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5 करोड़ के प्रोजेक्ट को पूरा करने अब 24 करोड़ की जरूरत, फंड के इंतजार में पिटलाइन शुरू नहीं

केन्द्र सरकार का आम बजट 1 फरवरी को पेश होगा। जिससे 9 साल से फंड की कमी के कारण अटके पिटलाइन को संजीवनी मिलने की उम्मीद...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:55 AM IST

केन्द्र सरकार का आम बजट 1 फरवरी को पेश होगा। जिससे 9 साल से फंड की कमी के कारण अटके पिटलाइन को संजीवनी मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने का यहां के लोगों को बेसब्री से इंतजार है। क्योंकि रेल प्रशासन प्रोजेक्ट को शुरू करने के बाद लंबी दूरी की ट्रेनों की संख्या बढ़ाने मजबूर होगा। हावड़ा रूट से जुड़ने के बाद भी रेल प्रशासन अब तक कोई ट्रेन यहां से नहीं चला सका है। पहले सिंगल ट्रैक ही था अब डबल बन गया है। इसके बाद जरूरी संसाधन जुटाने में रेलवे असफल है।

वर्ष 2009 में मंजूर पिटलाइन दिसंबर 2012 में पूरा हो गया था। निर्माण के दौरान तकनीकी खामियों व अधूरे स्ट्रक्चर की वजह से इसकी उपयोगिता अब तक साबित नहीं की जा सकी। अफसरों का कहना था कि सबसे पहले बने सिंगल ट्रैक पर प्राइमरी मेंटेनेंस भी नहीं हो सकता। इसके लिए एक और ट्रैक की जरूरत बताते हुए नया प्रस्ताव भी तैयार किया गया। जनवरी 2016 तक कोचिंग डिपो की तर्ज पर पिटलाइन बनाने की योजना बनी। जो अब तक साकार नहीं हो सका है। उल्टा पहले बन चुकी पिटलाइन की खामियों को भी दूर नहीं किया जा सका। ट्रेनों के तकनीकी पार्ट का नजदीकी एक्जामिन, रखरखाव, मरम्मत व सुधार के साथ ट्रेनों के परीक्षण का बेहतर केंद्र बनाने कोरबा में पिटलाइन को मंजूरी दी गई थी।

9 साल में सिंगल से बना डबल ट्रैक, नहीं शुरू हो सका पिटलाइन

डबल ट्रैक वाली पिटलाइन।

11 ट्रेन चल रही व 19 कोच की क्षमता

रेलवे कॉरिडोर के साथ अतिरिक्त पिटलाइन का निर्माण पूरा होने पर एक बार फिर कोरबा से लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद की जा सकती है। यात्री ट्रेनों की सर्विसिंग प्रतिदिन की कार्रवाई में एक अनिवार्य प्रक्रिया है। कोरबा में एक्सप्रेस व पैसेंजर समेत 11 यात्री ट्रेनों का परिचालन होता है, जिनमें लोकल ट्रेनों के अलावा 3 प्रतिदिन व 2 साप्ताहिक एक्सप्रेस गाड़ियां शामिल हैं। वर्तमान में पिटलाइन में 19 कोच की क्षमता है।

एडिशनल पिट व सिकलाइन बनाने की है जरूरत

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर डिवीजन में बैठे अफसर जब भी दौरे पर होते हैं उनके अधिनस्थ कर्मचारी वास्तविकता से रूबरू नहीं कराते हैं। जोन के जीएम सुनील सिंह सोइन अपने पहले दौरे पर कोरबा आए थे तब उन्होंने पिटलाइन को शुरू नहीं करने का कारण पूछा था, जिसमें यह बात सामने आई की फंड मांगा गया है। शासन से जो पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है। पिटलाइन को सिक लाइन में बदलने की कवायद अधूरी पड़ी है। दूसरी ओर बताया जाता है कि अफसर जानबूझ कर इस प्रोजेक्ट को लटका रखे हैंं।

सुविधाएं देना डिवीजन के हाथ में

जिला चेंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष रामकिशन अग्रवाल ने बताया कि किसी भी डिवीजन में यात्री सुविधाएं देना डीआरएम के अधिकार में होता है। 7 साल में यात्री सुविधाओं को लेकर कोरबा में विकास थम सा गया है। इसके लिए न तो जनप्रतिनिधि जागरुक हैं न ही रेलवे के अधिकारी। लोगों को गुमराह करने सुविधाओं का पुलिंदा (प्रस्ताव) बोर्ड को भेजने की बात कहते रहते हैं। परन्तु किसी भी मामले में मंजूरी की बात आज तक नहीं सुनने को मिली।

पिटलाइन की मंजूरी वर्ष 2009 में

बना दिसंबर 2012 निर्माण अवधि 3 साल

निर्माण लागत 5 करोड़

ट्रैक की लंबाई 300 मीटर

मेंटेनेंस क्षमता 19 कोच की

अब तक हो रहा वाटरिंग व वाशिंग

सर्विसिंग टाइम 40 मिनट

2015 में प्रस्ताव एडिशनल पिटलाइन

अनुमानित लागत 24 करोड़ जो नहीं मिला है

कमाई 5 से 6 हजार करोड़ हो गई फिर भी फंड का रोना

बिलासपुर डिवीजन का कोरबा रेलखंड राजस्व देने में अग्रणी है। दो साल पहले तक यहां से सालाना 5 हजार करोड़ का राजस्व आता था जो अब बढ़कर 6 हजार करोड़ पहुंच गया है। इसके बाद भी महज 24 करोड़ की मंजूरी का आस लगाए बैठे हुए हैं। इस प्रोजेक्ट की प्रारंभिक निर्माण लागत 5 करोड़ थी।

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