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प्राइमरी तक हिंदी, मिडिल में अंग्रेजी से पढ़ाई, असमंजस में पैरेंट्स

राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र से जिले के 4 प्राथमिक और 4 मिडिल स्कूलों में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई...

Dainik Bhaskar

Jun 09, 2018, 02:55 AM IST
प्राइमरी तक हिंदी, मिडिल में अंग्रेजी से पढ़ाई, असमंजस में पैरेंट्स
राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र से जिले के 4 प्राथमिक और 4 मिडिल स्कूलों में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई शुरू कराने फरमान जारी किया है। हर ब्लॉक मुख्यालय के 1- 1 स्कूल इंग्लिश मीडियम होंगे। लेकिन उन स्कूलों में 5वीं तक हिंदी माध्यम से पढ़ने वाले बच्चों को 6वीं में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ना पड़ेगा। इसे लेकर पेरेंट्स असमंजस में हैं। क्योंकि या तो वे अपने बच्चों को प्राइमरी में हिंदी मीडियम के बाद मिडिल में इंग्लिश मीडियम में पढ़ने दें या फिर टीसी कटाकर स्कूल बदलें। इधर, शिक्षा विभाग ने अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने शिक्षकों का चयन तक नहीं किया है। सरकार के इस प्रयोग से इन 8 स्कूलों में पढ़ने वाले 3000 से ज्यादा बच्चे प्रभावित होंगे। जिले के 3 स्कूलों को पीपीपी मोड में पहले भी प्रयोग कर चुके हैं लेकिन नतीजा नहीं मिला।

जानिए, जिले के उन डीएवी स्कूलों का हाल, जो हकीकत में बदहाली के मॉडल बन गए हैं..

कवर्धा.मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल धरमपुरा।

मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल लडुवा(पंडरिया)

स्थिति: लडुवा में 5 साल पहले मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल खोला गया, जहां इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई होती है। स्कूल में बच्चों की कुल दर्ज संख्या 450 है। यहां 45 बच्चों ने 10वीं बोर्ड का एग्जाम दिया था, लेकिन 25 बच्चे ही पास हुआ। वहीं 12वीं के 13 में से 3 बच्चे ही पास हुए।

सेटअप: खुद के भवन में संचालित इस स्कूल में स्टॉफ के 52 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 16 शिक्षक-कर्मचारी कार्यरत हैं।

मॉडल स्कूल कुसुमघटा (बोड़ला)

स्थिति: हाईस्कूल के पुराने भवन में संचालित हो रहा है। भवन नहीं होने से 6वीं में प्रवेश बंद है। 9वीं-10वीं की कक्षाएं लगती है। बीते सत्र में यहां के 40 बच्चों ने 10वीं बोर्ड परीक्षा दिलाई थी, जिसमें सिर्फ 6 पास हुए।

सेटअप: यहां 52 पद स्वीकृत लेकिन 9 ही कार्यरत हैं। इसी साल भलपहरी में स्कूल भवन तैयार हुआ है, जो कुसुमघटा से 7 किमी दूर है।

मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल धरमपुरा (कवर्धा)

स्थिति: खुद के भवन में संचालित स्कूल में 622 बच्चे हैं। सुविधाएं तो हैं लेकिन परिणाम ठीक नहीं है। यहां 67 बच्चों ने 10वीं बोर्ड परीक्षा दिलाई थी, जिसमें से 40 फीसदी ही पास हुए। 12वीं के 52 में से 38.6 फीसदी बच्चे ही उत्तीर्ण हुए।

सेटअप: इस स्कूल में सीबीएसई पैटर्न में पढ़ाई होती है, लेकिन शिक्षकों की कमी है। यहां भी स्टफ के 52 स्वीकृत पदों पर 20 कार्यरत हैं।

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