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मारवाड़ी समाज में लकड़ी नहीं बल्कि कंडा से होलिका दहन की है परंपरा

Korba News - एक ओर जहां हर गली मोहल्ले के साथ गांव-गांव में होलिका दहन में लकड़ी जलाई जाती है। दूसरी ओर मारवाड़ी समाज इस अपनी अलग...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 02:50 AM IST
मारवाड़ी समाज में लकड़ी नहीं बल्कि कंडा से होलिका दहन की है परंपरा
एक ओर जहां हर गली मोहल्ले के साथ गांव-गांव में होलिका दहन में लकड़ी जलाई जाती है। दूसरी ओर मारवाड़ी समाज इस अपनी अलग परंपरा का पालन पीढ़ियों से करता आ रहा है। यह समाज लकड़ी नहीं गोबर के कंडों से होलिका दहन को आज भी कायम रखे हुए है।

पुराना बस स्टैंड में 100 साल से पहले से यह परंपरा निभाई जा रही है। होलिका दहन के लिए मारवाड़ी समाज के लोग परिवार के साथ पहुंचकर पूजा करते हैं। गुरुवार को यह रस्म निभाई गई। यहां शहरी क्षेत्र में रहने वाले मारवाड़ी एकत्र होकर पूजा किए। हिंदू धर्म को मानने वालों में मारवाड़ी समाज होली त्योहार को अलग अंदाज में मनाने तैयार है। सुबह से लेकर दहन तक पूजन विधि में महिलाएं जुटी रहीं। सुबह से ही गोबर से बने कंडे, माला, रोली, कुमकुम, फूल व चावल से होलिका पूजन होता रहा।

नई बहुओं के लिए शुभकारी

मारवाड़ी समाज में होलिका दहन का एक विशेष स्थान है। समाज के लोग पूरे विधि-विधान के साथ होलिका दहन करते हैं। गुरुवार को पुराना बस स्टैंड में मारवाड़ी समाज ने होलिका दहन किया। जहां प्रत्येक घर से महिलाएं गोबर का बड़कुला (कंडा) व होलिका तैयार कर बस दहन स्थल पहुंची। दहन कर समाज की कुरीतियों को दूर करने का संकल्प दोहराया। इसके बाद समाज के लोगों ने होलिका में चना, जो, गेहूं आदि को सेंककर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। मारवाड़ी समाज में होलिका दहन नवविवाहित महिलाओं के लिए शुभकर है। होलिका की परिक्रमा कर नवविवाहिता सुखमय जीवन की कामना करती हैं। समाज की महिलाओं ने बताया कि होलिका दहन के बाद गणगोर उत्सव होगा। महिलाएं माता गंगोरी की पूजा के लिए होलिका की राख अपने घर लाती हैं।

परिवार समेत करते हैं पूजा

होलिका की परिक्रमा करती महिलाएं।

आज मनेगा रंगोत्सव

गुरुवार को होेलिका दहन के बाद शुक्रवार को रंगोत्सव मनेगा। जिसमें पूरा शहर अबीर-गुलाल से सराबोर रहेगा। शहर कई कालोनियों की महिला मंडल ने सूखी होली खेलने का संकल्प लिया। इसके पीछे पानी का संरक्षण व उसके लिए लोगों को जागरुक करने का संदेश देना है।

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