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यह हमारे राज्य का खजुराहो : एक तरफ खूबसूरती का अक्स तो दूसरी ओर जमा बरसाती पानी आगाह भी करता है

कवर्धा|11वीं शताब्दी में निर्मित इस भोरमदेव मंदिर को यूं ही छत्तीसगढ़ का खजुराहो नहीं कहते हैं। इस तस्वीर में ही...

Danik Bhaskar | Jul 05, 2018, 02:55 AM IST
कवर्धा|11वीं शताब्दी में निर्मित इस भोरमदेव मंदिर को यूं ही छत्तीसगढ़ का खजुराहो नहीं कहते हैं। इस तस्वीर में ही देखिए। बारिश से कैंपस में जमा पानी में भोरमदेव अपनी सुंदरता निहारता दिख रहा है। भोरमदेव की बनावट खजुराहो और कोणार्क की तरह है, हालांकि यह जमा पानी मंदिर की नींव के लिए खतरा है और सही निकासी व मेंटेनेंस की जरूरत है।

28 जुलाई से सावन में जुटना शुरू होंगे श्रद्धालु: इस महीने की 28 तारीख से सावन महीने की शुरुआत होगी। श्रावण या सावन में भोलेनाथ की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए हर साल यहां सावन में श्रद्धालु जुटते हैं। इस बार सावन में 4 सोमवार आएंगे। इसी बीच 11 अगस्त को हरियाली अमावस्या भी है।