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बच्चा चोरी या गोमांस ही नहीं, भीड़ तो नारे न लगाने और प्रेमी युगल की मदद करने तक पर कर चुकी है हत्या

सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों के कारण देशभर में मॉब लिंचिंग यानी उन्मादी भीड़ द्वारा लोगों को पीटने या हत्या...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 22, 2018, 02:40 AM IST

बच्चा चोरी या गोमांस ही नहीं, भीड़ तो नारे न लगाने और प्रेमी युगल की मदद करने तक पर कर चुकी है हत्या
सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों के कारण देशभर में मॉब लिंचिंग यानी उन्मादी भीड़ द्वारा लोगों को पीटने या हत्या करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। मोहम्मद अखलाक, डीएसपी अयूब पंडित, रवींद्र कुमार, जफ़र खान और पहलू खान। ये वो नाम हैं, जिन्हें ऐसी ही भीड़ ने मार डाला। ये फेहरिस्त काफी लंबी है। हालात ये हैं कि बच्चा चोरी के सिर्फ शक में पिछले डेढ़ महीने में 7 राज्यों में 20 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी गई। इनमें असम, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक शामिल हैं। इन घटनाओं की सबसे बड़ी वजह दरअसल सोशल मीडिया व ऐसी अन्य टेक्नोलॉजी है। सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज या छेड़छाड़ कर बनाए गए फेक वीडियो के जरिए अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। देखकर या सुनकर इन अफवाहों पर भरोसा बढ़ता जाता है। यही भीड़ के गुस्से को और भड़काने का काम करता है। ऐसे में भीड़ कानून अपने हाथ में ले लेती है। ये डिजिटल हिंसा छोटे शहरों और दूर-दराज गांवों में ज्यादा भयावह तरीके से काम कर रही है। पिछले दिनों त्रिपुरा में बच्चे उठाने के शक में तीन लोगों को भीड़ ने मार दिया। अगरतला में भी दो लोगों को मार दिया गया। कर्नाटक में एक इंजीनियर की जान ले ली गई । एेसा ही कुछ 6 जुलाई को हुआ था, जब असम में भीड़ तीन साधुओं को पीटने लगी। हालांकि सेना के जवानों ने इन्हें बचा लिया। तमिलनाडु में एक मैसेज ने हिंदी बोलने वाले लोगों को संगठित कर दिया।

व्हाट्सएप पर फेक न्यूज सबसे बड़ी वजह

देशभर
के अलग-अलग हिस्सों से सामाने आ रहे मॉब लिंचिंग के मामले बताते हैं कि व्हाट्सएप इसकी सबसे बड़ी वजह रहा है। इसलिए कि इसमें ग्रुप में संदेश भेजने वाला बेहद आसान फीचर है। भारत में यह इसलिए और भी खतरनाक साबित हो रहा है कि व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने वाले सबसे ज्यादा लोग यहीं हैं। दुनिया में 1 अरब लोग इसे इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 25 करोड़ लोग इनमें भारत के हैं। इसमें से अधिकांश की सुबह ही व्हाट्सएप के साथ होती है और दिन का अंत भी। ऐसे में सूचनाएं तेजी से फैल रही हैं। लेकिन अधिकांश लोग तो इन सूचनाओं की सच्चाई तक जानने की कोशिश नहीं करते और इसे सच मान लेते हैं। हाल ही में बच्चा चोरी की आशंका में भीड़ के हमलों में यही सब हुआ है। हालांकि अब व्हाट्सएप भारत में ग्रुप मैसेज पर नियंत्रण के लिए टेस्ट करने जा रहा है। इसके तहत लोग व्हाट्सएप पर कोई एक संदेश 5 से ज्यादा बार फॉर्वर्ड नहीं कर सकेंगे। टेस्ट सफल रहा तो इसे नियम के तौर पर लागू कर दिया जाएगा।

डेढ़ महीने में देशभर के अलग-अलग हिस्सों से 20 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें भीड़ ने पीट-पीटकर किसी की हत्या कर दी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट चिंतित है। उसने सरकार को गाइड लाइन तैयार करने की हिदायत दी है। मगर सोशल मीडिया पर नियंत्रण के बिना इन्हें रोकना आसान नहीं है। वैसे तथ्य बताते हैं कि भीड़ के भड़कने की कई वजहें रही हैं। जब सोशल मीडिया नहीं था, लिंचिंग तो तब भी होती थी।

कानून तोड़ता भीड़तंत्र

भीड़ के आक्रोशित होने के ऐसे बदलते दिखे ट्रेंड

इस साल फरवरी से लेकर 1 जुलाई तक देश के 17 राज्यों में 32 से ज्यादा लोगों को भीड़ ने बच्चा चोरी की आशंका में पीट-पीटकर मार डाला। सबसे ताजी घटना कर्नाटक के बीदर की है, यहां बच्चों को चॉकलेट बांट रहे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की भीड़ ने हत्या कर दी।

शुक्रवार की रात ही राजस्थान के अलवर में भीड़ ने गो-तस्करी की आशंका में एक शख्स की हत्या कर दी। 28 सितंबर 2015 को उत्तरप्रदेश के दादरी में मोहम्मद अखलाक को भीड़ ने घर में बीफ रखने के शक में मार डाला। इसके बाद से जुलाई 2017 तक लगभग 20 माह में गो-तस्करी व बीफ रखने की शंका में अलग-अलग मामलों में 14 लोगों की जान भीड़ ने ले ली।

