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ऑक्सीजन न वार्मर, फिर भी जननी 102 में 3 साल में 23 सौ प्रसव कराए / ऑक्सीजन न वार्मर, फिर भी जननी 102 में 3 साल में 23 सौ प्रसव कराए

Bhaskar News Network

Jul 05, 2018, 02:55 AM IST

Kawardha News - कबीरधाम जिले में इमरजेंसी सेवाएं देने के लिए जननी 102 के 11 और संजीवनी 108 के 5 वाहन हैं। इन वाहनों में ऑक्सीजन और वार्मर...

ऑक्सीजन न वार्मर, फिर भी जननी 102 में 3 साल में 23 सौ प्रसव कराए
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कबीरधाम जिले में इमरजेंसी सेवाएं देने के लिए जननी 102 के 11 और संजीवनी 108 के 5 वाहन हैं। इन वाहनों में ऑक्सीजन और वार्मर जैसी जरूरी सुविधा नहीं हैं। फिर ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) और पायलट बिना कोई सुविधा के बीते 3 साल में 2308 गर्भवती की सुरक्षित प्रसव करा चुके हैं। इन वाहनों में अब तक जितनी भी डिलिवरी करवाई गए हैं, सभी जच्चा- बच्चा स्वस्थ हैं।

वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर सुरक्षित डिलिवरी करवाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। हाल ही में जिला अस्पताल में ड्यूटी पर सो रहे डॉक्टर व नर्सों की लापरवाही से एक नवजात शिशु की मौत हो गई। आंकड़े देखें, तो पिछले 2 साल में सरकारी अस्पतालों में डिलिवरी के दौरान 350 से ज्यादा नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है। जबकि जिले में 4 नवजात शिशु स्थिरीकरण ईकाई व 22 नवजात शिशु देखभाल कार्नर मौजूद हैं।

कबीरधाम जिले के अस्पतालों के डॉक्टर सुरक्षित डिलिवरी कराने में हो रहे नाकाम

कवर्धा.कोटनापानी से अस्पताल लाते वक्त 102 वाहन में कराना पड़ा प्रसव।

102 में जरूरी सुविधा नहीं रिस्क लेकर कराते हैं प्रसव

जिले में 11 महतारी 102 एक्सप्रेस हैं, जिसमें 42 ईएमटी और पायलट कार्यरत हैं। इसी साल इन वालों में 343 डिलवरी हो चुकी है, जबकि सुरक्षित प्रसव के लिए वाहन में सुविधा नहीं है। क जचकी के बाद बच्चे को हाईपोथर्मिया से बचाने के लिए वार्मर नहीं है। ब्लीडिंग रोकने वाली मिजाप्रोस्टॉल मेडिसिन भी नहीं है।

अस्पताल व 102 में हुई डिलिवरी पर एक नजर

वर्ष जननी 102/108 जिला अस्पताल

2015- 2016 918 782

2016- 2017 1031 1102

2017- 2018 359 1413

(नोट: जननी 102 और 108 एंबुलेंस में हुए प्रसव भी िगनते हैं।)

स्वास्थ्य सेवाओं पर हर साल 18 करोड़ होते हैं खर्च

साढ़े 8 लाख आबादी वाले इस जिले में 1 जिला अस्पताल, 6 सामुदायिक, 24 प्राथमिक और 147 उप-स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। 20 मेडिकल ऑफिसर और17 आरएमए कार्यरत हैं। इन पर हर साल करीब 18 करोड़ रुपए खर्च किया जाता है। फिर भी स्थिति है कि शिशु मृत्युदर कम नहीं हो रही है।

रास्ते में ईएमटी और पायलट ने ही कराई डिलिवरी

प्रा. स्वास्थ्य केंद्र तरेगांव से 8 किमी दूर कोटनापानी गांव में ज्ञानसिंह बैगा की प|ी बिजालो बाई (20) को प्रसव पीड़ा हुई। कॉल आने पर जननी 102 एक्सप्रेस सुबह 10.40 बजे गांव पहुंची। कमजोर भी बढ़ गई थी। गंभीर हाेने पर डॉक्टर ने केस रिफर कर दिया। जैसे ही जननी 102 से गर्भवती को लेकन निकले, तो स्थिति बिगड़ गई। गाड़ी रोक ईएमटी और पायलट ने प्रसूति कराई।

समय-समय पर मांग एंबुलेंस में ये सुविधाएं


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