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3 साल बाद 16 प्रभावितों को मिला दुकानों पर कब्जा

बस स्टैंड कवर्धा के सामने कांप्लेक्स बनाने के लिए 11 साल पहले जिन 16 दुकानदारों ने जगह दी थी, आखिरकार अब उन्हें राहत...

Dainik Bhaskar

Jul 08, 2018, 02:55 AM IST
3 साल बाद 16 प्रभावितों को मिला दुकानों पर कब्जा
बस स्टैंड कवर्धा के सामने कांप्लेक्स बनाने के लिए 11 साल पहले जिन 16 दुकानदारों ने जगह दी थी, आखिरकार अब उन्हें राहत मिल गई है। नगर पालिका में शनिवार को लाटरी के जरिए प्रभावितों को 16 दुकानें आवंटित की गई। रिजर्वेशन (आरक्षण) के हिसाब से इन दुकानों का आवंटन किया गया। रविवार को इन्हें दुकानों की चाबी सौंपी जाएगी।

सरदार वल्लभ भाई कांप्लेक्स में 5 दुकानें महिलाओं के रिजर्व रखी गई थी। इसके लिए सिर्फ एक कैंडिडेट अनुपमा गुप्ता ने आवेदन भरा था, जिसे आसानी से दुकान मिल गई। अनारक्षित वर्ग के 8 दुकानों के लिए 4 कैंडिडेट थे। आवंटन के बाद शेष 4 दुकानें लाटरी के जरिए अन्य पिछड़ा वर्ग (अपिव) के 4 कैंडिडेट के खाते में गई। क्योंकि अपिव के लिए जिन 4 दुकानों का आवंटन होना था, उसके लिए 8 कैंडिडेट ने आवेदन दिया था। इसी तरह शिक्षित बेरोजगार और विधवा कैंडिडेट को 1- 1 दुकानें मिली। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 5 दुकानें आरक्षित थी। इसके लिए सिर्फ एक कैंडिडेट था।

कांप्लेक्स बनने के बाद प्रभावितों ने 3 साल कोर्ट के चक्कर लगाए: 28 जून 2007 को पुराने डाक बंगला की जमीन पर कांप्लेक्स बनाने के लिए इन 16 दुकानदारों को हटाए थे। ये कहकर कि कांप्लेक्स बनने पर उन्हें दुकानें आवंटित की जाएगी। लेकिन साल 2015 में कांप्लेक्स बनने के बाद तत्कालीन सीएमओ मुकर गए। इसके कारण प्रभावितों को 3 साल तक कोर्ट के चक्कर लगाना पड़ा। आखिरकार फैसला उनके पक्ष में आया।

कवर्धा.लाटरी के जरिए दुकान आवंटन के लिए पर्ची निकालते व्यवसायी।

गड़बड़ी के चलते रद्द की थी नीलामी

सवा करोड़ रुपए से निर्मित इस कांप्लेक्स में 69 दुकानें बनी है। इनमें से 43 दुकानों की नीलामी वर्ष 2015 में कर दी गई थी। भूमि हैंडओवर न होने व अन्य गड़बड़ियों के कारण शासन स्तर पर इसकी शिकायत हो गई थी। नगरीय प्रशासन रायपुर के आदेश पर 43 दुकानों की नीलामी रद्द की थी।

बची दुकानें भी अब जल्द करेंगे नीलाम


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