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हम महिलाएं पुरुषों की तरह खुद को सशक्त मान रहीं हैं तो अलग से सुविधाओं की जरूरत नहीं होना चाहिए

2 वर्ष पहले
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8 मार्च विश्व महिला दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान रखने वाली महिलाओं से चर्चा कर जानना चाहा कि वे अपने शहर को किस रूप में देखना चाहती हैं। मुद्दा था शहर में बदलाव का, महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ कामकाजी व व्यावसायिक स्थलों में महिलाओं के लिए सुविधा का। इसको लेकर महिलाओं ने अपनी राय दी। इसमें काउंसलर वीणा की अलग राय है। उनका कहना है कि जब हम खुद को पुरुषों की तरह सशक्त मान रही हैं तो अगल से सुविधाएं क्यों चाहिए। आम गृहिणी से लेकर जिले की नवपदस्थ कलेक्टर किरण कौशल ने भी एक सुर में कहा कि सड़कों पर दुर्घटना से होने वाली मौत सबसे बड़ी समस्या है। आवागमन के लिए सुरक्षित सड़कों का जाल पहली जरूरत है, क्योंकि सुबह घर से निकले अपने लोग घर सुरक्षित वापस न आ जाएं तब तक चिंता लगी रहती है।

सुरक्षित है शहर : कलेक्टर कौशल

जिला स्थापना के 21वें वर्ष में तीसरी बार जिले की बागडोर एक महिला के हाथ में है। हाल ही में यहां पदस्थ हुईं कलेक्टर किरण कौशल ने कहा कि निश्चित ही कोरबा में सुरक्षित यातायात के लिए सबसे ज्यादा काम करने की जरूरत है। कोल ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहन शहर के बीच से न गुजरें इसके लिए हम योजना बना रहे हैं। जिसके मूर्तरूप लेने में 2 से 3 साल तक लग सकते हैं। शहर के साथ-साथ जिले के प्रमुख मार्गों में भी भारी वाहनों से घटनाएं होती हैं। इसके उपाय भी किए जा रहे हैं। महिलाओं के लिए जितना मैंने जाना कोरबा एक सुरक्षित जिला है।

महिला दिवस
कलेक्टर किरण कौशल



विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहीं महिलाओं से हमने उन्हीं की जुबानी समझा कि उन्हें कैसा समाज चाहिए
बदलाव का मुद्दा: महिलाओं को आत्मनिर्भर व आत्मरक्षा के लिए ट्रेनिंग और स्वरोजगार की जानकारी भी जरूरी
अपनी कमतरी के अहसास को छोड़ें महिलाएं : वीणा
वीणा मिस्त्री

छोटे शहर में भारी वाहनों की बढ़ी चिंतनीय : डॉ.परिमिता
डॉ.एच परिमिता

वूमेन लीडरशिप व इंफ्रास्ट्रक्चर में हमारा शहर दूसरों से पीछे : नेहा
नेहा पाण्डेय

एकीकृत परामर्श व जांच केन्द्र, जिला एड्स नियंत्रण विभाग, जिला अस्पताल की काउंसलर व कवि वीणा मिस्त्री का कहना है कि जब आज हम हर क्षेत्र में महिलाओं को पुरुष की बराबरी करने वाला मान रहे हैं । उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल हो या बैंक का काउंटर या फिर रेल टिकट का काउंटर। कहीं पे भी अब अलग से महिलाओं के लिए सुविधा नहीं है। मैं इसके पक्ष में भी नहीं हूं क्योंकि हम जब अपने आपको सशक्त मान रहे हैं तो फिर इसकी जरूरत भी नहीं होनी चाहिए। किसी भी कामकाजी महिला को शुरुआती दौर में सामंजस्य बिठाने में दिक्कत होती है, मगर मेरे अपने शहर में कामकाजी महिलाओं के लिए बेहतर माहौल है। एक रिपोर्टर के तौर पर मैं महिला पुरुष दोनों को भी आत्मनिर्भर मजबूत बनाने वाली खबरों को प्रमुखता से स्थान देना चाहूंगी।

एनटीपीसी हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एच परिमिता ने कहा कि अगर वे एक दिन के लिए पत्रकार बनती हैं तो उनका फोकस सड़क सुरक्षा को लेकर होगा। सुबह-शाम इतनी गाड़ियां छोटे से शहर की सड़कों पर अव्यवस्थित दौड़ती हैं देखकर मन व्यथित होता है। खासकर जब लोग एक दूसरे चालकों के प्रति असंवेदनशील व्यवहार करते हुए दिखते हैं। क्या सुरक्षा नियम का पालन इतना कठिन है। उन्होंने इसके लिए शहर के पुलिस प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराना चाहेंगी। ट्रैफिक नियंत्रण की जिम्मेदारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस ओर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है। जिले में आए दिन हादसे होते हैं। इन पर रोकथाम करना आवश्यक है।

बैंक की लेखापाल नेहा पाण्डेय ने कहा कि एक रिपोर्टर के नजरिए से जब मैं शहर को देखती हूं तो शापिंग मॉल में बेबी फीडिंग कार्नर, सार्वजनिक स्थानों पर लेडीज टायलेट, स्टेशन में महिला टिकट घर जैसी जरूरतों को उठाने का ध्यान आता है। बस में भी सफर के दौरान तब बुरा लगता है जब महिलाओं की सुरक्षित सीट पर पुरुष कब्जा कर लेते हैं और महिलाएं खड़ी रह जाती हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने उन्हें पर्याप्त ट्रेनिंग व रोजगार के अवसर की जानकारी देना भी मेरी खबरों के केन्द्र में रहेगा। इसके लिए लोगों को भी इसी तरह का प्रयास करना चाहिए। जिससे लोगों को राहत मिले।

महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए मजबूत इरादे जरूरी : जोशी
मालती जोशी

कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित है मेरा शहर : प्रो.निधि
प्रो. निधि सिंह

अगर मैं रिपोर्टर हूं तो नकारात्मक खबरों से बचूंगी: आचार्या
पल्लवी आचार्या

महिला सशक्तिकरण की प्रतीक हैं एचटीपीएस, कोरबा पश्चिम में पदस्थ वरिष्ठ रसायनज्ञ मालती जोशी। विप्स, महाराष्ट्र मंडल के साथ-साथ विभिन्न संगठनों से जुड़कर कामकाजी महिला व कला के क्षेत्र में काम करने वाली जोशी ऐसी पहली महिला हैं जो यहां महाराष्ट्र मंडल की अध्यक्ष बनीं हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यदि आगे आना है तो सबसे पहले उन्हें स्वयं के इरादे मजबूत करने होंगे। शिक्षा के साथ-साथ जब तक स्वावलंबी नहीं होंगी तब तक वह सहारा ढूंढती रहेंगी। रही सुरक्षा की बात तो आपको अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी। कभी किसी भी तरह का भय अपने पर हावी नहीं होने देना चाहिए। कोरबा का वातावरण कामकाजी महिलाओं के लिए काफी हद तक न केवल सुरक्षित है बल्कि अनुकूल भी है।

केएन कॉलेज में जुलॉजी की प्रोफेसर निधि सिंह का मानना है कि एक महिला के लिए उसकी शिक्षा व स्वावलंबी होने से पहले उसके लिए कार्यक्षेत्र का माहौल बेहतर होना चाहिए। उन्होंने कोरबा शहर को महिलाओं के लिए बेहतर कहा। यहां महिलाएं अन्य शहरों की तुलना में काफी सुरक्षित हैं। जिस शहर में वर्तमान में डीएम, एसडीएम, महापौर जैसे पदों पर महिलाएं पदस्थ हैं वहां की महिलाओं की स्थिति व उनके सकारात्मक परिवर्तन ही होगा। स्कूल ही नहीं कॉलेजों में भी छात्रों की तुलना में छात्राओं की संख्या अधिक है। अपने जिले में महिलाएं कई क्षेत्र में पुरुषों के साथ ही काम कर रही हैं और उनसे बराबरी कर रही हैं। जो कि महिलाओं की दशा व दिशा को बेहतर बताता है।

टायनी कॉटेज-3 की प्राचार्य व ब्लागर पल्लवी आचार्या ने कहा कि यदि मुझे एक रिपोर्टर के तौर पर काम करने का मौका मिले तो मैं महिलाओं के आत्मसम्मान व विश्वास को बढ़ाने वाली खबरों को पहले क्रम में रखूं। नकारात्मक खबरों से लोगों के मानस पर भी असर होता है। हम किसी प्रेरक या पॉजिटिव पहल की खबर को महत्व देते हैं। सो ऐसी निगेटिव खबरों से बचना चाहिए। भास्कर ने इस दिशा में जो शुरुआत की है वह सराहनीय है। जब हम अपराध की खबरें लिखते हैं तब साथ साथ यह भी बताएं कि इस अपराध के लिए किस तरह की कड़ी सजा मिल सकती है। आज के दौर की महिलाएं या युवतियां हर परिस्थितियों से हंसकर लड़ना जानती हैं।

महिलाओं की नजर में बड़ी समस्या सुरक्षित हो शहर का यातायात
अपने सही सलामत घर लौटें इसकी रहती है हर समय फिक्र
फार्म हाऊस से 65 पेटी देशी शराब जब्त, कीमत डेढ़ लाख
तीन लोग गिरफ्तार, मामले की चल रही जांच
भास्कर संवाददाता | कोरबा

उरगा क्षेत्र के एक फार्म हाऊस में पुलिस ने दबिश दी। जहां तलाशी के दौरान 65 पेटी देशी शराब जब्त किया गया है। मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

उरगा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम कुरूडीह के एक फार्म हाऊस में बड़ी मात्रा में शराब छिपाकर रखा गया है। इस पर पुलिस टीम ने दबिश देकर 65 पेटी देशी शराब जब्त की। सभी पेटियों में 3,120 पाव शराब था। मामले में पुलिस ने फार्म हाऊस के चौकीदार रघुनंदन पटवा, सुधाकर प्रजापति व इंद्रपाल सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि फार्म हाऊस बंता सिंह राजपूत की है। यहां से शराब को 1000-1000 रुपए पेटी में बेचा जा रहा था। शराब मेटाडोर से लाकर यहां रखा गया था। पुलिस ने मामले में धारा 34 आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई किया है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद यह चर्चा थी कि आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पहले से ही एक राजनीतिक दल के लोग अवैध रूप से शराब जमा कर रहे हैं। जब्त शराब की कीमत 1 लाख 56 हजार रुपए बताई जा रही है।

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