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ट्रेड वार ः मंदी की तरफ तो नहीं जा रही वैश्विक अर्थव्यवस्था?

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 06, 2018, 02:55 AM IST

नील इरविन, अर्थशास्त्री

2008 की आर्थिक मंदी को दुनिया भूली नहीं है, अमेरिकी बैंकों के दीवालिया होने के कारण ऐसा हुआ था। देखते ही देखते दुनियाभर में इसका असर हुआ था। 2018 में उस आर्थिक मंदी के 10 वर्ष पूरे हुए हैं। उसके ठीक एक वर्ष बाद यानी 2009 में अमेरिका ने आर्थिक विस्तार (इकोनॉमिक एक्सपान्शन) कार्यक्रम शुरू किया था। उसने पिछले माह 9 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह एक साल और चलता है तो सबसे लंबे आर्थिक विस्तार का रिकॉर्ड बनेगा। परन्तु क्या इसे अमेरिका और चीन से खतरा है?

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले दोनों देश ट्रेड वार का खतरनाक खेल रच रहे हैं। इनके कारण खरबों डॉलर का वैश्विक कारोबार प्रभावित होगा। बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि समय या वर्ष को लेकर कोई यह दावा नहीं कर सकता कि अगली आर्थिक मंदी कब आएगी। हम यह जरूर कह सकते हैं कि ट्रेड वार के कारण आर्थिक विस्तार के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है। अगर ऐसा हुआ तो 2020 या 2022 के अंत तक मुश्किल स्थितियां आ सकती हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी अच्छे दौर से गुजर रही है, जीडीपी भी लगातार बढ़ रही है। 2014 के बाद पहली बार इसमें बहुत तेजी देखी गई है। जब इस तेजी के बारे में किसी से बात की जाती है तो वह आर्थिक जोखिम का उल्लेख करता है। इस आर्थिक विस्तार के लिए जो भी खतरा उत्पन्न होगा, वह दूसरे खतरे को और तीव्रात से बढ़ा देगा। ऐसी स्थिति में एक भी कारण नजरअंदाज करना नुकसानदायक होगा। इसका मतलब यह है कि अगर अगले पांच साल में मंदी आती है, तो उसके कई कारण होंगे।

ऐसा नहीं है कि विशेषज्ञों को इसकी फिक्र नहीं है। वे इसे रोकने के लिए तरह-तरह के उपाय सुझा रहे हैं। एवरकोर आईएसआई रिसर्च में ग्लोबल पॉलिसी के प्रमुख कृष्णा गुहा मानते हैं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत दुनिया की मशीनरी पर असर डालती है। यह दुरुस्त है तो समझो सब दुरुस्त। अभी यह अपने पूर्ण रोजगार वाले दौर में है, महंगाई दर लगभग 2 फीसदी के करीब है। संभव है कि केंद्रीय बैंक महंगाई पर और नियंत्रण करने के लिए ब्याज दरों में थोड़ी बढ़ोतरी कर दे। ब्याज दरें बढ़ने एवं केंद्रीय टैक्स नीति के कारण अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। दोनों ही फैसलों से अनिश्चितता बढ़ेगी। केंद्रीय बैंक को चाहिए कि वह ऐसी नीतियां बनाए, जिससे 2019 और 2020 में संभला जा सके। ये दो साल संभल गए तो 2022 तक का खतरा टल जाएगा। पिछली दो मंदी (2001 और 2007-08) शेयर बाजार और हाउसिंग मार्केट में ज्यादा उथल-पुथल के कारण आई थी। ऐसी स्थिति में अमेरिका समेत दुनिया के सभी शेयर बाजारों की निगरानी करने की जरूरत है। © The New York Times

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