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5 साल में नहीं बना पॉलिटेक्निक कॉलेज भवन पर्दे लगाकर लगती हैं अलग-अलग कक्षाएं

बिना प्रैक्टिकल के हर साल कवर्धा के पॉलीटेक्निक कॉलेज से विद्यार्थी पढ़कर निकल रहे हैं। कॉलेज में प्रैक्टिकल के...

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 04:00 AM IST
बिना प्रैक्टिकल के हर साल कवर्धा के पॉलीटेक्निक कॉलेज से विद्यार्थी पढ़कर निकल रहे हैं। कॉलेज में प्रैक्टिकल के लिए मशीनें तो हैं, लेकिन प्रैक्टिकल के लिए जगह नहीं है। नया कॉलेज भवन 5 साल से निर्माणाधीन हैं व अब तक बनकर तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि पुराने जिला पंचायत के एक ही हॉल में पर्दे लगाकर आजू-बाजू दो-तीन कक्षाएं लग रही हैं।

2007 में राज्य सरकार ने जिले के युवाओं को बड़ी सौगात देते हुए जिले की पहली पॉलीटेक्निक कॉलेज की स्थापना की। भवन के अभाव में 2007 से लेकर अब तक पुराने जिला पंचायत में कक्षाएं लग रही हैं। वर्ष 2013 में शासन ने महराजपुर में सात एकड़ जमीन में भवन निर्माण को लेकर सहमति दी।

इस भवन के लिए 8 करोड़ 99 लाख 60 हजार रुपए की स्वीकृति दी। 2013 में इस भवन के लिए भूमिपूजन किया गया। विडंबना है कि अब तक यह कॉलेज भवन तैयार नहीं हो सका है। बिल्डिंग के अभाव में पिछले 10 साल से इस कॉलेज में प्रेक्टिकल सामग्री अनुपयोगी पड़े हैं। इधर 9 साल में बिना प्रेक्टिकल के ही 289 स्टूडेंट्स पास आउट हो चुके हैं।

कवर्धा.एक ही कमरे में पर्दे लगाकर इस तरह पढ़ाई कराई जा रही है, भवन नहीं होने से प्रैक्टिकल सामान भी खराब।

कॉलेज की मौजूदा स्थिति पर एक नजर

अब तक पास आउट हुए विद्यार्थी

ब्रांच संख्या

इलेक्ट्रॉनिक 132

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेली कम्यूनिकेशन 71

कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग 86

पाठ्यक्रम 03

कुल सीटें 90

(सभी ब्रांचों में 30-30 सीटें)

लोकार्पण से पहले स्थिति खराब, खिड़की-दरवाजे टूटे, 2013 से हो रहा निर्माण

पॉलिटेक्निक का निर्माण कार्य वर्ष 2013 से प्रारंभ किया गया। लेकिन अभी तक इसका निर्माण पूरा नहीं किया जा सका। पीडब्लूडी विभाग के अफसरों की मानें, तो 1-2 महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर लोकार्पण किया जाएगा। लेकिन वर्तमान में भवन की स्थिति बेहद खराब है। लोकार्पण से पहले ही भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं। वहीं दीवारें पर सीपेज आ रही है। कांच के खिड़की-दरवाजे टूट रहे हैं।

बिना प्रैक्टिकल के बनेंगे इंजीनियर

इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड टेली कम्यूनिकेशन के स्टूडेंट्स को प्रेक्टिकल कराना जरूरी है। लेकिन दोनों ब्रांच में बिना प्रेक्टिकल के ही स्टूडेंट्स पास हुए हैं। हालांकि, इस कॉलेज के कंप्यूटर साइंस के लिए लैब की व्यवस्था है, जिसके चलते इस ब्रांच के छात्र-छात्राओं को प्रेक्टिकल को लेकर परेशानी नहीं होती। 10 वर्षों में इस कॉलेज का हॉस्टल भी नहीं है व बाहरी स्टूडेंट्स को किराये के मकान में रहना पड़ता है।

कॉलेज की स्थिति इतनी खराब कि इस वर्ष 29 सीटों पर नहीं हुआ एडमिशन

पॉलीटेक्निक कॉलेज में एडमिशन व्यापमं द्वारा आयोजित पीपीटी के मेरिट के आधार पर दिया जाता है। बीते साल की काउंसिलिंग में दो ब्रांच की 29 सीटें खाली रह गईं, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्यूनिकेशन में महज दो स्टूडेंट ने एडमिशन लिया है। बता दें कि इस ब्रांच में 30 सीटें आवंटित है। स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय हर वर्ष इस कॉलेज का निरीक्षण करती है। निरीक्षण के दौरान भवन की कमी को लेकर कई बार उच्च कार्यालयों में पत्र व्यवहार भी किया जाता है, लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती।

प्रैक्टिकल सामान अब भी बोरे से ढंके हुए

मौजूदा भवन में जहां कॉलेज संचालित है, वहां जगह की कमी है। स्थिति ऐसी है कि एक हाल में पर्दे लगाकर दो कक्षा लगाई जाती है। वहीं कॉलेज में प्रेक्टिकल के लिए तकनीकी शिक्षा संचानालय ने तो भारी-भरकम मशीनें भेज रखी हैं। वे भी जगह नहीं होने से कॉलेज गेट में पड़ी हुई हैं। जिन मशीनों से स्टूडेंट्स को प्रेक्टिकल करना है, उनके कवर तक नहीं खुले हैं।

सीधी बात: केपी संत, ईई, पीडब्लूडी

अगस्त में पूरा कर लेंगे


- शुरुआती दौर में जमीन नहीं मिलने के चलते काम देर से शुरु हुआ है। वहीं वर्क मैप नहीं आने के कारण लेट हुआ है। अगस्त माह में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।


- देखिए, वर्तमान में भवन निर्माण किया जा रहा है। इस दौरान टूट-फूट होते रहता है। लोकार्पण से पहले इसे ठीक करा लिया जाएगा।


- लापरवाही बरतने वालों पर 2 बार कार्रवाई की गई है। समय पर काम पूरा नहीं करने को लेकर ठेकेदार को नोटिस जारी किया जा चुका है।