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लोहारा हॉस्पिटल में 3 माह से नसबंदी बंद क्योंकि ओटी की कल्चर जांच नहीं कराई

भास्कर न्यूज | कवर्धा/सहसपुर लोहारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहारा में 3 महीने से नसबंदी अॉपरेशन बंद है।...

Dainik Bhaskar

Jun 28, 2018, 02:55 AM IST
लोहारा हॉस्पिटल में 3 माह से नसबंदी बंद क्योंकि ओटी की कल्चर जांच नहीं कराई
भास्कर न्यूज | कवर्धा/सहसपुर लोहारा

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहारा में 3 महीने से नसबंदी अॉपरेशन बंद है। क्योंकि यहां ओटी (ऑपरेशन थियेटर) की कल्चर जांच नहीं कराई गई है। संक्रमण के खतरा बढ़ गया है। आरोप ये भी है कि दवाओं के लिए यहां के डॉक्टर ने मरीजों से 500- 500 रुपए रिश्वत लिया है। इनमें सच्चाई कितनी है, ये तो जांच से सामने आ पाएगा।

लेकिन ये साफ हो गया है परिवार नियाेजन कार्यक्रम (फैमिली प्लानिंग प्रोग्राम) की स्थिति बुरी है। इलाके की महिलाएं नसबंदी कराने के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर लगा रही है। सामुदायिक हॉस्पिटल लोहारा जाने पर उन्हें जिला अस्पताल कवर्धा जाने की सलाह दी जाती है। इधर 100 बिस्तर जिला अस्पताल में रजिस्ट्रेशन पर्ची खत्म हो गई है। यहां भी ओटी के कल्चर टेस्ट की तीसरी रिपोर्ट आना बाकी है। इस फेर में 30 से अधिक ऑपरेशन पेंडिंग हैं।

सुस्ती ऐसी कि 19 लाख रुपए मिलने पर भी शुरू नहीं हुआ रिनोवेशन का काम: सामुदायिक अस्पताल लोहारा में 11 जुलाई से जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा शुरू होना है। इससे पहले ओटी को संक्रमणमुक्त बनाने के लिए रिनोवेशन कराना है।

कवर्धा/सहसपुर लोहारा.सामुदायिक अस्पताल लोहारा, ओटी में लगा ताला।

बगैर कल्चर जांच के जुलाई 2017 से मार्च तक ऑपरेशन

15 जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक इस हॉस्पिटल में ओटी की कल्चर जांच कराए बिना ही संक्रमण के खतरे बीच नसबंदी ऑपरेशन किए गए। 18 जनवरी को यहां 30 और 25 जनवरी को 26 नसबंदी ऑपरेशन कर दिया। बाकी दिनों में 20 ऑपरेशन तो होती ही रहे हैं, जबकि ये अस्पताल ही 30 बिस्तर वाला है। शासन ने करीब 19 लाख रुपए भी मुहैया करा दिए हैं, लेकिन जिम्मेदारों की सुस्ती से रिनोवेशन का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

लापरवाही: ऑपरेशन के बाद हुई प्रेगनेंट, दिया बच्ची को जन्म

लोहारा अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन में लापरवाही बरतने का केस सामने आ चुका है। मामला अक्टूबर 2016 का है। ब्लॉक के हथलेवा गांव निवासी रानू पति राकेश कौशिक की 13 अगस्त 2015 को इस अस्पाल में नसबंदी हुई थी। फिर भी 14 महीने बाद वह प्रेगनेंट हुई और बच्ची को जन्म दिया। हॉस्पिटल प्रबंधन ने फंसने के डर से रानू को नसबंदी ऑपरेशन का सर्टिफिकेट देने से टालते रहे। तब तत्कालीन सीएमएचओ ने 30 मई 2016 को तत्कालीन बीएमओ डॉ. अर्जुन सिंह को पत्र लिखकर महिला की नसबंदी सर्टिफिकेट और अनुदान राशि देने आदेश दिया था।

जानिए, किस वर्ष कितने लोगों की हुई नसबंदी

वर्ष ऑपरेशन

2015-16 867

2016-17 1870

2017-18 1795

सीधी बात

डॉ. संजय खर्सन, बीएमओ, सहसपुर लोहारा

आदेश के बाद बंद


- वजह कुछ नहीं थी। ओटी का रिनोवशन करने आदेश मिला था, इसलिए बंद की गई है। रिनोवेशन के लिए करीब 19 लाख रुपए मिले हैं।


- नहीं ये गलत है। कुछ लोग जान-बूझकर ऐसा आरोप लगा रहे थे।


- मेरी जानकारी में ऐसा कोई केस नहीं है।

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