब आने के कारणों का तो नहीं पता, लेकिन पूरे यूनिवर्सिटी लेवल में ही ऐसा देखा जा रहा है। हमारे यहां चलो टीचिंग स्टॉफ कम है। यूनिवर्सिटी में तो हैं। डॉ. डीआर राणा, प्रभारी प्राचार्य, पीजी कॉलेज कवर्धा

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