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क्या है ये रानी की वाव?

क्या है ये रानी की वाव? केंद्रीय बैंक के अनुसार हल्के बैंगनी रंग के इस नए नोट में पहले की ही तरह महात्मा गांधी की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 23, 2018, 03:00 AM IST

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    क्या है ये रानी की वाव?

    केंद्रीय बैंक के अनुसार हल्के बैंगनी रंग के इस नए नोट में पहले की ही तरह महात्मा गांधी की तस्वीर है, अशोक स्तंभ, प्रॉमिस क्लॉज और अन्य फीचर्स के साथ मौजूदा गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे, लेकिन नोट के पिछले हिस्से पर एक तस्वीर होगी जिस पर लिखा है "रानी की वाव।' यह गुजरात के पाटन ज़िले में स्थित एक प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) है जिसे यूनेस्को ने चार साल पहले 2014 में विश्व विरासत में शामिल किया था। यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार रानी की वाव सरस्वती नदी से जुड़ी है। इसे ग्यारहवीं सदी के एक राजा की याद में बनवाया गया था। नोट पर रानी की वाव लिखने के बाद से यह जगह काफी चर्चित हो रही है। दरअसल, रानी की वाव भूमिगत जल संसाधन और जल संग्रह प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जो भारतीय महाद्वीप में बहुत लोकप्रिय रही है। इस तरह के सीढ़ीदार कुएं का ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से वहां निर्माण किया जा रहा है। सात मंज़िला इस वाव में मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली का सुं‍दर उपयोग किया गया है, जो जल संग्रह की तकनीक, बारीकियों और अनुपातों की अत्यंत सुंदर कला क्षमता की जटिलता को दर्शाता है। जल की पवित्रता और इसके महत्व को समझाने के लिए इसे औंधे मंदिर के रूप में डिजाइन किया गया था। वाव की दीवारों और स्तंभों पर सैकड़ों नक्काशियां की गई हैं। सात तलों में विभाजित इस सीढ़ीदार कुएं में नक्काशी की गई 500 से अधिक बड़ी मूर्तियां हैं और एक हज़ार से अधिक छोटी मूर्तियां हैं। इसका चौथा तल सबसे गहरा है जो एक 9.5 मीटर से 9.4 मीटर के आयताकार टैंक तक जाता है।

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