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दो साल में 30 फीसदी भी एडमिशन नहीं आगे भी आईटी कॉलेज के सामने चुनौती

जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर आईटी कॉलेज ही है। संसाधन व विशेषज्ञों की कमी के कारण अपने ही जिले के छात्रों को यह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:30 AM IST

जिले में उच्च शिक्षा के नाम पर आईटी कॉलेज ही है। संसाधन व विशेषज्ञों की कमी के कारण अपने ही जिले के छात्रों को यह कॉलेज पसंद नहीं आ रहा है। इंजीनियरिंग करने वाले छात्र कोरबा के बजाय अन्य शहरों के आईटी कॉलेज को महत्व दे रहे हैं, बाहरी जिले के छात्रों को यह कॉलेज नहीं के बराबर पसंद है। यही कारण है बीते दो साल से 4 ब्रांचों की तय सीटों पर 30 फीसदी छात्र भी नहीं मिले।

जिले के छात्रों को यही सर्वसुविधायुक्त कॉलेज मिले जहां वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकें। इसके लिए निजी व सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों के सहयोग से 25 एकड़ में आईटी कॉलेज का भवन बना। जिसमें स्टडी रूम, प्रेक्टिकल रूम, कैंटीन, हॉस्टल, फैकल्टी के लिए आवासीय सुविधा, खेल के लिए पर्याप्त मैदान समेत वे सभी सुविधाएं विकसित की गईं जो एक आईटी कॉलेज में होनी चाहिए। परन्तु छात्रों को बेहतर ज्ञान मिले इसके लिए अति आवश्यक विषय विशेषज्ञों की भर्ती, नियमित प्राचार्य की नियुक्ति को अब तक नजर अंदाज किया गया है। ऐसे में छात्रों को आधी अधूरी सुविधा वाले आईटी कोरबा के विशाल भवन में डिग्री हासिल करने की रुचि दूसरे साल से ही घटने लगी। 240 सीटों वाले इस आईटी कॉलेज की स्थिति यहां तक पहुंच गई है। चालू सत्र में महज 38 छात्र ही पढ़ाई कर रहे हैं। 100 सीटर हॉस्टल में भी रहने वाला कोई नहीं है। सत्र 2016-17 में भी 63 छात्रों ने ही यहां एडमिशन लिया था।

पीपीपी मॉडल में चल रहा काॅलेज, छात्रों का कैंपस छोड़ अधूरी मिल रही सुविधा

सीएसआर मद से बना आईटी कालेज का भवन

चार साल में एडमिशन की स्थिति

सत्र सीट प्रवेश रिक्त

2014-15 240 190 50

2015-16 240 151 89

2016-17 240 63 177

2017-18 240 38 202

240 सीट, सिर्फ 38 छात्र, हॉस्टल खाली

निजी कॉलेज में इंजीनियरिक करने वालों का रुझान कम होने का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि 240 सीटों वाले इस आईटी कॉलेज में सिर्फ 38 स्टूडेंट्स ही पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही 100 सीटर हॉस्टल भी खाली है। दो साल से 4 ब्रांचों की तय सीटों पर 30 फीसदी छात्र भी नहीं मिले।

तो एआईसीटीई को बंद करना पड़ेगा कॉलेज

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के अनुसार देश के ऐसे कॉलेज जहां लगातार 5 साल तक सीटों की तुलना में 30 फीसदी से कम एडमिशन होने पर ताला लग सकता है। एआईसीटीई के इस आदेश को देखते हुए आईटी कॉलेज प्रबंधन को अपनी साख बचाने नए सत्र में काफी मशक्कत करनी होगी। अब देखना होगा कि प्रबंधन ऐसा क्या करता है कि छात्रों की संख्या बढ़ जाएगी।

महंगी फीस भी है कारण इसलिए नहीं रहता रुझान

शासकीय कॉलेजों की तुलना में सेमी गवर्नमेंट कॉलेज की फीस दोगुना है। शासकीय कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र 22 से 25 हजार रुपए में इंजीनियरिंग करते हैं तो अशासकीय कॉलेजों में एक ही पाठ्यक्रम के छात्रों को 65 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। इसके बाद भी रोजगार नहीं मिल पाता है। जिसके कारण छात्र इंजीनियरिंग कॉलेजों से मुंह मोड़ने लगे हैं। पीपीपी मॉडल से संचालित होने का जिले का आईटी कॉलेज इस विसंगति को लेकर छात्रों से वंचित होता जा रहा है।

आदेश के बाद तीन साल तक करना होगा संचालन

एआईसीटीई अगर आईटी कॉलेज को बंद करने का आदेश जारी भी करता है तो कम से कम 3 साल तक तो संचालन करना ही पड़ेगा। क्योंकि प्रथम वर्ष में एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्राओं को डिग्री लेने तक पढ़ाई करानी ही पड़ेगी। अब तक ऐसा कोई आदेश आईटी कोरबा को नहीं मिला है जिसको लेकर प्रबंधन तनाव में है। यह तो तय है कि अगर आने वाले 3 साल तक एडमिशन का ग्राफ इसी तरह रहा तो एआईसीटीई काे आदेश जारी करना ही पड़ेगा।

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