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तीन टीम 10 बजे निकली सर्चिंग पर 20 किमी बाद हुआ आमना-सामना

धूमाछापर के जंगल में सुबह 10 बजे डीआरजी, एसटीएफ और सीएएफ की टीम सर्चिंग के लिए निकली थी। तरेगांव से पश्चिम दिशा में 20...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 01, 2018, 02:55 AM IST

तीन टीम 10 बजे निकली सर्चिंग पर 20 किमी बाद हुआ आमना-सामना
धूमाछापर के जंगल में सुबह 10 बजे डीआरजी, एसटीएफ और सीएएफ की टीम सर्चिंग के लिए निकली थी। तरेगांव से पश्चिम दिशा में 20 किलोमीटर बाद दोपहर में नक्सलियों से उनका सामना हुआ। फायरिंग में एक नक्सली मारा गया।

आशंका है कि मारा गया नक्सली विस्तार प्लाटून नंबर 3 का सदस्य है। बाकी नक्सलियों का पीछा किया, लेकिन वे भाग निकलने में कामयाब हो गए। चार टुकड़ियों में 30 से 40 नक्सली बंटे थे। मुखबिर की सूचना मिली थी कि नक्सली जंगल में देखे गए हैं, तो डीआरजी, एसटीएफ और सीएएफ के जवानों ने सर्चिंग के लिए निकल पड़े व तीन घंटे बाद नक्सलियाें से आमना- सामना हुआ।

2015 में मिले थे जिंदा बारूद सितंबर 2015 में पुलिस ने पहली बार जंगल में नक्सलियों के छ़ुपाए जिंदा बारूद मिले थे। इसके बाद गृह मंत्रालय ने इस पर ध्यान दिया। मध्यप्रदेश के सीमा से लगे जंगल रेंगाखार थाना क्षेत्र के कोयलार झोरी और कुंडपानी में पुलिस कैंप खोला। चिल्फी थाना क्षेत्र के शंभूपीपर में अस्थाई कैंप खाेला, जहां करीब 1500 जवानों को तैनात किया। फिर साल 2017 में समानापुर के जंगल में नक्सलियों के छिपाए बंदूक मिलने झलमला व सिंघनपुरी में स्थाई कैंप खोला गया। लेकिन तरेगांव थाना क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर ध्यान नहीं दिया, इसलिए नक्सली यहां जम गए।

क्यों चुना कवर्धा

तीन राज्यों के आठ जिले की सरहद इस इलाके में इसलिए चुना यह इलाका

कवर्धा. मारे गए नक्सली का शव।

ऐसे हुआ आमना-सामना: घूमाछापर में नक्सलियों ने ग्रामीणों के साथ बैठक ले रहे हैं, इस सूचना के आधार पर पुलिस गांव पहुंची। बैठक खत्म होने के बाद नक्सलियों से पुलिस का आमना-सामना हुआ।

कबीरधाम जिले में नक्सली गतिविधियों से जुड़ी ये तीन प्रमुख घटनाएं:

12 सितंबर 2015: रेंगाखार क्षेत्र के सोनवाही और समनापुर के जंगल में सर्चिंग के दौरान 10 किलो जिंदा बारूद, डेटोनेटर, बैटरी और लोहे के छर्रे, सल्फर पाउडर समेत कई सामग्रियां बरामद हुए थे।

6 मई 2018: बोड़ला थाना क्षेत्र के बैजलपुर व कामाडबरी में पर्चे फेंके थे, जिसमें उन्होंने कार्ल मार्क्स की जयंती मनाने की बात लिखी थी।

कब से सक्रिय

तीन साल से माआेवादियों ने इस इलाके में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है

17 अगस्त 2017: समनापुर जंगल में ही बंजारी मंदिर के पास जमीन में दबी 2 देशी बंदूक, 200 ग्राम विस्फोट, 15 लोहे के छर्रे, प्लास्टिक कोडेट तार और डेटोनेटर बरामद किया गया था।

भास्कर तत्काल

छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र- मध्यप्रदेश के बॉर्डर क्षेत्र को माओवादियों के नए वॉर एरिया बनाने का खुलासा सबसे पहले भास्कर ने ही किया था। इस संबंध में पुलिस को सितंबर 2016 में इनपुट मिला था। छुईखदान के जंगलों में मिले दस्तावेजों में माओवादियों के थिंक टैंक ने छत्तीसगढ़ में काम करने वाले संगठन को जल्द ही दंडकारण्य के सपोर्ट में नए गुरिल्ला जोन बनाने के निर्देश दिए थे। बस्तर में दिनों-दिन कमजोर होते माओवादियों के नए वार एरिया की रणनीति का यह सबसे बड़ा खुलासा था। उन्होंने उसी समय बता दिया था कि तीन राज्यों के 8 जिलों की सरहद इस क्षेत्र में लगती है। माओवादियों ने पूरे क्षेत्र का बाकायदा अध्ययन किया था और अपनी रणनीतियों का दस्तावेजीकरण किया था। इस दस्तावेज में यह जिक्र था कि उनका एक डिवीजन जीआरबी यानी गोंदिया, राजनांदगांव और बालाघाट जिले की सीमा में स्थित है। उन्हें इस डिवीजन के उत्तर दिशा की ओर नए क्षेत्र में विस्तार करना है। यह क्षेत्र ही मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ का बॉर्डर इलाका है। कबीरधाम इसी क्षेत्र का जिला है। उन्होंने इन दस्तावेजों में यह जिक्र भी किया था कि दंडकारण्य के घेराबंदी के बाहर से अपनी घेराबंदी बढ़ाने की दृष्टि से आंदोलन का विकास उत्तर और पूरब की तरफ किया जाएगा। इस विस्तार के लिए माओवादियों ने पूरी जिम्मेदारी डिवीजनल कमेटी के मेंबर पहाड़ सिंह को दे रखी थी। मलाजखंड दलम के राकेश का नाम भी सामने आया था। माओवादियों की 58 की टुकड़ी यहां भेजी गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 100 तक पहुंचा दिया गया। यह फिर कम की गई। 15 से 25 की टुकड़ी विस्तार प्लाटून नंबर 2 और 3 के रूप में अब भी कबीरधाम जिले के जंगलों में सक्रिय है।

कैसे बनाया नेटवर्क

बस्तर डिविजन कमजोर होने पर नए वार एरिया के तौर पर कवर्धा जिला चुना

माओवादियों के थिंक टैंक का दो साल पहले बना प्लान

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