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शराब दुकान बंद कराने सामने बैठा सिख समाज, पीछे दरवाजा खाेलने पर ट्रांसपोर्टरों का विरोध

शिफ्टिंग की मांग पर अड़े, आश्वासन नहीं मानने पर प्रशासनिक अफसर भी लौटे कोरबा| वित्तीय वर्ष के पहले दिन रविवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:50 AM IST

शिफ्टिंग की मांग पर अड़े, आश्वासन नहीं मानने पर प्रशासनिक अफसर भी लौटे

कोरबा| वित्तीय वर्ष के पहले दिन रविवार को ट्रांसपोर्टनगर शराब दुकान लोगों के विरोध के कारण नहीं खुल सकी। सुबह ही पास के गुरुद्वारा से सिख समाज ने दुकान के सामने दरवाजे पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। वे शिफ्टिंग की मांग पर अड़े थे।

तहसीलदार राठौर समेत आबकारी उप निरीक्षक अशोक अग्रवाल ने उनसे चर्चा की। अधिकारियों ने एक माह का मोहलत लेते हुए सामने दरवाजे के बजाए पीछे दरवाजे की ओर से दुकान चलाने आश्वासन दिया। इस पर एक राय बनी। जब आबकारी विभाग ने दुकान के पीछे की ओर का दरवाजा खुलवाना शुरू किया तो वहां ट्रांसपोर्टर सुबोध सिंह के नेतृत्व में अन्य ट्रांसपोर्टर व आसपास के गैरेज संचालक पहुंचे। वे शराब दुकान खुलने का विरोध करते हुए पीछे दरवाजे के आगे बैठ गए। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया पर वे दुकान शिफ्टिंग पर अड़ गए। इससे पहले दिन देर शाम तक ट्रांसपोर्टनगर शराब दुकान नहीं खुल सकी। आबकारी अधिकारी अशोक अग्रवाल ने बताया उच्चअधिकारियों से ट्रांसपोर्टनगर शराब दुकान को शिफ्ट करने चर्चा चल रही है। चेंबर ऑफ कामर्स के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल ने बताया गुजरे वित्तीय वर्ष ट्रांसपोर्टनगर शराब दुकान को यूनियन बैंक के सामने से शिफ्ट करते हुए इंिदरा स्टेडियम के मुख्य गेट के ठीक सामने खोला है। उक्त स्थान भीड़भाड़ वाला है।

दारू बिकवाना पाप...हम नहीं बनेंेगे भागीदार

शराब दुकान का विरोध कर रहे सिख समाज के लोग गुरुद्वारा गुरूसिंह सभा से जुड़े थे। प्रशासनिक व आबकारी अफसरों ने दुकान शिफ्टिंग के लिए उन्हें ही उपयुक्त जगह खोजकर देने को कहा। इस पर गुरुद्वारा सभा के अध्यक्ष रघुवीर सिंह ने तल्ख लहजे में कहा कि दारू बिकवाना पाप है। इसके लिए जगह उपलब्ध कराना मतलब उसमें भागीदार बनना है। हम नहीं बनेंगे पाप के भागीदार।

एक साल बाद दुकान वहीं बिना शिफ्टिंग नहीं हटेंगे

ट्रांसपोर्टर सुबोध सिंह समेत अन्य लोगों ने कहा एक साल पहले जब ट्रांसपोर्टनगर में स्टेडियम के पास शराब दुकान खाेला था। उस समय विरोध किया गया था। जिस पर एक साल के भीतर दूसरे स्थान पर शिफ्टिंग की शर्त थी। लेकिन एक साल बाद भी शराब दुकान शिफ्ट नहीं हो सकी। अब दोबारा शराब दुकान शिफ्टिंग से पहले नहीं हटेंगे।

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