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61 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी, क्योंकि टॉयलट की गंदगी रिसकर जा रही भीतर

कबीरधाम जिले में 230 गांव के 61 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी निकल रहा है। ये हानिकारक बैक्टीरिया आसपास टॉयलेट...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:30 AM IST

61 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी, क्योंकि टॉयलट की गंदगी रिसकर जा रही भीतर
कबीरधाम जिले में 230 गांव के 61 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी निकल रहा है। ये हानिकारक बैक्टीरिया आसपास टॉयलेट की गंदगी के रिसाव के कारण हैंडपंपों के पानी में मिल रहा है। इसका चौंकाने वाला खुलासा स्वास्थ्य विभाग के मितानिनों की प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट से ग्रामीण क्षेत्र में हड़कंप मचा है।

राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र रायपुर की ओर से हैंडपंपों के पानी की शुद्धता जांचने के लिए मितानिनों को एचटूएस वायल नामक 500 किट उपलब्ध कराई गई थी। पिछले डेढ़ महीने में 110 से ज्यादा मितानिनों ने अपने क्षेत्र के 230 गांवों में करीब 300 हैंडपंपों के पानी का सैंपल लेकर किट से जांच किया। जांच में प्रथम 24 घंटे के अंदर ही 61 हैंडपंपों के पानी का रंग काला पड़ गया, जिससे पानी में बैक्टीरिया होने की पुष्टि की जा रही है। ये रिपोर्ट पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (पीएचई) विभाग को सौंपी जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों को इनका पानी पीने या अन्य उपयोग करने पर रोक लगा दी गई है।

बोड़ला में सर्वाधिक 24 हैंडपंपों के पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि

बोड़ला ब्लाॅक में सर्वाधिक 24 हैंडपंपों के पानी में बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है। इसी तरह पंडरिया ब्लॉक के 18, कवर्धा ब्लॉक के 14 और सहसपुर लोहारा ब्लॉक के 5 हैंडपंपों से बैक्टीरिया युक्त पानी निकल रहा है। खास बात ये है कि अब भी 70 से ज्यादा जगहों से पानी जांच की रिपोर्ट आना बाकी है।

पड़ताल: जहां बैक्टीरिया की पुष्टि, वहां शौचालय के पानी की निकासी

पड़ताल से पता चला है कि जिन हैंडपंपों के पानी में बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, उसके आसपास शौचालय के गंदे पानी की निकासी हो रही है। गंदगी के रिसाव से बैक्टीरिया जलस्रोत में जा रहे हैं, जिससे पानी दूषित हाे रहा है। आप भी जानिए, कहां- कहां ऐसी स्थिति...

केस 1. उपयोग पर रोक लगाई: ग्राम नेवारी के बीच पारा में हैंडपंप का पानी बैक्टीरिया युक्त है। इस हैंडपंप का उपयोग 220 घर के लोग पीने के लिए करते हैं। घरों के शौचालय का गंदा पानी इसके आसपास बहता है, जिसके चलते इसमें बैक्टीरिया निकल रहा है। ग्रामीणों को इस हैंडपंप के पानी का उपयोग पर रोक लगाई है।

कवर्धा.सिरमी डबरी में हैंडपंप से पानी का सैंपल जुटाती मितानिन।

केस 2. बैक्टीरिया मिला होने की पुष्टि: लखनपुर कला गांव के चौगन पारा में सामुदायिक नल लगा है। इस नल से आसपास के 50 परिवार पीने का पानी जुटाते हैं। कई परिवार यहीं पर बर्तन व कपड़े धोते हैं। इस नल के पानी में बैक्टीरिया मिला होने की पुष्टि की है। अब ग्रामीण पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

केस 3. हैंडपंप के आसपास कचरे का ढेर, 50 घर कर रहे उपयोग: ग्राम जमुनिया के बीच पारा में लगे हैंडपंप का उपयोग 50 घरों के लोग पीने के लिए करते हैं। इस हैंडपंप के आसपास कचरों का ढेर है। साथ ही गंदे पानी की निकासी भी, जिसके चलते हैंडपंप से दूषित पानी निकलने की बात सामने आई है।

जानिए, क्या होता है इस वायल जांच में

राज्य स्वास्थ्य संसाधन केंद्र रायपुर के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर प्रबोध नंदा बताते हैं कि जल स्रोताें में बैक्टीरिया की उपलब्धता की जांच के लिए एचटूएस वायल का उपयोग किया जाता है। इस वायल में जांच के लिए पेयजल स्रोत का पानी भरकर रखा जाता है। अगर 24 से 48 घंटे के बीच पानी का रंग काला पड़ जाता है, तो उसमें बैक्टीरिया की पुष्टि होती है।

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक

एचटूएस वायल जांच में हैंडपंपों से दूषित पानी की शिकायत आ रही है। इससे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती है। कई जगहों पर हैंडपंप के पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा पाई गई है। खासतौर से जब किसी व्यक्ति के मुंह में छाले हैं, तो परेशानी बढ़ सकती है।

सैंपल रिपोर्ट में यह निकला

शासन से प्रमाणित इस वायल किट के जरिए करीब 300 हैंडपंपों के पानी के नमूनों की जांच की, जिससे ये रिपोर्ट सामने आई है। अल्का दुबे, जिला समन्वयक, स्वास्थ्य समिति

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