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इसलिए है जीडीपी में आगे बढ़कर भी समस्याअों का अंबार

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच देवेन्द्रराज सुथार, 21 एमए, बागरा, जालौर, राजस्थान devendrasuthar196@gmail.com...

Bhaskar News Network| Last Modified - Aug 07, 2018, 03:01 AM IST

इसलिए है जीडीपी में आगे बढ़कर भी समस्याअों का अंबार
इसलिए है जीडीपी में आगे बढ़कर भी समस्याअों का अंबार
करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच

देवेन्द्रराज सुथार, 21

एमए, बागरा, जालौर, राजस्थान

devendrasuthar196@gmail.com

भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बाद भी अपनी समस्त आवश्यकताओं को पूरा करने और जनता के कल्याण के लिए देशव्यापी कदम उठा पाने में असफल रही है, यह एक कटु सत्य है। जब तक भारत की सकल जीडीपी नहीं बढ़ेगी तब तक देश का विकास होना संभव नहीं है। सिर्फ़ जीडीपी नहीं अपितु एक बुनियादी चीज आयात-निर्यात अनुपात भी है।

भारत आज तक कभी भी निर्यात को आयात से ज़्यादा नहीं कर पाया है, जिसकी वज़ह से ये हमेशा नकारात्मक रहा है, ये एक बुनियादी कारण है कि देश में जो चीज़ 10 रुपए मूल्य की है वह देश में ही कई हाथों में घूमकर 50 रुपए की हो तो जाती है लेकिन, इससे देश के सकल मुद्रा भंडार में इज़ाफ़ा नहीं हो पाता। यदि यही चीज़ 10 रुपए में बनकर विदेश से 50 रुपए देश में लाए तो सकल मुद्रा में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकारी योजनाओं में लीकेज कम करने को लेकर सरकार प्रयासरत है लेकिन, समस्त सरकारी टेंडर की जांच के लिए एक फ्री एजेंसी को बनाए जाने की आवश्यकता है, जो कैग के अधीन हो। जिससे सरकार के कामों में हो रहे भ्रष्टाचार को रोका जाए और पैसा बचाया जाए। चीन में निर्यात करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन, भारत में विदेश में सामान बेचना बहुत बड़ी बात है। सरकार को इसके लिए व्यापारियों और निर्माताओं को जागरूक करना चाहिए और निर्यात के लिए एक एकीकृत सुविधा सेंटर बनाने की पहल करनी चाहिए, जिससे अपना तैयार सामान विदेशों में बेचने की शुरुआत हो सके। इससे भारत में भी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बढ़ेगा और लागत के अनुरूप मुनाफ़ा अधिक होने से निश्चित रूप से देश में संपन्नता बढ़ेगी।

देश में पैसा कुछ हाथों में ही घूम रहा है। जब तक सरकार इस मुद्रा को विकेंद्रीकृत करके आम नागरिकों तक नहीं पहुंचा पाएगी तब तक सामाजिक असमानता यूं ही बनी रहेगी। सोचने की ज़रूरत है की हम जीडीपी में आगे बढ़ रहे है फिर भी देश में समस्याओं का अंबार है और वहीं ग्लोबल हैप्पीनेस इंडेक्स में 122वें स्थान पर पहुंच गए है। विचारणीय है न हम अमीर हैं और न ही खुश तो किस दिशा में आगे बढ़ रहा है देश।

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