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फिशरीज साइंस की पढ़ाई के लिए नीदरलैंड जाएगा मजदूर का बेटा, छग सरकार नहीं, बल्कि कोईपाेन फाउंडेशन उठाएगा खर्च

वेल्डिंग वर्कशॉप में काम करने वाले मजदूर सुनील महिलांग का बेटा वैभव फिशरीज साइंस की पढ़ाई के लिए नीदरलैंड जाएगा।...

Dainik Bhaskar

Jul 09, 2018, 02:55 AM IST
फिशरीज साइंस की पढ़ाई के लिए नीदरलैंड जाएगा मजदूर का बेटा, छग सरकार नहीं, बल्कि कोईपाेन फाउंडेशन उठाएगा खर्च
वेल्डिंग वर्कशॉप में काम करने वाले मजदूर सुनील महिलांग का बेटा वैभव फिशरीज साइंस की पढ़ाई के लिए नीदरलैंड जाएगा। यह पहला मौका है, जब कबीरधाम जिले से कोई स्टूडेंट विदेश शिक्षा के लिए चयनित हुआ है। खास बात ये है कि उसकी पढ़ाई का खर्चा छग सरकार नहीं, बल्कि नीदरलैंड के ही कोईपोन नामक फाउंडेशन उठा रहा है।

छात्र वैभव की पढ़ाई के लिए करीब 25 लाख रुपए खर्च होंगे, जिसे फाउंडेशन किस्तों में यूनिवर्सिटी को चुकाएगा। छात्र वैभव महिलांग, जो वेगेंनिंगन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च नीदरलैंड में फिशरीज साइंस में मास्टर डिग्री की पढ़ाई करेगा। विदेश शिक्षा के तहत दो साल की पढ़ाई करने के लिए वैभव ने डेढ़ महीने पहले ऑनलाइन आवेदन किया था। उसके पढ़ाई का लेवल अच्छा था, इसलिए छग राज्य से अकेले उसी का सलेक्शन हुआ है।

प्रारंभिक शिक्षा सुहेला में हुई, अभी कवर्धा के फिशरीज कॉलेज का छात्र: छात्र वैभव की प्रारंभिक शिक्षा सुहेला, जिला बलौदाबाजार में हुई है। विवेकानंद विद्यापीठ कोटा, रायपुर से उसने 12वीं कंप्लीट की है। अभी कवर्धा में संचालित प्रदेश के एकलौते फिशरीज कॉलेज का स्टूडेंट है। वह पढ़ाई में प्रारंभ से ही टैलेंटेड रहा है।

ये हैं जिले के होनहार

पढ़ाई का लेवल अच्छा था इसलिए छग राज्य से अकेले वैभव का सलेक्शन हुआ, पिता वर्कशॉप में कार्यरत

देशभर क30 स्टूडेंट्स में को मिला है यह सुनहरा अवसर

वेगेंनिंगन यूनिवर्सिटी एंड रिसर्च नीदरलैंड में अलग-अलग विषयों में पढ़ाई के लिए इस साल देशभर से 30 स्टूडेंट्स का चयन हुआ है। इसमें वैभव महिलांग भी शामिल है। उसमें भी फिशरीज साइंस में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए अकेला वैभव ही होगा। पढ़ाई और स्कॉलरशिप तो उसे मिल जाएगी, फिलहाल 36 हजार रुपए सालाना कमाने वाले उसके पिता के पास इतने रुपए नहीं है, जिससे कि वह अपने बेटे को विदेश भेज सके।

पीएचडी करके डॉक्टरेट की उपाधि लेना चाहता है वैभव

वैभव बताते हैं कि फिशरीज साइंस ऐसा फील्ड है, जिसे हमारे यहां कम ही ध्यान दिया जाता है। विदेश में शिक्षा हासिल कर वे पीएचई करने डॉक्टरेट की उपाधि लेना चाहते हैं। ताकि परिवार चलाने में अपने पिता की मदद कर सकें।

कॉलेज की आेर से उसके मदद की हरसंभव कोशिश कर रहे


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