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16 लाख बढ़ी लागत, सीएस बोले- कलेक्टर मना नहीं करते तो 8 साल पहले बनती ओटी

100 बिस्तर जिला अस्पताल में नेत्र राेगियों के लिए ऑपरेशन थियेटर (आई ओटी) बनना है। इस पर 28 लाख रुपए खर्च का अनुमान है।...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:05 AM IST
16 लाख बढ़ी लागत, सीएस बोले- कलेक्टर मना नहीं करते तो 8 साल पहले बनती ओटी
100 बिस्तर जिला अस्पताल में नेत्र राेगियों के लिए ऑपरेशन थियेटर (आई ओटी) बनना है। इस पर 28 लाख रुपए खर्च का अनुमान है। स्वास्थ्य विभाग ने 6 महीने पहले स्टीमेट तैयार कर फाइल मंत्रालय भेजी है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई है क्योंकि आई ओटी के लिए 8 साल पहले भी साढ़े 12 लाख रुपए दिए गए थे, जिस पर काम नहीं हुआ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के खाते में अब भी ये पैसा जाम पड़ा है। देरी से अब प्रस्तावित आई ओटी की लागत 16 लाख बढ़कर 28 लाख रुपए तक पहुंच गई है। शासन- प्रशासन की इस खींचतान से उन मरीजों को सुविधा से वंचित होना पड़ रहा हैं। सिविल सर्जन डॉ. एसआर चुरेन्द्र का कहना है कि 2010-11 में राशि मिल चुकी थी, उसी वक्त आई ओटी बन जाता, लेकिन तत्कालीन कलेक्टर ने मना कर दिया और काम शुरू ही नहीं हो पाया।

संक्रमण से हो चुकी घटना, दोबारा ऑपरेशन कर भिलाई भेजा था

2003 में यह हुआ था

वर्ष 2013 यानि 5 साल पहले अस्पताल में आई कैंप लगा था, जहां सैकड़ों मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद 19 मरीजों की आंखों में इंफेक्शन की शिकायत आई थी। मामला खुलने पर मरीजों को दोबारा ऑपरेशन के लिए भिलाई भेजा गया था।

लापरवाही: जनरल ओटी में ही होते हैं सभी तरह के ऑपरेशन

यहां जनरल ओटी है। यहां नसबंदी ऑपरेशन व सिजेरियन डिलवरी होती है। इसी ओटी में एक रूम में मोतियाबिंद व नेत्र संबंधी ऑपरेशन भी होते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ गया है। इंफेक्शन से मरीजों के आंखों रोशनी तक जा सकती है। हाल ही में ओटी में संक्रमण के खतरे के कारण नसबंदी ऑपरेशन बंद करा दिए हैं।

कवर्धा. जिला अस्पताल के इसी जनरल ओटी के एक रूम में होता है नेत्र रोगियों का ऑपरेशन।

11 हजार लोगों का पंजीयन, 3 हजार मोतियाबिंद पीड़ित

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 2019 तक कबीरधाम जिले को मोतियाबिंद मुक्त बनाने का संकल्प लिया है। इसी साल गांवों में कैंप लगाकर जांच के लिए 10,917 लोगों का रजिस्ट्रेशन किया। फरवरी 2018 की स्थिति में 6,908 लोगों का नेत्र परीक्षण हुआ, जिसमें 2,889 मोतियाबिंद पीड़ित मिले हैं।

सेपरेट आई ओटी बनने से मिलेगा लाभ

जिला अस्पताल में सेपरेट (अलग से) आई ओटी बनाने के लिए शासन को दोबारा एस्टीमेट भेजा है। अस्पताल के द्वितीय तल पर आई ओटी बनना प्रस्तावित है। साथ में 10 बिस्तर अंत: रोगी वार्ड का भी निर्माण होगा, जहां ऑपरेशन के बाद मरीजों को भर्ती रखा जाएगा। नेत्र रोग विभाग के लिए अलग से स्टाफ नियुक्त होगा, जो रोगियों की देखरेख करेंगे। वर्तमान में ऑपरेशन के बाद नेत्र रोगियों को जनरल वार्ड में ही रखा जाता है, इससे संक्रमण का खतरा है।

राशि स्वास्थ्य मिशन के खाते में



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