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34 मजदूर बंधक बनाए, पुलिस बोली बैंगलुरु बहुत दूर, हम नहीं जा पाएंगे / 34 मजदूर बंधक बनाए, पुलिस बोली बैंगलुरु बहुत दूर, हम नहीं जा पाएंगे

Bhaskar News Network

Jun 22, 2018, 02:50 AM IST

Kawardha News - कूकदूर थाना क्षत्र के 34 बैगा मजदूरों को बैंगलुर के काठबाड़ी पल्प कंपनी में बंधक बनाकर काम लेने का मामला सामने आया...

34 मजदूर बंधक बनाए, पुलिस बोली बैंगलुरु बहुत दूर, हम नहीं जा पाएंगे
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कूकदूर थाना क्षत्र के 34 बैगा मजदूरों को बैंगलुर के काठबाड़ी पल्प कंपनी में बंधक बनाकर काम लेने का मामला सामने आया है। इसमें 7 बच्चे भी हैं। बंधक मजदूरों में से एक सदन बाई जब यहां से भागकर घर लौटीं तो मामला खुला। थाने से पीड़ितों के परिजन को यह कहकर लौटा दिया कि बैंगलुरु बहुत दूर है, हम नहीं जा पाएंगे। इसके बाद एसपी से गुहार लगाई तो उन्होंने शुक्रवार को टीम भेजने की बात कही।

रोजगार का झांसा देकर यूपी के दो दलालों ने कुकदूर क्षेत्र के 34 बैगाओं को बंगलौर की जूस कंपनी के हाथों बेच दिया है, जहां सभी को बंधक बनाकर काम लिया जा रहा है। चार महीने बीतने पर भी मजदूरी नहीं मिली है। 20 दिन एक महिला किसी तरह वहां से भागकर गांव पहुंची। 11 जून को सभी परिजन कुकदूर थाने पहुंचे, लेकिन वहां सुनवाई नहीं हुई। थाने में जुर्म तक दर्ज नहीं किया गया है। 10 दिन बाद गुरुवार को पीड़ित परिजन एसपी ऑफिस पहुंचे तो उन्होंने टीम भेजने का कहा।

यूपी के दो दलालों ने बैगाओं को बेचा, चंगुल से भागी महिला पहुंची थाने, पुलिस ने मदद से इनकार किया

कवर्धा. गुहार लगाने एसपी आॅफिस पहुंचे मजदूर व परिजन।

गांव आए थे गुड्‌डू और लाला नाम के दलाल

परिजन ने बताया 4 महीने पहले गुड्‌डू व लाला नाम के दलाल गांव आए थे। वे खुद को उत्तरप्रदेश का बता रहे थे। दलालाें ने 9 हजार प्रतिमाह मजदूरी पर काम कराने ले गए। मजदूरों को पहले नागपुर ले गए, जहां रातभर एक गुड़ फैक्ट्री में रखा। फिर उन्हें बैंगलुरू के काठबाड़ी की जूस कंपनी में ले गए, जहां सभी से बंधक बनाकर काम ले रहे हैं। उनमें से एक भाग आई।

राशन खरीदने हफ्ते में देते हैं सिर्फ 200 रुपए

पीड़ित सदन बाई ने बताया कि दलाल उन्हें कंपनी के सुपुर्द करके चले गए थे। बंधक बने मजदूरों से 18-18 घंटे काम लिया जाता है। इधर हफ्ते में सिर्फ 200 रुपए दिया जाता है, जिससे वे राशन व अन्य सामान खरीदते हैं। बच्चों को एक कमरे में बंद करके रखा जाता है, जिस पर लठैत बैठा दिए हैं। इस कारण मजदूर वहां से भाग भी नहीं पा रहे हैं।

आपबीती

किराये के लिए भीख मांगी

रोज की तरह मैं काम कर रही थी। मुझे एक आदमी के साथ और मजदूर बुलाने बाहर भेजा था। इसी दौरान मैं वहां से भाग तो आई, लेकिन घर लौटने के लिए पैसे नहीं थे। सड़क पर भीख मांगनी पड़ी। 11 जून को हम मदद मांगने के लिए कुकदूर थाने गए। वहां पुलिस ने कहा कि बैंगलुरू बहुत दूर है, हम नहीं जा पाएंगे।-सदन बाई, श्रमिक

टीम बनाकर तुरंत भेज रहे


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