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तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे द्रमुक नेता करुणानिधि का निधन

मृत्यु : 7 अगस्त 2018 एजेंसी | चेन्नई द्रविड़ मुनेत्र कणगम (द्रमुक) नेता और तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे...

Dainik Bhaskar

Aug 08, 2018, 02:55 AM IST
तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे द्रमुक नेता करुणानिधि का निधन

मृत्यु : 7 अगस्त 2018

एजेंसी | चेन्नई

द्रविड़ मुनेत्र कणगम (द्रमुक) नेता और तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे मुथुवेल करुणानिधि का मंगलवार शाम को निधन हो गया। वे 94 साल के थे। लंबे समय से बीमार करुणानिधि ने चेन्नई के कावेरी अस्पताल में शाम 6:10 बजे अंतिम सांस ली। अस्पताल के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉ अरविंदन सेल्वराज ने बयान जारी कर करुणानिधि के निधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों शेष|पेज 8





और नर्सों की टीम के अथक प्रयासों के बावजूद उन्हें बचा नहीं सके। करुणानिधि को उनके गोपालपुरम निवास से 28 जुलाई को लो बीपी के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे आईसीयू में रहे लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को चेन्नई में किया जाएगा। हालांकि समाधि स्थल के लिए मरीना बीच में जगह को लेकर विवाद हाईकोर्ट में पहुंच गया। करुणानिधि के समर्थकों और द्रमुक कार्यकर्ताओं ने मरीना बीच में समाधि स्थल के लिए जगह की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।



करुणानिधि के निधन पर केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इसके तहत केंद्रीय और राज्यों की सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। तमिलनाडु में राज्य सरकार ने सात दिन के शोक की घोषणा की है। बुधवार को सभी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छुट्‌टी कर दी गई है। द्रविड़ नेता के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल सहित अन्य नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। मोदी और राहुल गांधी बुधवार उनके अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार शाम को ही चेन्नई रवाना हो गईं।

करुणानिधि के परिवार में दो प|ी और छह बच्चे हैं। करुणानिधि ने बेटे द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन को पहले ही अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बना दिया था। वहीं बेटी कनीमोई राज्यसभा की सदस्य हैं। उनकी पहली प|ी का निधन हो चुका है।



14 साल की उम्र में हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़े :

करुणानिधि 14 साल की उम्र में 1939 में अपने गृहनगर तिरुवरूर में हिंदी विरोधी आंदोलन से जुड़ गए थे। वे द्रविड़ आंदोलन के मस्कट बन गए थे और उसके समाजवादी और बुद्धिवादी आदर्शों को बढ़ावा देने वाली ऐतिहासिक और सामाजिक (सुधारवादी) कहानियां लिखने के लिए मशहूर थे। उन्होंने तमिल सिनेमा में द्रविड़ आंदोलन की विचारधाराओं का समर्थन किया और इसने तमिल फिल्म जगत के दो प्रमुख अभिनेताओं शिवाजी गणेशन और एसएस राजेंद्रन का परिचय कराया। ब्राह्मणवाद के आलोचक थे। पनाम और थंगारथनम जैसी फिल्मों में विधवा पुनर्विवाह, अस्पृश्यता का उन्मूलन, आत्मसम्मान विवाह, जमींदारी का उन्मूलन और धार्मिक पाखंड का उन्मूलन जैसे विषय उठाए।

समाधि स्थल को लेकर हाईकोर्ट में रात 1:15 बजे तक हुई सुनवाई

अस्पताल के बाहर समर्थकों की भीड़।

मरीना बीच में समाधि स्थल के लिए जगह देने से राज्य सरकार ने इनकार कर दिया। द्रमुक के एक नेता ने मरीना बीच में समाधि स्थल की मांग को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में रात में ही याचिका दायर की। रात में सुनवाई भी हुई, पर रात करीब 1:15 बजे सुनवाई बुधवार सुबह 8 बजे तक के लिए स्थागित कर दी गई।

फिल्मों से राजनीति में आए

उनका जन्म ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी के नागिपट्‌टनम के तिरुक्कुवलई में 3 जून 1924 को हुआ था। करुणानिधि ने अपने करिअर की शुरुअात तमिल फिल्मों में स्क्रिप्ट राइटर के रूप में की थी। बाद में वे राजनीति में आए और दलित हक की आवाज उठाई।

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