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भारत में रक्षा उत्पादन बढ़ाने की नीति का ऐलान अगले महीने, लड़ाकू विमान और मिसाइल पर होगा फोकस

नई दिल्ली |अगले 10 साल में देश को रक्षा उत्पादन में दुनिया के पांच बड़े सैन्य उपकरण बनानेवाले देशों में शामिल करने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 30, 2018, 03:15 AM IST

नई दिल्ली |अगले 10 साल में देश को रक्षा उत्पादन में दुनिया के पांच बड़े सैन्य उपकरण बनानेवाले देशों में शामिल करने के इरादे से अगले महीने सरकार रक्षा उत्पादन नीति की घोषणा करेगी। नीति के मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके बाद मंजूरी के लिए इसे केंद्रीय कैबिनेट में पेश किया जाएगा। इस समय भारत को ज्यादातर सैन्य साजोसामान दूसरे देशों से आयात करना पड़ता है। नीति में दूसरे मित्र देशों की मांगों को पूरा करने की बात भी शामिल है।



सूत्रों ने बताया कि इस नीति में लड़ाकू विमानों और मिसाइलों पर खास जोर रहेगा। लड़ाकू विमानों, अटैक हेलिकॉप्टरों और हथियारों का देश में ही उत्पादन करने और इसके लिए आवश्यक तकनीक विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। उचित संसाधनों के निवेश की जरूरत को पूरा किया जाएगा। मार्च में जारी किए गए नीति के मसौदे के अनुसार सरकार 2025 तक सैन्य साजोसामान और सेवाओं के कुल कारोबार को 1,70,000 करोड़ रुपए तक पहुंचाना चाहती है। सैन्य उपकरणों और सेवाओं में 35,000 करोड़ रुपए के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है।



सरकार ने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने के मकसद से उत्पादन के लिए 12 मिलिट्री प्लैटफॉर्म्स और वेपन सिस्टम्स निर्धारित किए हैं।

आत्मनिर्भरता के साथ निर्यात का भी लक्ष्य

मंजूरी लेने की अनिवार्यता को खत्म किया जाएगा

नीति में खरीद प्रक्रिया को भी काफी सरल किया जाएगा और तमाम मंजूरी लेने की अनिवार्यता को खत्म किया जाएगा जिससे खरीदी जल्दी हो। लाइसेंस देने की प्रक्रिया को उदार बनाया जाएगा और लाइसेंस के लिए जरूरी आइटम्स की समीक्षा कर कम किया जाएगा। उद्देश्य स्पष्ट है सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की सक्रिय भागीदारी के साथ भारत को रक्षा प्लैटफॉर्म्स के टॉप 5 निर्माताओं में शामिल कराना।

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