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शाह बोले- असम समझौता राजीव का था, अमल की हिम्मत हमने ही दिखाई

संसद में बयान अधूरा रहा तो शाह ने कॉन्फ्रेंस की राजनाथ बोले- रोहिंग्या वापस भेजे जाएंगे लोकसभा में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 01, 2018, 03:10 AM IST

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    संसद में बयान अधूरा रहा तो शाह ने कॉन्फ्रेंस की

    राजनाथ बोले- रोहिंग्या वापस भेजे जाएंगे

    लोकसभा में तृणमूल सांसद सौगत बोस ने कहा- विदेश मंत्रालय बांग्लादेश में रोहिंग्या के लिए ‘ऑपरेशन इंसानियत’ चला रहा है। भारत में 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी हैं। क्या हम सिर्फ बांग्लादेश में रोहिंग्या के लिए ही इंसानियत दिखाएंगे? इस पर राजनाथ ने कहा- राज्यों को रोहिंग्या की गिनती करने को कहा है। डेटा मिलते ही इन्हें म्यांमार डिपोर्ट करने के लिए बात करेंगे।

    जुबानी जंग:भाजपा विधायक बोले- जो अवैध बांग्लादेशी न जाएं, उन्हें गोली मारो

     अगर अवैध बांग्लादेशी प्रवासी, रोहिंग्या शराफत से अपने देश न लौटें, तो उन्हें गोली मार देनी चाहिए, तभी भारतीय सुरक्षित रह सकेंगे। -टी राजा सिंह, भाजपा विधायक

    जो इस देश के नागरिक हैं, वो इस देश मेें रहेंगे। जो अवैध रूप से यहां रह रहे हैं और घुसपैठिए हैं, उन्हें देश छोड़कर जाना होगा। -अश्वनी चौबे, भाजपा नेता

    विपक्ष का आरोप- सरकार तुष्टिकरण कर रही, उसके निशाने पर अल्पसंख्यक

    14 अगस्त 1985 को राजीव गांधी ने असम अकॉर्ड साइन किया था। 15 अगस्त के लाल किले के भाषण में उन्होंने इसकी घोषणा की। असम अकॉर्ड की आत्मा ही एनआरसी था। -अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष का राज्यसभा में बयान

    एक्सपर्ट बोले- एनआरसी में नाम न हो, पर बांग्लादेश भेजना मुश्किल

    विशेषज्ञों का कहना है कि असम में एनआरसी के ड्राफ्ट में 40 लाख से ज्यादा लोगों के नाम भले छूट गए हों और दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची आने पर अवैध रूप से रह रहे लोगों की संख्या 20 लाख बचे, पर इन्हें बांग्लादेश डिपोर्ट करना लगभग नामुमकिन होगा। इसका बड़ा उदाहरण बांग्लादेश में रह रहे 5 लाख पाकिस्तानी हैं। वे गैर बांग्लाभाषी हैं, जो 1971 में बांग्लादेश के बनने के बाद से आज तक अपने मुल्क नहीं पहुंच सके हैं। दूसरी वजह है- क्या बांग्लादेश इन लोगों को अपने वतन में वापस लेने को तैयार होगा, शायद नहीं। ऐसे में 1200 करोड़ रुपए खर्च कर एनआरसी का काम फिजूलखर्ची ही है। इसमें 52 हजार सरकारी कर्मचारियों को लगाकर हमने राज्य का विकास ही रोका है। इस पूरी प्रक्रिया से देश को अपेक्षित परिणाम प्राप्त होने वाले नहीं है।

    पूर्व राष्ट्रपति के भतीजे जैसे कई बड़े नाम नहीं

    असम में जारी हुए एनआरसी के ड्राफ्ट में चौकाने वाली गड़बड़ी सामने आई है। ड्राफ्ट में पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे जियाउद्दीन, भाजपा विधायक दिलीप पॉल की प|ी अर्चना पॉल, कांग्रेस के पूर्व विधायक अतउर रहमान मजरभुईयां और एआईयूडीएफ की कचार इकाई के अध्यक्ष समीमुल इस्लाम समेत कई बड़े नाम गायब हैं।

    संसद के बाहर चौबे (बाएं) और प्रदीप के बीच तीखी बहस हुई।

    मैं पश्चिम बंगाल का हूं। करीब 100 बार असम की यात्रा की है। एनआरसी के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री लोगों को गुमराह करना बंद करें। -प्रदीप भट्‌टाचार्य, कांग्रेस सांसद

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