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तीन साल पहले जैविक ब्लॉक बनाने साढ़े 5 लाख खर्च किए, नतीजा सिफर

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग वर्ष 2015 में पंडरिया व बोड़ला ब्लॉक का चयन किया। इसमें केवल बोड़ला ब्लॉक के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 12, 2018, 05:45 AM IST

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    जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग वर्ष 2015 में पंडरिया व बोड़ला ब्लॉक का चयन किया। इसमें केवल बोड़ला ब्लॉक के गांवाें को चयनित कर खेती शुरू की गई। लेकिन इन गांव में किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ। गौर करने की बात है कि कृषि विभाग को भी मालूम नहीं है कि जैविक खेती से किसानों का क्या फायदा हुआ है। इसे लेकर साढ़े 5 लाख रुपए खर्च किया गया था।

    अब विभाग द्वारा फिर से 10 लाख रुपए खर्च कर बोड़ला ब्लॉक के 200 एकड़ में जैविक खेती के लिए काम किया जाएगा। वहीं इस सत्र की खेती का काम जून माह से प्रारंभ हो गया है, लेकिन अभी तक 200 एकड़ भूमि में जैविक खेती को लेकर कोई भी काम नहीं गया है।

    खर्च किया जाना था 7.50 लाख, खर्च नहीं कर पाए: विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2015 से 2017 तक बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बाेंदा-3 के 75 एकड़ को चयनित किया गया था। इसके लिए 7.50 लाख रुपए स्वीकृत किया गया, लेकिन विभाग ने योजना का सही क्रियान्वयन नहीं किया। यही कारण है कि विभाग ने 3 साल बाद 2 लाख रुपए शासन को सरेंडर करना पड़ा। इस राशि का उपयोग किसानों को प्रोत्साहन राशि व जैविक कृषि संबंधित सामग्री को लेकर खर्च करना था।

    पंडरिया और बोड़ला ब्लॉक का किया गया था चयन, नहीं मिला लाभ

    कवर्धा.जैविक खेती को लेकर एक बार ट्रेनिंग दी गई थी, चयनित गांव में कृषि का कार्य शुरु हो गया, सामग्री नहीं पहुंची।

    इस सत्र में 10 लाख किया जाएगा खर्च, काम शुरू नहीं

    इधर इस सत्र के लिए बोड़ला ब्लॉक के ग्राम समनापुर, छुही, झलमला, धवईपानी के 200 एकड़ भूमि में जैविक खेती को लेकर चयन किया गया। इन गांव में जैविक खेती को लेकर 10 लाख रुपए खर्च किया जाना है। इनमे प्रति एकड़ 10 हजार रुपए व 200 किसान शामिल हैं। सभी किसानों को 25 सौ रुपए प्रोत्साहन राशि भी दिया जाएगा। वहीं जैविक खेती के लिए नाडेप व वर्मी टैंक का निर्माण किया जाएगा। विभाग ने इन गांवों में टैंक का निर्माण नहीं करा सका है।

    इसलिए चुना गया बोड़ला ब्लॉक

    बोड़ला ब्लॉक के कई वनांचल गांव अब भी मुख्यधारा से दूर है। इन गांव के किसान आज भी परंपरागत तरीके से बिना किसी उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग किए बिना खेती करते हैं। इसलिए कृषि विभाग ने बोड़ला ब्लॉक को चुना है।

    उत्पादकता बढ़ाने के लिए यह पद्धति कारगर

    जैविक खेती कृषि उत्पादन की वह पद्धति है, जिसके तहत खेतों में न तो कोई कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है और न ही किसी प्रकार के संश्लेषित उर्वरक का। जैविक खेती में फसल चक्र, फसल अवशेष, पशु खाद व यांत्रिक विधियों का उपयोग भूमि की उर्वरता तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। ऐसी खेती से प्राप्त होने वाले फसल मानव, पशु व भूमि तीनों के लिए अच्छा होता है। लगभग 130 देशों में 240 लाख हेक्टेयर भूमि में जैविक खेती की जा रही है।

    सीधी बात

    अभी तक रिपोर्ट नहीं आई

    जिले में 3 वर्षाे से जैविक खेती को लेकर काम किया जा रहा है। इससे किसानों को क्या फायदा हुआ?

    - यह केन्द्र सरकार की प्रोजेक्ट हैं, 2017 में तीन वर्ष पूरे हुए है। अभी तक रिपोर्ट नहीं आई हैं।

    3 वर्ष के लिए शासन ने 7.50 लाख रुपए स्वीकृत किया गया था। उसमे में 2 लाख खर्च नही कर पाए। ऐसा क्या?

    - देखिए इस राशि का उपयोग जैविक कृषि के लिए किया जाता। लेकिन इससे संबंधित कई सामग्री पहले से उपलब्ध था। इसके चलते बचत रािश को सरेंडर करना पड़ा।

    इस साल फिर से 10 लाख रुपए खर्च किया जाना हैं। इसे लेकर अभी तक शुरुआत नही की गई?

    - हमारे पास पूरा साल भर का समय है। जल्द ही काम किया जाएगा।

    एनएल पांडेय, उपसंचालक कृषि

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