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स्कूल खुले 15 दिन, बसों की नहीं हुई जांच जिले में 5 हजार बच्चों की सुरक्षा दांव पर

जिले में सभी निजी व शासकीय स्कूल 17 जून से शुरू हो चुके हैं। कबीरधाम में 54 निजी स्कूलों में कुल 156 स्कूली बस हैं, जिनके...

Danik Bhaskar

Jul 04, 2018, 03:10 AM IST
जिले में सभी निजी व शासकीय स्कूल 17 जून से शुरू हो चुके हैं। कबीरधाम में 54 निजी स्कूलों में कुल 156 स्कूली बस हैं, जिनके जरिए बच्चे स्कूल पहुंचते हैं। लेकिन इस साल इन बसों की जांच तक नहीं की गई है और बगैर जांच किए बसों से ही स्कूली बच्चे ढोए जा रहे हैं। जांच का जिम्मा पुलिस व आरटीओ को सौंपा गया है, लेकिन इन्होंने जांच नहीं की है, ऐसे में हर दिन इन बसों से स्कूल पहुंचने वाले 5 हजार से अधिक स्कूली बच्चों की जान खतरे में है।

स्कूल खुलते ही जिलेभर में बच्चों को स्कूल ले जाने और वापस लाने के लिए बसें व आॅटो सरीखे छोटी गाड़ियां दौड़ने लगती हैं। इस बार भी स्कूल खुले दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एक भी स्कूल बस की फिटनेस जांच नहीं की गई है। परिवहन के नाम पर स्कूल संचालक अभिभावकों से भारी-भरकम शुल्क लेने के बाद भी बसों के फिटनेस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अनफिट बसें: आरटीओ विभाग के मुताबिक जिले में 156 स्कूली वाहन हैं। इन वाहनों में हर दिन 5 हजार से अधिक बच्चे अपने घर से स्कूल तक का सफर करते हैं। बावजूद इसके अभी तक बसों की जांच नहीं होने के चलते बिना रोक-टोक स्कूली वाहन सड़कों में दौड़ रही हैं। अनफिट बसों का इस्तेमाल हो रहा है।

कबीरधाम जिले में 156 स्कूल

कवर्धा. पालक स्कूल बस में बच्चों को बैठाते हुए।

4 माह पहले जांच, 9 वाहनों पर हुई थी कार्रवाई

पुलिस विभाग के मुताबिक 21 फरवरी को आरटीओ व पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से स्कूल बसों की जांच की थी। इनमें स्कूल संचालकों ने 103 वाहनों को जांच कराने भेजा था। इस जांच में सभी वाहनों में कमी पाई गई। इसमें ज्यादा कमी पाए जाने पर 9 वाहनों का फिटनेस रद्द कर दिया गया था। इनमें सीजी 09 एफ 0133, सीजी 09 एफ 0140, सीजी 09 एफ 0148, सीजी 09 एफ 0154, सीजी 09 एफ 0201, सीजी 09 एफ 0228, सीजी 09 एफ 0252, सीजी 09 जेसी 7148, सीजी 09 एफ - 0175 शामिल थे।

बच्चों की सुरक्षा अनफिट बसों के भरोसे

इस तरह की जा रही लापरवाही

सीन 1. सहायक नहीं रखते: सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन अनुसार सभी स्कूली बसों में सहायक व्यक्ति रखना अनिवार्य है। सहायक की जिम्मेदारी वाहन में बैठे बच्चों को सड़क पार कराना व बस में बैठाने की है। लेिकन इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। पालक खुद अपने बच्चों को वाहन तक पहुंचाते हैं और छुट्टी होने पर वापस ले जाते हैं।

सीन 3. अब ऑटो से भी काम: इधर बच्चों को ऑटो से स्कूल भेजा जा रहा है। नियम अनुसार ऐसे ऑटो की पहचान जरुरी है, साथ ही अॉटो एक ओर से बंद रहना आवश्यक है। लेकिन विभाग की ओर से अभी तक ऐसे ऑटो की पहचान ही नहीं की गई। डीएसपी कामता दीवान के मुताबिक एेसे ऑटो को यातायात विभाग में पंजीयन कराने नसीहत दी गई है।

वाहन में दरवाजा खुला रहता है।

सीन 2. वाहन चलने पर खुले हुए मिले दरवाजे: स्कूली वाहनों को लेकर लगातार लापरवाही की जा रही है। आरटीओ नियम के मुताबिक वाहन चलने पर दरवाजे बंद रखना अनिवार्य है। लेकिन ज्यादातर बस चलते समय दरवाजे बंद नहीं किए जाते। ऐसे में कभी भी अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है। कोई भी स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करता है।

सुप्रीम कोर्ट की यह है गाइडलाइन

बस का रंग पीला हो, आगे व पीछे स्कूल बस लिखा हो, यदि बस किसी ऑपरेटर से ली है तो उस पर स्कूल ड्यूटी लिखा हो, खिड़कियों पर ग्रिल व शीशे हों, आग बुझाने का इंतजाम हो, फर्स्ट एड बॉक्स हो, स्कूल का फोन नंबर लिखा हो, बच्चों को चढ़ाने-उतारने के लिए एक सहायक या सहायिका हो, दरवाजे ठीक से बंद होते हों, व स्पीड 40 किमी प्रतिघंटा से ज्यादा न हो, वाहन चलने पर आगे-पीछे का दरवाजा बंद हो।

समय तय कर जांच कराएंगे


फरवरी में जांच की थी


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