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ड्यूटी पर सोते रहे डॉक्टर और नर्स, महिला परिजन ने कराई डिलिवरी, नवजात की मौत

जिला अस्पताल में डॉक्टर और नर्सों की लापरवाही से रविवार को जन्म के कुछ देर बाद एक नवजात शिशु की मौत हो गई। क्याेंकि...

Danik Bhaskar | Jul 02, 2018, 04:10 AM IST
जिला अस्पताल में डॉक्टर और नर्सों की लापरवाही से रविवार को जन्म के कुछ देर बाद एक नवजात शिशु की मौत हो गई। क्याेंकि जब बच्चा पैदा होने वाला था और गर्भवती लेबर पैन से तड़प रही थी, तब नाइट ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और नर्सें सो रहे थे। गर्भवती को तड़पता देख साथ आई महिला परिजन ने ही डिलवरी करा दी और बच्चा मर गया।

पता लगने पर नर्सों ने प्रसूता को इंजेक्शन लगाया। कपड़े बदलवाए व नवजात के शव को मर्च्यूरी में भिजवा दिया ताकि लापरवाही छिपी रहे। घटना रविवार तड़के 3 से 4 बजे के बीच की है। बोड़ला ब्लॉक के खैराहा गांव निवासी जगराम बैगा की प|ी सुखियारिन बाई 7 महीने के गर्भ से थी। महतारी 102 से शनिवार सुबह 10 बजे हॉस्पिटल लाकर उसे भर्ती कराया। रविवार तड़के 3 बजे वह प्रसव पीड़ा से तड़पने लगी। परेशान परिजन कभी डॉक्टर, तो कभी नर्स को ढूंढने के लिए दौड़ लगाए। कोई नहीं आया, तो सास रामकुंवर और मां मीनाबाई ने मिलकर गर्भवती का प्रसव कराया।

कवर्धा. गर्भवती के साथ आई महिला परिजन।

तीसरी बार प्रेग्नेंट हुई थी महिला नर्सों ने बराबर ध्यान नहीं दिया

पीड़ित सुखियारिन बाई को पहले से दो बच्चे हैं। वह तीसरी बार प्रेग्नेंट हुई थी। जचकी का वक्त नजदीक आ चुका था, इसलिए परिजन उसे हॉस्पिटल लेकर आए थे, लेकिन रात की ड्यूटी पर तैनात 2 नर्सों ने बराबर उस पर ध्यान नहीं दिया और अपने कमरे में जाकर सो गईं। परिजन के उठाने पर भी नहीं जागे।

कुव्यवस्था: अल्ट्रासाउंड मशीन तो है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं

अल्ट्रासाउंड मशीन चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अप्रैल 2017 से पहले तक यहां रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जीके सूर्यवंशी थे, लेकिन उनकी मौत हाे गई। यह पद खाली है।

परिजन से बोला था अल्ट्रासाउंड करवा लो, नहीं कराया..

नाइट ड्यूटी में डॉ. धर्मेन्द्र कुमार भी उस वक्त सो रहे थे। उनका कहना है कि जब वे नाइट ड्यूटी पर आए व केस हैंडओवर हुआ, तो उन्होंने सुखियारिन बाई का चेकअप किया था। शिशु की हार्टबीट का पता नहीं चल पा रहा था। इस पर परिजन से कहा था कि गर्भवती का अल्ट्रासाउंड करवा लो, लेकिन नहीं कराया।

कार्रवाई की सिर्फ अनुशंसा करते हैं, फिर दबा देते हैं केस

जिला अस्पताल में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। डॉक्टर्स और नर्सों की लापरवाही के बाद अफसर कार्रवाई की सिर्फ अनुशंसा करते हैं, फिर केस दबा देते हैं।

बताया एक बच्चा, निकले जुड़वा

केस 1. कवर्धा के वार्ड- 17 निवासी प्रकाश साहू की गर्भवती प|ी कल्याणी साहू ने फरवरी 2017 को जिला अस्पताल में सोनोग्राफी कराई। जांच में बताया कि गर्भ में एक बच्चा है आैर स्वस्थ है। 19 मार्च को हल्का दर्द होने पर कल्याणी को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। स्थिति बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल जाने को कह दिया। निजी हॉस्पिटल में सोनाेग्राफी कराई, तो जुड़वा बच्चे होने का पता चला। उसी दिन महिला ने दो बच्चों को जन्म दिया, जिसमें से एक की मौत हो गई।

केस 2. सितंबर 2015 को जिला अस्पताल में गंगानगर के तारकेश कुमार सिन्हा की प|ी पूर्णिमा को डिलीवरी के लिए लाए थे। उस वक्त ड्यूटी में तैनात महिला डॉक्टर मौजूद नहीं थी। समय पर डॉक्टर नहीं मिलने से डिलिवरी के दौरान ही नवजात की मौत हो गई।

सीधी बात

दोष साबित हुआ तो कार्रवाई करेंगे


-ऐसा नहीं है। रात की ड्यूटी में डॉक्टर बराबर मरीजों का ध्यान रखते हैं।


-मैंने जानकारी ली, तो बता रहे थे कि महिला को लेबर पैन ज्यादा नहीं था। डिलवरी का समय भी नहीं आया था।


-पहले तो दोनों पक्षों से बात की जाएगी। उसके बाद ही दोष साबित हो सकेगा। अगर स्टाफ दोषी है, तो नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

डॉ. एसआर चुरेन्द्र, सीएस सह अधीक्षक