• Hindi News
  • Chhatisgarh
  • Kendri
  • नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को?
विज्ञापन

नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को? / नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को?

Bhaskar News Network

Jul 14, 2018, 02:50 AM IST

Kendri News - नोएडा से जुड़े इस मिथक का इतिहास पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के समय से शुरू होता है। जब 1988 में नोएडा दौरे से...

नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को?
  • comment
नोएडा से जुड़े इस मिथक का इतिहास पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के समय से शुरू होता है। जब 1988 में नोएडा दौरे से लौटने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने वीर बहादुर सिंह का इस्तीफा मांग लिया। जिसके बाद 1989 में नारायण दत्त तिवारी और 1999 में कल्याण सिंह की भी कुर्सी नोएडा से लौटने के बाद चली गई। 1995 में सपा संरक्षक मुलायम सिंह को भी नोएडा आने के कुछ दिन बाद ही अपनी सरकार गंवानी पड़ गई थी।


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा से जुड़ा एक मिथक है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा आएगा, उसे या तो अपनी गद्दी छोड़नी पड़ेगी या उसके साथ कुछ अपशकुन होगा। हालांकि इस मिथक के प्रचलित होने के पीछे भरपूर राजनीतिक घटनाक्रम रहे हैं। शायद यही वजह रही कि यूपी के सभी सीएम नोएडा आने से परहेज करते रहे, लेकिन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सालों पुराने इस मिथक की चुनौती को सिर्फ स्वीकार ही नहीं किया, बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी चार बार नोएडा आ चुके हैं। हालांकि योगी आदित्यनाथ के नोएडा दौरे के उपरांत न ही उनकी कुर्सी गई और न ही उनके साथ कुछ अपशकुन हुआ, लेकिन उनके सीएम बनने के बाद बीजेपी का उपचुनावों में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार 23 दिसंबर 2017 को नोएडा के बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन पर होने वाले मेजेंटा लाइन के उद्घाटन समारोह की तैयारियों का जायजा लेने आए थे। फिर दूसरी बार 25 दिसंबर 2017 को प्रधानमंत्री के साथ मेट्रो उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए। तब योगी ने यह कहा था कि वे बार-बार नोएडा आएंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योगी की तारीफ करते हुए कहा था कि वे आधुनिक सोच रखते हैं।

तीसरी बार यूपी के मुखिया पिछले महीने 17 जून को नोएडा में यूपी सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस का निरीक्षण करने आए। फिर चौथी बार 8 जुलाई को नोएडा में मोबाइल यूनिट जिसका उद्घाटन पीएम मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन को करना था, की तैयारियों का जायजा लेने आए।

योगी के लिए सब ठीक नहीं चल रहा!

हालांकि, यूपी के मुखिया के नोएडा दौरों को प्रदेश में अन्य जगहों पर होने वाली राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी, लेकिन यदि योगी के पहले नोएडा दौरे के बाद प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर ध्यान दिया जाए तो यह पाएंगे कि प्रदेश के मुखिया के लिए सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। आपको बता दें कि 23 दिसंबर 2017 के बाद प्रदेश में होने वाले उपचुनावों में सत्ताधारी भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। भाजपा तीन लोकसभा और एक विधानसभा उपचुनाव हार चुकी है। यही नहीं, योगी के लोकसभा से इस्तीफे के बाद उनके गढ़ गोरखपुर में होने वाले उपचुनाव में भाजपा हार गई। प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर सीट भी भाजपा नहीं बचा पाई। उसके बाद कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा में योगी सरकार को मुंह की खानी पड़ी। इसके बाद योगी सरकार की मुखालफत इस कदर बढ़ गई कि उनकी सरकार की सहयोगी भी कहने लगे कि प्रदेश में किसी ओबीसी को सीएम बनाया जाए।

नोएडा के साथ क्यों जुड़ा यह मिथक ?

नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को?
  • comment
X
नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को?
नोएडा से जुड़ा मिथक तोड़ना महंगा तो नहीं पड़ रहा योगी को?
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन

किस पार्टी को मिलेंगी कितनी सीटें? अंदाज़ा लगाएँ और इनाम जीतें

  • पार्टी
  • 2019
  • 2014
336
60
147
  • Total
  • 0/543
  • 543
कॉन्टेस्ट में पार्टिसिपेट करने के लिए अपनी डिटेल्स भरें

पार्टिसिपेट करने के लिए धन्यवाद

Total count should be

543
विज्ञापन