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रेस्क्यू आदेश निकला बैंगलुरू के नाम से, टीम पहुंची वेल्लोर, पर मजदूर थे आंध्र के चित्तूर में

Kawardha News - आंध्रप्रदेश के चित्तूर से लौटकर परमेश्वर डड़सेना | कवर्धा जिले के बैगा श्रमिकों को ठेकेदार के शोषण से बाहर...

Dainik Bhaskar

Jun 28, 2018, 03:00 AM IST
रेस्क्यू आदेश निकला बैंगलुरू के नाम से, टीम पहुंची वेल्लोर, पर मजदूर थे आंध्र के चित्तूर में
आंध्रप्रदेश के चित्तूर से लौटकर परमेश्वर डड़सेना | कवर्धा

जिले के बैगा श्रमिकों को ठेकेदार के शोषण से बाहर निकालने के गई रेस्क्यू टीम को सफलता मिल गई है। हालांकि, यह काम इतना आसान न था। कबीरधाम जिला प्रशासन ने रेस्क्यू आदेश कर्नाटक राज्य के बैंगलुरू के नाम पर निकाला। वजह थी कि जिस पीड़िता सघन बाई ने शिकायत की थी, उसने बैंगलुरू बताया था। हालांकि,बाद में पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि तमिलनाडु राज्य के वेल्लोर जिले में ही कबीरधाम के बैगा श्रमिक काम कर रहे हैं। पुलिस विभाग ने तमिलनाडु के वेल्लोर के पुलिस अधीक्षक के नाम से ही पत्र जारी किया, लेकिन जिला प्रशासन का पत्र बैंगलुरू कलेक्टर और श्रम आयुक्त के नाम से जारी हुआ। रेस्क्यू टीम के सामने चुनौती थी कि आखिर वह ऑपरेशन को अंजाम कैसे दे, लेकिन टीम को सफलता मिल ही गई।

रेस्क्यू टीम व्हाया नागपुर तमिलनाडु के वेल्लोर पहुंची। यहां श्रमिकों को छुड़ाने आई टीम वेल्लोर के काटपाडी स्टेशन में उतरी। यहां से काटपाडी पुलिस स्टेशन पहुंचने पर रेस्क्यू टीम ने जब उन्हें जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का अधिकृत पत्र दिखाया, तब स्थानीय पुलिस ने कहा कि वेल्लोर इलाके में तो एक भी मैंगो जूस की फैक्ट्री ही नहीं है। यह समस्या आ गई, कि आखिर श्रमिकों की तलाश कैसे हो।

तमिल व तेलुगु बोलने वाले दो राज्यों के बॉर्डर एरिया में रही उलझन

कवर्धा.चित्तूर में बंधक बने जिले के बैगा मजदूरों को छुड़ाकर बुधवार की शाम को कवर्धा लाया गया।

ठेकेदार का मोबाइल नंबर खंगाला तो उल्लीपुदुर का लोकेशन मिला

रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने फिर कबीरधाम पुलिस से संपर्क किया और ठेकेदार के मोबाइल नंबर को ट्रेस कराया। तब जानकारी निकलकर आया कि यह नंबर उल्लीपुदुर के इलाके में काम कर रहा है। यह इलाका तमिलनाडु में ही था। काटपाडी पुलिस को यह जानकारी दी गई, तो उन्होंने बताया कि वह इलाका बिल्कुल बॉर्डर में है और आंध्र बॉर्डर इस इलाके से महज 6 किलोमीटर में है। ऐसे में अब टीम के सामने एक ही विकल्प था कि आंध्र के बॉर्डर पुलिस स्टेशन से संपर्क करे। वेल्लोर पुलिस के स्पेशल ब्रांच ने इसमें मदद की और नंबर भी उपलब्ध कराया। नए थाने का पता मिला नरहरिपेटा क्षेत्र में गुड़ीबाला थाना, जो आंध्र के चित्तूर जिले में आता है। टीम बस से वहां पहुंची। यहां रेस्क्यू टीम ने एक-एक फैक्ट्री की जांच की तब जाकर कनकनेरी-गोल्लामडुगु गांव में वह फैक्ट्री मिली, जहां कबीरधाम के बैगा श्रमिक काम कर रहे हैं।

