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हिंसक भीड़ पर केंद्र सरकार के सख्त कदम के मायने

Kendri News - यह अच्छी बात है कि अलवर में गोपालक किसान रकबर खान की भीड़ द्वारा पिटाई और उसे बचाने में पुलिस की लापरवाही पर चौतरफा...

Dainik Bhaskar

Jul 25, 2018, 03:05 AM IST
हिंसक भीड़ पर केंद्र सरकार के सख्त कदम के मायने
यह अच्छी बात है कि अलवर में गोपालक किसान रकबर खान की भीड़ द्वारा पिटाई और उसे बचाने में पुलिस की लापरवाही पर चौतरफा प्रतिरोध के बाद केंद्र सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा के नेतृत्व में समिति का गठन कर दिया है। उसी के साथ राजस्थान पुलिस का लापरवाही स्वीकार करना भी सही दिशा में उठाया गया कदम है। किसी भी बुराई के अंत की शुरुआत उसे स्वीकारने से होती है और उसे मिटाने के उपाय उसके बाद निकाले जाते हैं। उम्मीद है कि दोनों सरकारों की भंगिमा के पीछे न तो कोई राजनीतिक दिखावा है और न ही लीपापोती का इरादा। हालांकि, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार कहते हैं कि भीड़ द्वारा हत्याओं का सिलसिला तब बंद होगा, जब गोमांस सेवन बंद हो जाएगा। देश के भीतर पनप रही यही सोच भारत में अल्पसंख्यकों और कमजोर लोगों पर अत्याचार का कारण है। इन स्थितियों को अगर दूर करना है और भारत को एक सहिष्णु लोकतंत्र बनाए रखना है तो उसकी प्रमुख संस्थाओं को संविधान की भावना से काम करने देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में भीड़ द्वारा की जा रही हत्या से बेचैन होकर केंद्र और राज्य सरकारों को जो आदेश दिया है, उसका पूरा असर केंद्र पर दिख नहीं रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा है कि वह भीड़ द्वारा की जा रही हत्या के विरुद्ध एक विशेष केंद्रीय कानून लाए और देश में कानून का राज कायम रहे। इस बारे में राज्य और केंद्र दिशा-निर्देश तय करके काम करें। केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पालन यह कहकर नहीं कर रही है कि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है और उस पर कानून उसे ही बनाना चाहिए। इसके बावजूद गृह सचिव राजीव गौबा के नेतृत्व में गठित समिति में न्याय, कानून और सामाजिक न्याय मंत्रालय और सबलीकरण मंत्रालय के सचिव शामिल हैं। समिति चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और उस पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में कई मंत्रियों की समिति विचार करेगी। समिति के इस स्वरूप को देखकर यह अनुमान भी लगाया जा सकता है कि सरकार दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन पर विचार कर सकती है। अच्छा हो कि सरकार और सारे राजनीतिक दल इस मामले पर चुनावी नजरिये से काम करने के बजाय लोकतंत्र और मानवता के लिहाज से काम करें। इसी में देश का भला है।

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