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38 साल में 4 से 5 लोगों को मिली सजा, इस राशि से बनवाया शौचालय

ग्राम पोंड़ी के सुन्नी मुस्लिम समाज ने शराब को लेकर 38 साल पहले फैसला किया कि समाज का कोई भी व्यक्ति शराब सेवन व शराब...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 25, 2018, 03:05 AM IST

ग्राम पोंड़ी के सुन्नी मुस्लिम समाज ने शराब को लेकर 38 साल पहले फैसला किया कि समाज का कोई भी व्यक्ति शराब सेवन व शराब की बिक्री में नहीं रहेगा,यह फैसला आज भी कायम है। गांव में वर्तमान में 195 मुस्लिम परिवार निवासरत हैं, जहां इनकी संख्या करीब 700 है। शराब को लेकर जागरूक इस समाज ने वर्ष 1980 में ही शराबबंदी का फैसला लिया था तब से लेकर आज तक पोंड़ी के मुस्लिम समुदाय में शराब पूर्णतः प्रतिबंधित है। शराब पीने वाले को बाकायदा सजा भी दी जाती है। शराब पीने पर 5 हजार रुपए जुर्माना व 40 दिन की नमाज पढ़नी पड़ती हैं।

समाज ने शराबखोरी रोकने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया है, यह कमेटी किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शराब पीने को लेकर जमात में प्रस्ताव रखती है। खास बात यह है कि इस कमेटी के प्रस्ताव को समाज के बड़े मुखिया भी खारिज नहीं कर सकते।

1980 के दौर में बढ़ गई थी शराब की लत, इसलिए लिया यह फैसला

समाज के कार्यकारिणी सदस्य मुश्ताक खान ने बताया कि 1980 के दाैर में समाज के कुछ लोगों द्वारा शराब पीने व बेचने की शिकायत सामने आने लगी। उसी दौर में समाज द्वारा उन लोगों को समझाइश दी गई। इसी समय इस सजा को लेकर प्रस्ताव किया गया। तब से लेकर आज तक समाज के लोग नियम का पालन करते हैं। मुश्ताक खान के मुताबिक 2007 के बाद समाज में एक भी शराब संबंधित मामले नहीं आए हैं।

फैसला : पोंड़ी में मुस्लिम समाज ने शराब को लेकर 38 साल से लगा रखा है प्रतिबंध असर : ग्यारह साल से समाज में आबकारी एक्ट का एक भी मामला सामने नहीं आया

समाज के साथ बारातियों पर भी प्रतिबंध, फिजूलखर्ची पर रोक

मुस्लिम समाज शराब को लेकर बेहद संजीदा है। यही कारण है कि यहां के सामाजिक लोग शराब को छूने से भी डरते हैं। इस पहल के लिए राज्य भर में पोंड़ी मुस्लिम समाज का नाम जाना जाता है। यही नहीं पोंड़ी में जब किसी बेटी की शादी अन्य जिले के मुस्लिम समुदाय के लड़के से तय होती है तो सगाई के समय ही लड़के वालों को बता दिया जाता है कि हमारे यहां शराबबंदी है, मेहरबानी करके ऐसे बारातियों को न लाएं, जो शराबी हों। इसी तरह शादी में फिजूलखर्ची को रोकने के लिए बारात में बैंड-बाजा पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

पुलिस चाैकी प्रभारी ने भी कहा-इस पहल से नहीं आते एक भी मामले

अर्थदंड से प्राप्त राशि का बनाया शौचालय

अभी तक शराब पीने को लेकर कुछ लोगों को सजा भी मिल चुकी है। इन्ही लोगों के उपर लगाए गए जुर्माना की राशि से शौचालय का निर्माण कराया गया है।मुस्लिम समाज के शराबबंदी को लेकर समाज के युवाओं की पूरी सहमति है। युवा तो सामाजिक बैठक में इससे से भी कड़ी सजा की मांग करते हैं, लेकिन समाज में मुखिया के तौर पर बड़े बुजुर्ग ही फैसला करते हैं। पोंड़ी पुलिस चौकी प्रभारी एसआई नितिन तिवारी के मुताबिक उनके 10 माह के कार्यकाल में पोंड़ी मुस्लिम समाज के एक भी लोगों के खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं की गई है। इसके पीछे समाज द्वारा शराबबंदी मुख्य वजह है,जो अपने आप में अनूठी पहल है।

शराब को लेकर ये कहती है हदीस

पोंड़ी जामा मस्जिद के पेश ईमाम अश्फाक रजा ने बताया कि इस्लाम में शराब पीने वाले व्यक्ति की कोई जगह नहीं है। हदीस में शराब को हराम माना गया है, शराब पीना, शराब बेचना व शराब को छूना भी गुनाह है। ऐसा करने वाला व्यक्ति 40 दिनों तक नापाक(अशुद्ध) रहता है।

40 दिन नमाज अदा करने कहते हैं

वर्ष 1980 में ही समाज ने शराबबंदी का फैसला लिया गया था। यहां शराब पीने वालों पर 5 हजार रुपए जुर्माना के साथ 40 दिन नमाज अदा कर अपने पाप धोने कहा जाता है, ये आगे भी जारी रहेगा। शेख नियामुद्दीन,नायब मुतवल्ली, पोड़ी मुस्लिम जमात

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