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पढ़कर मिल सकती है बेहतर नौकरी

री दुनिया में आपदाओं को अब नए नजरिए से देखा जा रहा है। दरअसल पहले की तुलना में आपदाओं को प्रकृति की मर्जी मानकर...

Dainik Bhaskar

Jul 23, 2018, 06:10 AM IST
पढ़कर मिल सकती है बेहतर नौकरी
री दुनिया में आपदाओं को अब नए नजरिए से देखा जा रहा है। दरअसल पहले की तुलना में आपदाओं को प्रकृति की मर्जी मानकर स्वीकार करने के बजाय अब उनके प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है ताकि इससे होने वाले जान-माल के नुकसान को सीमित किया जा सके। भारत में आपदा प्रबंधन यानी डिजास्टर मैनेजमेंट का बाजार यूरोप की तुलना में एकदम नया है। हालांकि यह शुरुआती दौर में है, लेकिन धीरे-धीरे यह विस्तृत हो रहा है। जून 2016 में भारत के इतिहास की पहली आपदा प्रबंधन योजना भारत सरकार द्वारा जारी की गई है। इससे पहले तक देश के पास आपदाओं से निपटने के लिए कोई केंद्रीय योजना का प्रारूप नहीं था। हाल में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 11 एमओयू हुए जिसमें से आईसीटी और टेलीकम्यूनिकेशन का एक एमओयू आपदा प्रबंधन में कम्यूनिकेशन तकनीक के उपयोग को लेकर भी था। भारत डिजास्टर मैनेजमेंट के अपने पूर्व अनुभवों को बेहतर बनाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है। इस काम को पूरा करने के लिए देश को बड़ी संख्या में विशेषज्ञों की जरूरत होगी, जिसे पूरा करने के लिए कई संस्थान कोर्सेज करवा रहे हैं। अगर आप भी इस क्षेत्र में कॅरिअर बनाना चाहते हैं तो अब यहां आगे बढ़ने के लिए कई रास्ते हैं।

स्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के एक सर्वे के अनुसार, देश में लगभग 65 प्रतिशत मध्यम आकार की कंपनियां नए कर्मचारियों को टेक्निकल ट्रेनिंग की तुलना में सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग देना पसंद करती हैं। इसमें वे कम्यूनिकेशन, कॉन्फ्लिक्ट रिजोल्यूशन, वर्क-लाइफ बैलेंस, टाइम मैनेजमेंट, सेल्फ-इंप्रूवमेंट, स्ट्रेस मैनेजमेंट आदि की ट्रेनिंग देती हैं। आईईटी के कंट्री हेड, शेखर सान्याल के मुताबिक, ऑर्गनाइजेशन्स और कर्मचारियों के आगे बढ़ने के लिए अब सबसे ज्यादा जरूरी है उनकी लर्न और अनलर्न कैपेसिटी। ऐसे में सॉफ्ट स्किल्स कॅरिअर एडवांसमेंट, प्रभावी लीडरशिप और मजबूत वर्क एथिक्स सिखाने के साथ-साथ पेशेवर कमजोरियों को दूर करने में भी मदद करती हैं। इसके अलावा कई बार टेक्निकल स्किल्स की तुलना में कर्मचारियों की सॉफ्ट स्किल्स कंपनी के ज्यादा काम आती हैं। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू के एक अध्ययन के अनुसार, सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग कर्मचारियों को अपने काम को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती हैं और वर्क परफॉर्मेंस पर भी अच्छा असर डालती हैं। कुछ अध्ययनों के मुताबिक, 30 प्रतिशत कर्मचारी अपना जाॅब कमजोर सॉफ्ट स्किल्स की वजह से छोड़ देते हैं। बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स भी सॉफ्ट स्किल्स की कमी की वजह से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सॉफ्ट स्किल्स डेवलप कर कॅरिअर ग्रोथ की राह मजबूत हो सकती है।

