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महंगाई और विकास दर में संतुलन का छोटा कदम

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को दो महीने के भीतर लगातार दूसरी बार रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करके उसे 6.5 करने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 03, 2018, 02:55 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को दो महीने के भीतर लगातार दूसरी बार रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करके उसे 6.5 करने का फैसला उम्मीदों के मुताबिक ही किया है। घरेलू मोर्चे पर उर्ध्वमुखी महंगाई, मानसून की लुका छिपी के बीच अच्छे खरीफ की घटती उम्मीदें, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के उछलते दाम और बढ़ते व्यापारिक युद्ध के बीच केंद्रीय बैंक के पास इसके अलावा कोई उपाय भी नहीं था। हालांकि मुद्रा नीति समिति ने ब्याज दरें बढ़ाने का निर्णय जून के महीने की तरह सर्वसम्मति से नहीं लिया है। कम से कम एक सदस्य ने इसके विरुद्ध मत दिया। ऐसे भी विशेषज्ञ थे, जिनका कहना था कि भारत को ब्याज लिए जाने पर होने वाले व्यय को बढ़ाने की बजाय उसे घटाना चाहिए, क्योंकि देश के कई राज्यों में वित्तीय संकट है और उसका मुकाबला करने के लिए कर्ज लेना ही पड़ेगा। रिजर्व बैंक ने महंगाई के मौजूदा आकलन में केंद्र सरकार द्वारा खरीफ की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई 150 प्रतिशत वृद्धि को भी रखा है। इससे भी मंहगाई पर असर पड़ेगा। हालांकि, कुछ वस्तुओं पर जीएसटी घटाए जाने का सकारात्मक प्रभाव भी पड़ना है। बैंक चाहता है कि महंगाई की दर चार प्रतिशत पर कायम रहे लेकिन, जून में वह पांच प्रतिशत तक पहुंच गई थी। यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) है, जबकि मूल महंगाई की दर तो 6.4 के पास बताई जाती है। दूसरी ओर थोक मूल्य सूचकांक (डब्लूपीआई) 5.8 प्रतिशत है। उधर जीडीपी की दर 2018-19 में 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक ने महंगाई और विकास दर के बीच संतुलन कायम करने के लिए ही यह छोटा कदम उठाया है। कॉर्पोरेट जगत इसे अर्थव्यवस्था में वृद्धि और ऋण की बढ़ती मांग के रूप में देखता है लेकिन, एसोचेम ने बैंक को चेताया है कि उसे यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि यह वृद्धि हर हाल में जारी ही रहेगी। एसोचेम ने निजी क्षेत्र को भी आगाह किया है कि उन्हें संसाधनों के लिए बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। रिजर्व बैंक ने अपने नीतिगत रवैए में किसी रुझान का प्रदर्शन न करते हुए उसे तटस्थ रखा है। यानी वह दरें बढ़ाते जाने का संकल्प लेकर नहीं बैठा है। अगर आंकड़े बढ़ाए जाने के पक्ष में आएंगे तो वैसा हो सकता है वरना अब अक्तूबर में दरें नहीं बढ़ने वाली हैं। लगता है कि रिजर्व बैंक अब अंतरराष्ट्रीय स्थितियों के साथ मानसून की भी धैर्य के साथ निगरानी करने की रणनीति अपनाएगा।

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