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जब देश में रोजगार ही नहीं है तो आरक्षण कैसे दें : गडकरी

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि जब रोजगार ही नहीं है तो आरक्षण कैसे दें। आरक्षण रोजगार देने...

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2018, 02:55 AM IST
केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि जब रोजगार ही नहीं है तो आरक्षण कैसे दें। आरक्षण रोजगार देने की गारंटी नहीं है क्योंकि नौकरियां कम हो रही हैं। वे औरंगाबाद में आरक्षण के लिए मराठों के वर्तमान आंदोलन तथा अन्य समुदायों द्वारा इस तरह की मांग से जुड़े सवालों का जवाब दे रहे थे।

मराठा आंदोलन की मांग पर पूछे गए एक सवाल पर नितिन गडकरी ने अपने जवाब से विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने कहा, मान लीजिए कि आरक्षण दे दिया जाता है। लेकिन नौकरियां नहीं हैं। क्योंकि बैंक में आईटी के कारण नौकरियों में भारी कमी देखी जा रही है। आरक्षण रोजगार देने की गारंटी नहीं है क्योंकि नौकरियां कम हो रही हैं। सरकारी भर्ती रुकी हुईं हैं ऐसे में नौकरियां हैं कहां जो दी जाएं।

उन्होंने कहा, एक सोच कहती है कि गरीब गरीब होता है, उसकी कोई जाति, पंथ या भाषा नहीं होती। उसका कोई भी धर्म हो, मुस्लिम, हिन्दू या मराठा, सभी समुदायों में एक धड़ा है जिसके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं, खाने के लिए भोजन नहीं है। एक सोच यह भी कहती है कि हमें हर समुदाय के अति गरीब धड़े पर न केवल विचार करना चाहिए बल्कि मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश भी करनी चाहिए।

बैंक में आईटी के कारण नौकरियों में भारी कमी है, सरकारी भर्ती रुकी है

आरक्षण पर बाम्बे हाईकोर्ट में 7 को सुनवाई

बाबे हाईकोर्ट मराठा आरक्षण के मुद्दे पर याचिकाओं की सुनवाई 14 अगस्त के बजाय 7 अगस्त को करने पर राजी हो गया। 2014 और 2015 में इस संबंध में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। उससे पहले तत्कालीन कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार ने मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षा में 16 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दी थी।

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