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बिलासपुर... झीरम कांड: सीएम सहित अन्य को गवाही के लिए बुलाने अर्जी पर फैसला सुरक्षित

बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा पर हुए नक्सली हमले के मामले में मुख्यमंत्री, तत्कालीन...

Dainik Bhaskar

Aug 05, 2018, 03:01 AM IST
बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा पर हुए नक्सली हमले के मामले में मुख्यमंत्री, तत्कालीन गृहमंत्री समेत अन्य को गवाही के लिए बुलाने की मांग करते हुए कांग्रेस की तरफ से प्रस्तुत आवेदन पर न्यायिक आयोग ने शनिवार को फैसला सुरक्षित रखा है। पिछली सुनवाई के दौरान आवेदन के समर्थन में कांग्रेस की तरफ से जस्टिस कृष्ण आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। जस्टिस कृष्ण आयोग ने मुंबई दंगे की जांच के दौरान महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री, तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री को तलब किया था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर बस्तर की झीरम घाटी में 25 मई 2013 को नक्सलियों ने हमला किया था। घटना में पीसीसी के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा समेत 29 लोगों की जान गई थी।



राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए जस्टिस प्रशांत मिश्रा की एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। स्थापना के बाद आयोग में सुनवाई चल रही है। आयोग में अब तक 41 स्वतंत्र व्यक्तियों और 21 पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों का प्रतिपरीक्षण हो चुका है। कांग्रेस की तरफ से एडवोकेट सुदीप श्रीवास्तव ने 25 जनवरी 2018 को आयोग में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, तत्कालीन गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री ननकीराम कंवर को शपथ पत्र के साथ गवाह के रूप में प्रतिपरीक्षण के लिए बुलाने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके समर्थन में लिब्रहान व नानावटी आयोग की सुनवाई का हवाला दिया गया था, जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री, तत्कालीन गृहमंत्री आदि बयान के लिए बुलाए गए थे। आयोग ने दोनों आयोगों के दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा था। पिछली सुनवाई के दौरान कांग्रेस की तरफ से जस्टिस कृष्ण आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया गया था कि आयोग ने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री को बयान के लिए बुलाया था। कांग्रेस के आवेदन पर शनिवार को दोनों पक्षों का तर्क सुनने के बाद आयोग ने फैसला सुरक्षित रखा है। राज्य शासन की तरफ से एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।

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