एक रिपोर्ट के अनुसार अगर सिर्फ असम का ही आंकड़ा देखें तो 2001-2017 के दौरान 114 महिलाओं और 79 पुरुषों को डायन / ओझा करार देकर उनकी हत्या कर दी गई। इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया के व्हाट्सएप जैसे सूचना माध्यमों के आने से पहले भी देश में भीड़ द्वारा हत्याएं होती रही हैं।

ऐसे अपराधों का पूरा डेटा इसलिए नहीं

हा ल ही में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा में कहा कि मॉब लिंचिंग पर कोई सम्मिलित आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। ऐसा इसलिए कि 14 से ज्यादा राज्यों ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से इस तरह की घटनाओं का डेटा शेयर नहीं किया है। 2014 से 2017 तक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो महज 9 राज्यों का आंकड़ा उपलब्ध है। इन आंकड़ों के अनुसार इस समयावधि में सबसे ज्यादा 15 मामले असम में सामने आए। इनमें 15 लोगों की जान गई। हालांकि पुलिस ने 100 लोगों को हिरासत में भी लिया। 8 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर झारखंड, वहीं तीसरे स्थान पर 6 मामलों वाला मेघालय रहा। झारखंड में 11 लोग मारे गए, 55 गिरफ्तारियां हुईं। मेघालय में 8 लोगों को भीड़ ने मार दिया मगर एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई।

ऐसी घटनाओं से जुड़ा वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है

निपटने के लिए ये हैं कानून

इलस्ट्रेशन- गौतम चक्रवर्ती

भीड़ पिटाई या फिर हत्या कर दे, तो इंडियन पीनल कोड(आईपीसी) की इन धाराओं में केस दर्ज हो सकता है। इनमें सबसे पहले सामान्य कानून है। इसमें हत्या (302), सदोष मानव वध (304), हत्या का प्रयास (307), चोट या गंभीर चोट पहुंचाना शामिल है। दूसरा भीड़ से जुड़े कानून। इनमें कॉमन इन्टेंशन (34), गैरकानूनी जमाव (141, 149), आपराधिक साजिश (120बी), दंगा (147, 148) शामिल हैं। मॉब लिंचिंग के मामले में ये सभी कानून एक साथ लागू किए जा सकते हैं। इनमें दोषियों को उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है। मगर अब और भी कड़े कानून बनाने की मांग उठने लगी है।

अब तक क्या-क्या हुआ?

17 जुलाई | मंगलवार

सुप्रीम कोर्ट ने गोहत्या व गोमांस की तस्करी की शंका में भीड़ द्वारा लोगों को मार देने के खिलाफ आईं अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र व राज्यों को गाइड लाइन जारी की। कानून बनाने के लिए कहा। टिप्पणी की कि भीड़तंत्र को देश का कानून रौंदने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

18 जुलाई | बुधवार

मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने सरकार पर लिंचिंग को लेकर कुछ न कर पाने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि इस पर अलग से कानून बनाया जाए। मगर सरकार ने खारिज कर दिया। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ने की वजह आर्थिक असमानता है।

19 जुलाई | गुरुवार

सरकार ने व्हाट्सएप को एक और नोटिस भेज भड़काने वाले और फेक संदेशों को रोकने के लिए कदम उठानेे को कहा।

20 जुलाई | शुक्रवार

संसद में गृहमंत्री राजनाथ सिंह बोले कि सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग 1984 (सिख दंगों) में हुई थी।

ये मामले बताते हैं कोई एक वजह नहीं

21 फरवरी 2016: महाराष्ट्र के लातूर में एक विशेष वर्ग के पुलिसकर्मी को भीड़ ने सिर्फ इसलिए मार डाला, क्योंकि उसने ‘जय भवानी’ का नारा लगाने से इनकार कर दिया था।

1 अप्रैल 2017: राजस्थान के अलवर में पहलू खान नाम के 55 वर्षीय पशु व्यापारी की कथित गोरक्षकों की भीड़ ने गो-तस्करी के शक में पिटाई कर दी थी। अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

30 अप्रैल 2017: असम के नगांव में गाय चुराने के शक में भीड़ ने 2 लोगों की हत्या कर दी।

3 मई 2017: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में अंतरजातीय विवाह करने वाले युगल की मदद करने पर भीड़ ने गुलाम मोहम्मद नाम के व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

18 मई 2017: झारखंड में बच्चा चोरी के आरोप में भीड़ ने 7 लोगों की हत्या कर दी। ऐसा ही महाराष्ट्र के धुलिया में भी हाल ही में हुआ है।

23 मई 2017: झारखंड में मुन्ना अंसारी नामक शख्स अपने रिश्तेदार के घर आया था। भीड़ ने उसे चोर समझकर मार डाला।

7 जून 2017: झारखंड के धनबाद में इफ्तार पार्टी के लिए बीफ ले जाने के आरोप में एक व्यक्ति की हत्या।

17 जून 2017: राजस्थान के प्रतापगढ़ में खुले में शौच कर रही महिला का फोटो खींचने से रोकने पर जफर नाम के एक व्यक्ति की भीड़ ने पीटकर हत्या कर दी।

24 जून 2017: हरियाणा के बल्लभगढ़ में ट्रेन में सीट को लेकर हुए विवाद में भीड़ ने जुनैद खान नामक युवक को मार डाला।

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