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सरकारी ठेके का सुपरवाइजर ही कोचियों तक पहुंचाता था शराब

ग्राम कोदवागोड़ान में अवैध तरीके से कोचिए तक थोक में शराब पहुंचाने वाले सरकारी ठेके के एक सुपरवाइजर को गुरुवार...

Dainik Bhaskar

Jun 08, 2018, 02:55 AM IST
सरकारी ठेके का सुपरवाइजर ही कोचियों तक पहुंचाता था शराब
ग्राम कोदवागोड़ान में अवैध तरीके से कोचिए तक थोक में शराब पहुंचाने वाले सरकारी ठेके के एक सुपरवाइजर को गुरुवार सुबह आबकारी अफसराें ने रंगेहाथों पकड़ा है। आरोपी सुपरवाइजर दुकान से 2 पेटी देशी शराब लेकर सड़क किनारे डिलीवरी देने के लिए कोचिए का इंतजार कर रहा था। तभी घात लगाए बैठे अफसरों ने उसे दबोच लिया।

आरोपी बसंत पिता विजय जांगड़े (28) ग्राम रघुनाथपुर थाना सिटी कोतवाली का रहने वाला है। वह कोदवागोड़ान के सरकारी दुकान में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। लंबे समय से वह कोचियों को थोक में शराब उपलब्ध करा रहा था। सूचना मिलने पर अाबकारी अफसराें ने लगातर 5 दिन तक दुकान पर नजर रखी। गुरुवार सुबह 9 बजे भी टीम दुकान के आसपास ही घात लगाए बैठी थी। तभी सुपरवाइजर बसंत 2 पेटी देशी शराब लेकर दुकान से निकला और सड़क किनारे कोचिए का इंतजार करने लगा। उसी वक्त टीम ने उसे घेरकर पकड़ लिया।

शक न हो, इसलिए पहले से स्कैन करके रखता था शीशियों का बार कोड: आरोपी काफी शातिर है। कोचिए को देने से पहले वह शराब की शीशियों पर कंप्यूटराइज्ड बार कोड को मशीन से स्कैन कर लेता था। ताकि उस पर किसी तरह का शक न हो। साथ ही साथी सेल्समैन को डराकर रखता था। यही कारण है कि आबकारी अफसराें को इस बात की जानकारी मिलने में वक्त लग गया।

आरोपी बसंत जांगड़े

एक पेटी शराब के बदले कोचिए से लेता था 500 रुपए ज्यादा

आरोपी सुपरवाइजर के पास से दो पेटी में 96 पौवा देशी शराब जब्त की गई है, जिसकी कीमत 4800 रुपए है। बताया जा रहा है कि आरोपी एक पेटी शराब के बदले में कोचिए से 500 रुपए एक्स्ट्रा लेता था। यानि प्रति पौवा शराब के पीछे उसे 10 रुपए मिल जाता था। पूछताछ में आरोपी उन कोचियों का नाम नहीं बता रहा है, जिन्हें वह शराब सप्लाई करता था।

भास्कर ने स्टिंग कर इस अवैध धंधे का किया था खुलासा

सबसे पहले भास्कर ने स्टिंग कर इस अवैध धंधे का खुलासा किया था। “प्रशासन की दुकानों में बैठे सेल्समैन ही कोचियों तक थोक में पहुंचा रहे शराब” शीर्षक देकर 8 अप्रैल 2018के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद आबकारी विभाग हरकत में आई और सरकारी दुकानों पर नजर रखने लगी।

दुकानों पर नजर रखे हुए थे


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