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केंद्रीय और राज्य सूचना आयुक्तों के कई पदों के खाली होने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) और राज्य सूचना आयोगों (एसआईसी) में कई पदों के खाली पड़े होने पर चिंता...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 28, 2018, 03:15 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) और राज्य सूचना आयोगों (एसआईसी) में कई पदों के खाली पड़े होने पर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सात राज्यों को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि खाली पदों पर कब तक नियुक्तियां हो जाएंगी। ये राज्य- गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक हैं। जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा कि सीआईसी में चार पद खाली हैं। दिसंबर तक चार और पद खाली हो जाएंगे। बेंच ने केंद्र से पूछा कि 2016 में विज्ञापन देने के बावजूद सीआईसी में पद अभी तक खाली क्यों हैं। इसका कारण हलफनामा दायर कर बताया जाए। केंद्र की ओर से अतिरिक्त साॅलिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि सीआईसी में चार पदों पर नियुक्तियों के लिए विज्ञापन जारी किया गया हैं, क्योंकि 2016 के विज्ञापन के बाद इन पदों पर नियुक्तियां नहीं की गई थीं।

सुनवाई के दिन ही केंद्र ने जारी किया नियुक्ति के लिए विज्ञापन

आरटीआई कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि केंद्र ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दिन सीआईसी में खाली पड़े चार पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया है, इसी से उनके रवैये का पता चलता है। उन्होंने कहा कि दिसंबर तक मुख्य सूचना आयुक्त रिटायर हो जाएंगे और इसके साथ ही चार और पद खाली हो जाएंगे। इस पर बेंच ने कहा, ‘परेशान मत हों, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि सारे रिक्त पदों पर नियुक्तियां हों।’

सरकारें सूचना आयोग को जानबूझकर पंगु कर रहीं

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि सरकारें जानबूझकर नियुक्ति न करके सूचना आयोग को पंगु करना चाहती हैं। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि सीआईसी में 23,500 से अधिक अपील तथा शिकायतें लंबित हैं। आंध्र प्रदेश के राज्य सूचना आयोग में एक भी सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने लापता लोगों के आधार डेटा के इस्तेमाल पर दिशा-निर्देश को लेकर केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलाने के लिए उनके बाॅयोमेट्रिक आैर आधार डेटा के इस्तेमाल के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। इस पर 13 नवंबर को अगली सुनवाई होगी। बेंच ने गृह मंत्रालय को जारी नोटिस में यह बताने को भी कहा है कि याचिकाकर्ता के वकील अमित साहनी के प्रेजेंटेशन पर क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी एक्शन टेकेन रिपोर्ट में दी जाए। याचिका में लापता बच्चों, बुजुर्ग और मानसिक रूप से बीमार लोगों के आधार डेटा के इस्तेमाल करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है।

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