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बिसाहूदास राजनीति को सेवा मानते थे, विद्यार्थी जीवन से ही स्वतंत्रता के प्रति था लगाव: महंत

छत्तीसगढ़ के जननेता हरिजन, आदिवासी, पिछडे वर्ग सहित श्रमिक कृषकों के हित चितंक बिसाहूदास महंत के योगदान को कभी...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:45 AM IST
छत्तीसगढ़ के जननेता हरिजन, आदिवासी, पिछडे वर्ग सहित श्रमिक कृषकों के हित चितंक बिसाहूदास महंत के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

यह बात पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत ने रविवार को ओपन थियेटर घंटाघर के पास स्थित स्व. बिसाहूदास महंत स्मृति उद्यान में आयोजित उनकी 94वीं जयंती के अवसर पर कही। डॉ. महंत ने कहा कि बाबूजी जनप्रिय राजनेता थे। 4 बार मध्यप्रदेश में कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में उनके ऐतिहासिक कार्य निर्वहन की क्षमता को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। बाबूजी कबीर पंथी होने के साथ-साथ गांधीवादी विचारक थेे। सादा जीवन उच्च विचार की गरिमा को हर हमेशा जीवन की उच्चतम मूल्य मानते थे। सरलता, सहजता एवं मिलन सरिता के वे एक जीवंत प्रतिमूर्ति थे। विधायक जयसिंह अग्रवाल ने स्व. बिसाहूदास महंत के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ की कल्पना, छत्तीसगढ़ी भाषा की कल्पना, हंसती खिलखिलाती संस्कृति का सपना देखा था स्व. बिसाहूदास महंत ने। वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन हम सबको उनके त्यागमय जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है। वे राजनीति को सेवा कार्य मानते थे। विद्यार्थी जीवन से ही स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति उनका लगाव था। महापौर रेणु अग्रवाल, जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष उषा तिवारी, जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद, जनपद उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम के शुरूवात में स्व. बिसाहूदास महंत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर श्रीकांत बुधिया, श्याम सुंदर सोनी, धुरपाल सिंह कंवर, धरम निर्मले, सुरेन्द्र प्रताप जायसवाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे।