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कवर्धा शहर को मॉडल बनाने शंघाई, बोस्टन और एम्स्टडर्म में हुए प्रयोग को अपनाने पर की चर्चा

शहर को मॉडल बनाने के लिए जिला पंचायत में डेढ़ घंटे बैठक चली। इस बैठक में सांसद के साथ जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 11, 2018, 04:00 AM IST

शहर को मॉडल बनाने के लिए जिला पंचायत में डेढ़ घंटे बैठक चली। इस बैठक में सांसद के साथ जनप्रतिनिधि, जिला प्रशासन की पूरी टीम व शहर के लोग भी शामिल थे। बैठक में अमेरिका से आए एक्सपर्ट ने कवर्धा शहर के भविष्य में व्यवस्थित व प्रकृति से जुड़े हुए विकास के आधार पर शंघाई, बोस्टन व एम्स्टडर्म जैसे शहरों में हुए विकास का उदाहरण दिया।

जिला प्रशासन ने शहर को मॉडल बनाने के लिए अलग-अलग कंसलटेंट बुलाए। इन्होंने अपने सुझाव डेढ़ घंटे तक शहर के लोगों से साझा किए। इससे पहले जिला प्रशासन की नगर पालिका की टीम ने अब तक नगर पालिका के चल रहे काम और हो चुके कार्यों की जानकारी दी।

बताया गया कि कैसे नवीन बाजार, हाट बाजार को लेकर काम किया जा रहा है। सार्वजनिक भवन का काम भी पूरा किया गया है। मुक्तिधाम ब्यूटीफिकेशन, भारत माता चौक फ्लैग होस्टिंग का काम शुरु होने वाला है और पालिका बाजार का काम बजट के इंतजार में रुका हुआ है।

भोरमदेव बनेगा शहर की पहचान, इसी के आधार पर देंगे ऐतिहासिक शहर का स्वरूप: इस बैठक में तय हुआ कि शहर की अपनी एक पहचान बनानी चाहिए। यहां पहले से भोरमदेव मंदिर है और उसी मंदिर को आधार बनाकर शहर का विकास ऐसा हो कि यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को किसी ऐतिहासिक शहर का अनुभूति हो। ऐसे में शहर के चारों मुख्य द्वार पर ऐसे गेट बनाने की बात हुई, जिससे लगे कि पर्यटक किसी हेरिटेज सिटी में प्रवेश कर रहे हैं।

साथ ही कबीरदास जी को भी इस पहचान में शामिल करने पर चर्चा हुई। शहर के डिवाइडर, फूड कार्ट, स्कूल बस स्टॉप सबकुछ इसी तर्ज पर स्टोन से विकसित करने पर चर्चा हुई।

चीन-यूएसए के बड़े शहरों में हुए प्रयोग के आधार पर काम करने को लेकर दिया प्रजेंटेशन

तालाबों को जोड़ते हुए पार्क बनाने पर बात

बैठक में यह भी बताया गया कि कवर्धा में तालाबों को जोड़ते हुए पार्क बनाए जा सकते हैं। बताया गया कि बोस्टन सिटी में पूरा शहर एक पार्क से जुड़ा हुआ है। एम्स्टडर्म में ऐसा स्थान है, जो शहर की आइडेंटिटी बनाती है। वहीं चीन के शंघाई में हांगपाउ नदी में पानी बिना वाटर ट्रीटमेंट के जाता है, लेकिन पेड़-पौधों के बीच से होकर जाने के कारण यह प्राकृतिक रूप से साफ हो जाता है। ऐसे ही प्रयोग कवर्धा में भी किया जा सकता है।

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