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पावर प्लांट में वेतन नहीं बढ़ने से भू-विस्थापित कर्मियों को होगा नुकसान

बिजली कंपनी के पावर प्लांट में कार्यरत भू-विस्थापित कामगारों का बेसिक प्रबंधन ने 10525 रुपए कर दिया है। मानव संसाधन...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:05 AM IST
बिजली कंपनी के पावर प्लांट में कार्यरत भू-विस्थापित कामगारों का बेसिक प्रबंधन ने 10525 रुपए कर दिया है। मानव संसाधन विभाग के आदेश से लगभग 300 भू-विस्थापित कर्मचारियों का बेसिक कम हो गया। प्रभावित कर्मचारियों को इससे हर माह 2 से 3 हजार रुपए का नुकसान होगा।

राज्य पावर जनरेशन कंपनी के बिजली प्लांट के लिए जमीन लेने के कई वर्ष बाद प्रबंधन ने भू-विस्थापितों को नौकरी दिया था। लेकिन भू-विस्थापित कर्मियों के वेतनमान में बढ़ोतरी नहीं हुई। जिसे लेकर कर्मचारियों की नाराजगी है। जिस दर पर नौकरी प्रदान की गई, उसी दर पर ही वेतन का भुगतान किया जा रहा है। जबकि कंपनी के नियमित बिजली कर्मियों का वेतन में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है।

वेतन बढ़ोत्तरी नहीं, बिजली कंपनी के नए फरमान से हर माह 2 से 3 हजार का नुकसान

बैठक के बाद भी सात साल बाद भी कर्मचारी नहीं किए गए है नियमित

राज्य बिजली कंपनी में 700 भू-विस्थापितों को प्रबंधन ने नौकरी तो दे दिया। लेकिन पिछले 7 साल से काम कर रहे इन कामगारों को अब तक नियमित नहीं किया जा सका है। जबकि परिवीक्षा अवधि के बाद नियमित करने का प्रावधान है। हर तीन माह में आदेश जारी कर प्रबंधन कर्मियों की परिवीक्षा अवधि बढ़ा देती है। बार-बार दस्तावेजों की जांच पड़ताल भी किया गया है। लेकिन कर्मचारी नियमित नहीं किए गए है। पिछले दिनों हुई बैठक में प्रबंधन ने कर्मियों को नियमित करने को लेकर वार्ता हुई थी।

प्लांटों में कई भू-विस्थापितों को नहीं मिली नौकरी

बिजली कंपनी के डीएसपीएम प्लांट, एचटीपीपी विस्तार, मड़वा पावर प्लांट के राखड़ बांध में लगभग तीन हजार भू-विस्थापितों की जमीन ली गई थी। इनमें करीब 700 भू-विस्थापितों को ही नौकरी मिली है। जबकि हजारों भू-विस्थापितों को अब तक नौकरी नहीं मिली है। कई कंपनी के कार्यालयों का चक्कर काट कर थक चुके हैं लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

प्रबंधन के फैसले से नाराजगी कामगारों को आर्थिक नुकसान

बेसिक कम करने के पीछे प्रबंधन का कहना है कि इन कर्मियों ने न्यूनतम शैक्षणिक अर्हता, डाटा एंट्री 10 हजार की डिप्रेशन प्रति घंटा की गति से उत्तीर्ण नहीं की है। प्रबंधन के इस आदेश से भू-विस्थापित कामगारों में आक्रोश बढ़ गया है। उनका कहना है कि प्लांट में जमीन लेने के बाद बिजली कंपनी प्रबंधन भू-विस्थापितों के साथ छल कर रहा है। पहले नौकरी देने में टालमटोल की नीति अपनाई गई, किसी तरह नौकरी दी गई तो अब उन्हें वेतनमान में नुकसान पहुंचाया जा रहा है।