जानिए, उस कंपनी के बारे में, जहां काम करते थे बैगा श्रमिक

आंध्र के चित्तूर में जिस कंपनी में बैगा श्रमिक काम कर रहे थे, वह प्रदेश की जूस बनाने वाली बड़ी कंपनियों में से एक है। कंपनी फूड्स एंड इन्स लिमिटेड ने चित्तूर जिले के गुडीबाला मंडल के गोल्लामडुगु क्षेत्र में तीन पल्प प्रोसेसिंग यूनिट शुरु की। पहली 2002 में शुरु हुई, इसके बाद दूरी 2004 में और तीसरी 2007 में शुरु की गई। बताया जाता है कि कंपनी में 6 बोर्ड मेंबर है, जिनमें से कुछ प्रवासी भारतीय भी हैं। कंपनी आम के अलावा केला जूस, चिली सॉस, टोमेटो सॉस व अमरूद व पपीते का जूस भी सीजन के हिसाब से तैयार करती है। कंपनी में तकरीबन 1200 श्रमिक काम करते हैं, काम दो शिफ्ट में होता है। यहां जो मैंगो जूस तैयार की जाती है,कंपनी उसमें से 40 फीसदी हिस्सा कोकाकोला और पेप्सी जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों को सप्लाई करती है, जो सॉफ्ट ड्रिंक तैयार करती हैं।

पूरे ऑपरेशन में दो सबसे बड़ी चुनौती

100 फैक्ट्रियों में से सही जूस फैक्ट्री की पहचान करना: जब कवर्धा में सघन बाई ने कलेक्टर और एसपी के पास मामले की शिकायत की, तो उन्हें न तो सही जगह का नाम मालूम था और न ही उस कंपनी का नाम, जिसके खिलाफ शिकायत की गई थी। उसने पहले बैंगलुरू बताया, जो कर्नाटक का शहर है। इसके बाद काटपाडी -वेल्लोर बताया, जो तमिलनाडु में आता है। काटपाडी पहुंचने के बाद उसने चित्तूर बताया। चित्तूर में लगभग 100 मैंगो जूस फैक्ट्री है, जिनमें से एक को ढूंढना इतना आसान नहीं था। रेस्क्यू टीम ने सघन बाई के साथ लगभग 30 फैक्ट्रियों तक पहुंची, 90 किमी तक ऑटो से दौरा किया। कनकनेरी के पास गोल्लामडुगु में एक फैक्ट्री की पहचान टीम कर पाई।

तमिल और तेलुगु भाषा को समझना: रेस्क्यू टीम हिन्दी और अंग्रेजी अच्छे से समझ सकती थी। लेकिन यह इलाका ऐसा था जहां पहले टीम को तमिल भाषा का सामना करना पड़ा। हालांकि, कहीं कोई टूटी-फूटी हिन्दी भी समझ जाता और बोल भी जाता, तो कुछ दिक्कतें दूर हो जातीं। वेल्लोर के काटपाडी में स्पेशल ब्रांच के एसआई रामामूर्ति ने टीम की मदद की। इसके बाद टीम आंध्र के गुडीबाला थाने पहुंची, तो वहां के मेंबर्स तेलुगु में बात करने लगे। भाषा की फिर एक नई चुनौती सामने आई। हालांकि, थाने में महिला पुलिसकर्मी एस गौसिया बेगम की हिन्दी अच्छी थी, उन्होंने फैक्ट्री में दबिश के दौरान कबीरधाम के टीम की एक तरह से ट्रांसलेटर की भूमिका निभाई।

सभी मजदूरों को सकुशल कवर्धा लाया गया, उन्हें उनके गांव में भेजा जाएगा


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