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आपकी सितारा हैसियत का एक कारण साहस होता है

याद है 2012 में रिलीज हुई 2 घंटे 14 मिनट की बॉलीवुड फिल्म ‘तलाश’ जिसमें पूरी फिल्म में हीरो आमिर खान अपनी और प|ी (रानी...

Dainik Bhaskar

Jul 27, 2018, 02:51 AM IST
आपकी सितारा हैसियत का एक कारण साहस होता है
याद है 2012 में रिलीज हुई 2 घंटे 14 मिनट की बॉलीवुड फिल्म ‘तलाश’ जिसमें पूरी फिल्म में हीरो आमिर खान अपनी और प|ी (रानी मुखर्जी) की आंखों के सामने अपने बेटे को डूबने से न बचा पाने के लिए खुद को कोसते हैं। एक विशेष दृश्य में आमिर और रानी रेत पर लेटे हैं और आराम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका बेटा और उसका दोस्त झील के आसपास भटकने की अनुमति मांगते हैं और उनके लिए कोई खतरा होने की बात पर विचार किए बिना रानी उन्हें अनुमति दे देती है। दोनों बच्चे संयोग से एक मोटरबोट में बैठकर उसे चालू कर देते हैं। यह थोड़ी देर चलती है और झील के मध्य में उलट जाती है। पानी पर जोर से थपाक की आवाज से दोनों चौंक जाते हैं और दौड़कर 50 मीटर का फासला जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी तय करते हैं और जलाशय में कूदकर उन्हें बचाने की कोशिश करते हैं। वे अपने बेटे के दोस्त को तो जैसे-तैसे बचा लेते हैं पर अपने ही बेटे करण को नहीं बचा पाते। आमिर ने उस फिल्म में इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है, जिसने पुलिस इतिहास के सबसे कठिन मामलों को सुलझाने का साहस दिखाया है पर उन्हें लगता है कि मानसिक स्तर पर क्षणिक असावधानी की कीमत उन्हें बेटे करण की जान देकर चुकानी पड़ी। इंस्पेक्टर की भूमिका में उन्हें जो सितारा हैसियत मिली हुई थी, उसके बावजूद वे खुद को पराजित महसूस करते हैं। यह ‘रील लाइफ स्टोरी’ थी।

लेकिन, लगभग इस पटकथा जैसी ही ‘रीयल लाइफ’ स्टोरी 24 जुलाई 2018 को घटी। फर्क सिर्फ यह था कि यहां नायक नहीं, नायिका थी और वह भी 9वीं कक्षा की छात्रा। सारी विपरीत स्थितियों के बावजूद उसने प्रजेंस ऑफ माइंड (तत्परता) और साहस दिखाते हुए एक किसान के तीन वर्षीय बेटे की जान बचाई। इस मंगलवार को कोलकाता से 220 किमी दूर नारायणगढ़ म्युनिसिपल स्कूल में अंग्रेजी का पहला पीरियड शुरू ही हुआ था। गरीब किसान की बेटी रुम्पा प्रामाणिक कक्षा की खिड़की के पास बैठी नोट्स लेने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, आंखों के किनारे खिड़की से बाहर भटक रहे थे। उसने एक बच्चे को तालाब के पास आते देखा। उसके प्रजेंस ऑफ माइंड ने उससे यह देखने को कहा कि क्या बच्चे के साथ कोई है। लेकिन, इसके पहले की वह चेहरा पूरा घुमाकर आसपास देखें, उसकी आंखों ने छपाक के साथ पानी को उछलते देखा और अगले ही पल बच्चा तालाब में था।

रुम्पा ने एक पल भी नहीं सोचा और बिना इजाजत कक्षा से बाहर चली गई। वह ऐसे दौड़ी जैसे खुद की ज़िंदगी बचाने के लिए दौड़ रही हो। इसके पहले कि हक्का-बक्का रह गए शिक्षक बाहर आकर देखते कि समस्या क्या है, रुम्पा तालाब तक की 50 मीटर की दूरी तय कर चुकी थी। इसके बावजूद कि उसका स्कूल यूनिफॉर्म आदिवासी पहनावे की तरह कसी हुई साड़ी थी। जब वह तालाब के किनारे पहुंची रुम्पा ने दो छोटे-छोटे हाथ पानी की सतह पर छटपटाते देखे। उसने गोता लगाया, बच्चे की बांह पकड़ी और धीरे-धीरे तैरकर किनारे आ गई। बच्चा बेहोश था। तब तक शिक्षक और कुछ स्थानीय लोग तालाब के किनारे पहुंच चुके थे। उन्होंने कार्डियो-पल्मोनरी रिससीटेशन (सीपीआर) करके बच्चे को छाती के बल लेटा दिया। तब रुम्पा ने देखा कि यह छोटा बच्चा तो पड़ोसी किसान का एकलौता बेटा राहुल है। कुछ मिनटों के बाद उसने अपने हाथ हिलाने शुरू किए। राहुल को तेजी से डॉक्टर के पास ले जाया गया और फिर राज्य शासन के हेल्थ सेंटर पर ले जाया गया, जहां उसकी स्थिति नियंत्रण में आई। एक अन्य घटना में केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस बुधवार को अपने ट्वीट में आरपीएफ कॉन्स्टेबल राम कमल यादव की तारीफ की, जिन्होंने एक महिला को मुंबई के कांजुरमार्ग उपनगरीय रेलवे स्टेशन पर फिसलकर ट्रेन के नीचे जाने से बचाया। रुम्पा और यादव, दोनों को कई लोग सिर्फ उनके प्रजेंस ऑफ माइंड के लिए जानते हैं।

फंडा यह है कि तत्काल मौके पर फैसला करना ही साहस है और निश्चित ही यह सितारा हैसियत दिलाने का कारण होता है।

एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

raghu@dbcorp.in

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