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जनदर्शन में ग्रामीणों का हंगामा एसडीएम की समझाइश पर माने

सोमवार को कलेक्टोरेट कार्यालय के भीतर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण विभिन्न विभागों की योजनाओं को लेकर समीक्षा कर रहे...

Danik Bhaskar | Jun 12, 2018, 02:55 AM IST
सोमवार को कलेक्टोरेट कार्यालय के भीतर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण विभिन्न विभागों की योजनाओं को लेकर समीक्षा कर रहे थे इस दौरान पंडरिया ब्लॉक के ग्राम सुरजपुरा कला से करीब 50 से अधिक ग्रामीणों ने कलेक्टोरेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि वे 10.30 बजे से आए हुए है। लेकिन अफसर अंदर बैठे अपने ही विभागों के कार्य कर रहें हैं। हंगामा बढ़ता देख कलेक्टाेरेट के अफसरों ने कोतवाली थाना में सूचना दी। पुलिस के आने के बाद भी ग्रामीणों ने कलेक्टर से मिलने मांग किया। इस पर टीएल बैठक में बैठे कवर्धा एसडीएम विपुल गुप्ता को बाहर आना पड़ा वे ग्रामीणों को मनाते रहे लेकिन ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर से मिलने की मांग किया जा रहा था। एसडीएम ने जैसे-तैसे ग्रामीणों को शांत किया व समझााइश दी। ग्रामीण पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे थे।

कवर्धा. भ्रष्टाचार की शिकायत करने पहुंचे सूरजपुरा कला के रहवासी कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े थे।

पहले आवेदन दिए थे, कार्रवाई नहीं होने पर कलेक्टर से मिलने की जिद

ग्राम सुरजपुरा कला के ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत में हुए वित्तीय अनियमितता की शिकायत को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे थे। ग्रामीण संतोष, रामाधीन, फुल सिंग ने बताया कि ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव व रोजगार सहायक द्वारा पीएम आवास योजना का लाभ दिलाने को लेकर उनके रुपए वसूला गया। वहीं ग्राम के विभिन्न विकास कार्यों में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। इस मुद्दे को लेकर वे पंडरिया जनपद सीईओ व एसडीएम को भी आवेदन सौंपा था। लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। दोनों अफसरों द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर सोमवार को कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई हैं।

शक्कर कारखाना: 84 एकड़ भूमि ली गई, लोगों को नहीं मिला रोजगार

सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में करीब 30 से अधिक आवेदन आए हैं। इसमें मांग, शिकायत व समस्या को लेकर आमजन ने आवेदन किया हैं। इसके अंतर्गत पंडरिया ब्लॉक के ग्राम बिशेसरा के ग्रामीण रोजगार की मांग को लेकर जनदर्शन में आवेदन किया हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पंडरिया शक्कर कारखाना निर्माण को लेकर करीब 74 लोगों से 84 एकड़ भूमि काे शासकीय भूमि बता कर वापस ले लिया गया। शक्कर कारखाना बनने के दौरान प्रशासन व ग्रामीणों की बीच समझौता हुआ कि उन 74 परिवारों को शक्कर कारखाना में रोजगार दिया जाएगा। लेकिन शक्कर कारखाना प्रारंभ होने के बाद उन्हें रोजगार नहीं दिया गया। इससे नाराजगी है।