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सुविधाओं पर एक समान सरचार्ज लें बैंक: हाईकोर्ट

बिलासपुर | हाईकोर्ट ने उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाओं के लिए बैंकों को एक समान सरचार्ज लेने के निर्देश दिए...

Dainik Bhaskar

Jul 26, 2018, 02:00 PM IST
बिलासपुर | हाईकोर्ट ने उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सुविधाओं के लिए बैंकों को एक समान सरचार्ज लेने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि बैंक इस संबंध में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइडलाइन का पालन करें। बैंकों द्वारा आदेश का पालन नहीं करने पर याचिकाकर्ता को संबंधित ट्रिब्यूनल में मामला पेश करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही इसे लेकर लगाई गई जनहित याचिका निराकृत कर दी गई है। बता दें कि मिनिमम बैलेंस रखने, चार से अधिक ट्रांजेक्शन समेत अन्य सुविधाओं पर हर बैंक के अपने नियम हैं। हाईकोर्ट के नोटिस जवाब में आरबीआई ने कहा था कि बैंकों को सरचार्ज लगाने के संबंध में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 1 मार्च 2017 और एक्सिस, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक ने 1 अप्रैल 2017 से ग्राहकों को दी जा रही सुविधाओं पर सरचार्ज लगाने का निर्णय लिया था।



चार ट्रांजक्शन मुफ्त होने के बाद पांचवें ट्रांजक्शन यानी राशि जमा करने या निकालने और सर्विस शुल्क के नाम पर राशि वसूल करने का निर्णय लिया गया था। इसी तरह एटीएम का उपयोग भी महंगा कर दिया गया। खाते से बैलेंस इंक्वायरी करने, बड़ी राशि जमा करने पर शुल्क वसूलने का निर्णय लिया गया था। एकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखना अनिवार्य किया गया। एसबीआई ने यह नियम 1 मार्च 2017 से लागू किए थे। वहीं, तीन निजी बैंकों में नियम 1 अप्रैल 2017 से लागू किए गए। इसके खिलाफ एडवोकेट सलीम काजी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई और एचडीएफसी बैंक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। एसबीआई, आईसीआईसीआई की तरफ से सितंबर में ही जवाब प्रस्तुत कर दिया गया था। आरबीआई की तरफ से जवाब प्रस्तुत कर बताया गया था कि सरचार्ज वसूली के संबंध में कोई गाइडलाइन जारी नहीं किया गया है। बुधवार को चीफ जस्टिस अजय कुमार त्रिपाठी और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच जनहित याचिका यह कहते हुए निराकृत कर दी है कि बैंक सुविधाओं के लिए उपभोक्ताओं से एक समान सरचार्ज लें, साथ ही इस संबंध में आरबीआई द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन किया जाए। इसका पालन नहीं होने पर संबंधित ट्रिब्यूनल में मामला प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

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