क्या करते हैं डिजास्टर मैनेजमेंट एक्सपर्ट

आपदाओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है। प्रकृति जनित आपदाएं और मानव जनित आपदाएं। दोनों तरह की आपदाओं के लिए अलग तरह की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। प्रकृति जनित आपदाओं में बाढ़, भूकंप, सूखा, सुनामी और भूस्खलन जैसी घटनाओं को शामिल किया जाता है जबकि मानव जनित ज्यादातर आपदाएं इंडस्ट्रीज से संबंधित होती हैं, जिनमें आग लगना, रासायनिक रिसाव और वेस्ट मैनेजमेंट प्रमुख हैं। आपदा प्रबंधक अपनी विशेषज्ञता से आपदा के प्रभाव को नियंत्रित करने, उनकी पूर्व चेतावनी जारी करने और आपदा के दौरान प्रबंधन योजना बनाने का काम प्रमुखता से करते हैं।

यहां मिल सकते हैं नौकरी के अवसर

काबिल उम्मीदवारों को नौकरी के लिए यह क्षेत्र बेहतर अवसर दे रहा है। देश के विभिन्न इंडस्ट्रियल जोन्स के साथ ही इन आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों को रसायन, नागरिक उड्‌डयन, रेल्वे, सड़क परिवहन, पर्यावरण और वन, स्वास्थ्य और परमाणु ऊर्जा से संबंधित क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलता है। इसके अलावा देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान काम के अच्छे मौके देते हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली, हरियाणा इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, गुड़गांव, जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन एन्वायरनमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट, उत्तराखंड, डिजास्टर मैनेजमेेंट इंस्टीट्यूट, भोपाल, इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली, इंडियन रेड क्रॉस सोसायटी, नई दिल्ली, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, देहरादून, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी, चेन्नई जैसे संस्थानों में आपको जॉब के अवसर मिलेंगे। इतना ही नहीं राज्य राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्रालय/विभाग व राज्य सरकार के लोक प्रशासन संस्थानों में भी आप नौकरी के अवसर हासिल कर सकते हैं। साथ ही आपदा निवारण और प्रबंधन अध्ययन के लिए फेलोशिप प्रदान करने वाले संगठन भी आपको काम के मौके दे सकते हैं। इसके अलावा यूनिवर्सिटीज में फैकल्टी और रिसर्च पदों पर भी कॅरिअर की शुरुआत की जा सकती है।

जॉब के लिए जरूरी हैं सॉफ्ट स्किल्स

क्या पढ़ना होगा ?

डिजास्टर मैनेजमेंट में किए जाने वाले कोर्सेज और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का दायरा बहुत विस्तृत है। सही डिग्री के साथ यहां सफलता पाई जा सकती है। इस क्षेत्र में दो दिन के सर्टिफिकेट कोर्स व ट्रेनिंग से लेकर पीएचडी जैसे विकल्प पढ़ाई के लिए उपलब्ध हैं। इच्छुक उम्मीदवार इसके लिए 12वीं के बाद बैचलर्स डिग्री में एडमिशन ले सकते हैं। एडमिशन साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स सभी स्ट्रीम के स्टूडेंट्स ले सकते हैं। आगे की पढ़ाई के लिए साइंस स्ट्रीम या फिर डिजास्टर मैनेजमेंट के ग्रेजुएट्स पीजी के लिए अप्लाय कर सकते हैं और अपनी डिग्री हासिल कर सकते हैं।

पढ़ाई के संस्थान

पढ़ाई के लिए आप रेग्युलर या डिस्टेंस लर्निंग कोर्सेज को चुन सकते हैं। इसके लिए आप इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, सिक्किम मनिपाल यूनिवर्सिटी, अन्नामलाई विश्वविद्यालय, तमिलनाडु, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, नई दिल्ली, यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास, चेन्नई, दी ग्लोबल ओपन यूनिवर्सिटी, नागालैंड, आईआईटी, रुड़की, त्रिपुरा यूनिवर्सिटी, त्रिपुरा, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग, देहरादून, नेशनल सिविल डिफेंस कॉलेज, नागपुर, एन्वायरनमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, हैदराबाद जैसे संस्थानों में से किसी एक को चुन सकते हैं। सही डिग्री लेने के बाद आप इस क्षेत्र में अपनी मजबूत शुरुआत कर सकते हैं।

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