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209 स्कूल कंडम, रिपेयरिंग के 35 लाख दिए, फिर भी काम नहीं

कबीरधाम जिले के 209 सरकारी स्कूल भवन कंडम हो चुके हैं। किसी की फर्श उखड़ी हुई है, तो किसी की दीवारें क्रेक हाे गई है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 02:50 AM IST

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    कबीरधाम जिले के 209 सरकारी स्कूल भवन कंडम हो चुके हैं। किसी की फर्श उखड़ी हुई है, तो किसी की दीवारें क्रेक हाे गई है। इन्हीं कंडम स्कूलों में खतरों के बीच इस सत्र भी कक्षाएं लगेगी। क्योंकि स्कूल खुलने में अब सिर्फ 4 दिन का समय बचा है। रिपेयरिंग के लिए 117 स्कूलों को 35 लाख रुपए तो दिए हैं, लेकिन काम नहीं हो पाया है।

    किसी भी स्कूल ने मरम्मत पूरी होने की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को नहीं दी है। इधर 81 स्कूल भवन ऐसे हैं, जो डिस्मेंटल (तोड़ने) योग्य हो गए हैं। इनकी मरम्मत संभवन नहीं है, लेकिन इन्हें भी ढहाया नहीं जा सका है। क्योंकि संबंधित शाला विकास समितियों ने इन्हें तोड़ने के लिए प्रस्ताव नहीं बनाया है। इस सत्र भी इन खस्ताहाल स्कूलों में कक्षाएं लगेगी, जिससे बच्चों को खतरा है। बता दें कि गर्मी की छुटि्टयों में खस्ताहाल स्कूलों की सूची मंगाई गई थी। सूची मिलने पर मरम्मत के लिए राशि जारी कर शिक्षा विभाग ने इतिश्री कर ली। ये जानना जरूरी नहीं समझा कि स्कूलों की मरम्मत हुई है या नहीं।

    ये स्कूल खस्ताहाल, यहां मौसम भी लेता है परीक्षा

    सीन 2. प्राथमिक स्कूल जखनाडीह: बैगा बाहुल ग्राम जखनाडीह में भी प्राथमिक स्कूल एक कच्चे मकान में संचालित है। कई बार तो बच्चों को इसलिए छुट्‌टी देनी पड़ती है, क्योंकि यहां बारिश से बचने का कोई उपाय नहीं है।

    सीन 3. प्राथमिक स्कूल लिमो: लिमो का प्राथमिक स्कूल भवन तोड़ने योग्य हो चुका है। भवन 8 साल पुराना है, फिर भी इसका उपयोग लिया जा रहा है। बच्चे यहां बैठकर मध्याह्न भोजन करते हैं। अतरिक्त कमरे में कक्षाएं लगी है, उसका भी फर्श उखड़ा है।

    178 स्कूलों में बिजली, 77 में पेयजल सुविधा नहीं

    जिले में 1611 सरकारी स्कूल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 178 स्कूलों में बिजली फिटिंग नहीं हुई है। 77 स्कूल ऐसे हैं, जहां पेयजल की सुविधा नहीं है। मध्याह्न भोजन के बाद बच्चे सार्वजनिक हैंडपंप का पानी पीते हैं। 218 स्कूलों में टॉयलेट खस्ताहाल हो चुकी है। 808 स्कूलों में बाउंड्रीवाॅल और 288 स्कूलों में दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप नहीं बना है। इसे लेकर शिक्षा विभाग कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

    सीन 1. प्राथमिक स्कूल बगदई: 209 खस्ताहाल स्कूलों की सूची में शामिल प्राथमिक स्कूल बगदई की छत टूट गई है, जहां से बारिश का पानी टपकता है। इसी के नीचे कमरों में करीब 56 बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं।

    सीन 4. प्राथमिक स्कूल बांसाटोला: पंडरिया ब्लॉक के दूरस्थ बैगा बाहुल गांव बांसाटोला में प्राथमिक स्कूल संचालित है। खुद का भवन नहीं होने से पिछले 3- 4 साल से यह एक झोपड़ी में चल रहा है, जहां न बिजली है न ही पानी की व्यवस्था है।

    जर्जर स्कूलों की स्थिति पर एक नजर

    209 स्कूल भवन कमजोर

    81 स्कूल भवन तोड़ने योग्य

    09 स्कूल ऐसे, जिनके पास खुद का भवन नहीं

    सीधी बात

    सीएस ध्रुव, डीईओ, कबीरधाम

    समितियों ने प्रस्ताव भेजा

    सर्वे के मुताबिक 81 स्कूल भवन तोड़ने योग्य हैं, तो तोड़वाया क्यों नहीं?

    -शाला विकास समिति के प्रस्ताव पर इन स्कूलों को तोड़ा जा सकता है। समितियों ने प्रस्ताव नहीं भेजे, इसलिए काम रुका हुआ है।

    209 स्कूल भवन कमजोर है, उसके लिए क्या किया जा रहा है?

    -रिपेयरिंग के लिए स्कूलों को राशि जारी हुआ है।

    ..तो क्या सभी स्कूलों की रिपेयरिंग हो गया?

    -स्कूलों ने मरम्मत कार्य की प्रोग्रेस रिपोर्ट अभी नहीं दी है। रिपोर्ट आने पर ही बता पाऊंगा।

    कई स्कूल ऐसे हैं, जो झोपड़ी में लग रहे हैं, उसका क्या?

    -नए स्कूल भवन निर्माण के लिए शासन को मांग पत्र भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर भवन बनेगा।

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