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रेडी टू ईट सप्लाई में गड़बड़ी, कलेक्टर की जांच में खुली पोल हस्तक्षेप के बाद विभाग ने की कार्रवाई, समूह को हटाया

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 06:36 AM IST

Korba News - स्व सहायता समूहों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। इसके बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग कार्रवाई करने से...

Korba News - chhattisgarh news disorder in ready to eat supply after the open poles intervention in the collector39s investigation the department took action removed the group
स्व सहायता समूहों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। इसके बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग कार्रवाई करने से बचता रहा है। जब कलेक्टर ने औचक निरीक्षण के दौरान खामियां पाईं तो विभाग कार्रवाई करने मजबूर हुआ। क्योंकि कलेक्टर ने स्वयं कार्रवाई करने का आदेश डीपीओ को दी थीं।

इस कारण पोड़ी उपरोड़ा ब्लाॅक के तानाखार सेक्टर की एक समूह काे सेवा से पृथक कर दिया गया है। यही नहीं समूहों की शिकायत नहीं करने के कारण एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी कार्रवाई की भेंट चढ़ गई है। आंगनबाड़ी केन्द्रों में नियमित रेडी टू ईट की आपूर्ति नहीं होने से शासन की योजनाओं के लाभ से पात्र हितग्राही (0 से 5 साल के बच्चे, शिशुवती व गर्भवती माताएं) वंचित हो रही हैं। जबकि समूहों का भुगतान बाकायदा विभाग से जारी होता है। कलेक्टर किरण कौशल बीते दिनों पोड़ी उपरोड़ा ब्लाॅक के दौरे पर थीं। महिला एवं बाल विकास विभाग की पोड़ी उपरोड़ा परियोजना के तानाखार सेक्टर में आने वाले 28 आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषित होने वाले 800 से अधिक बच्चों, गर्भवती व शिशुवती माताओं के लिए मां महामाया स्व सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन समूह संचालक विभागीय अधिकारियों से मिलकर बिना पूरक पोषण आहार सप्लाई के लाखों का बिल आहरण कर रहे थे। क्षेत्र के दौरे पर रहीं कलेक्टर कौशल ने 9 मई को यह गड़बड़ी आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर पकड़ी। वे तानाखार के मांझापारा आंगनबाड़ी पहुंचीं जहां कार्यकर्ता एस कंवर से उन्होंने बच्चों व पोषित होने वाली महिलाओं की उपस्थिति पंजी समेत अन्य कागजात की मांग की तो कार्यकर्ता प्रस्तुत नहीं कर पाई। निरीक्षण के दौरान केन्द्र एक भी बच्चे नहीं थे, वहीं समूह की ओर से रेडी टू ईट नहीं दिए जाने की बात कही गई। जिसके कारण सेक्टर सुपरवाइजर व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को निलंबित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही महिला स्व सहायता समूह को योजना से पृथक करने के निर्देश जिला कार्यक्रम अधिकारी आनंद प्रकाश किसपोट्‌टा को दी थीं। जिसके बाद डीपीओ ने मां महामाया स्व सहायता समूह को संचालन से पृथक कर दिया। वहीं सेक्टर पर्यवेक्षक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने कलेक्टर को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। जिले में 2265 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इसमें 85 हजार बच्चे, महिलाएं पोषित होते हैं। इन्हें पूरक पोषण आहार समय पर मिले इसके लिए 91 स्व सहायता समूह काम कर रहे हैं।

स्वसहायता समूह को किया गया है निरस्त

महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी आनंद प्रकाश किसपोट्‌टा ने बताया रेडी टू ईट प्रदाय करने अनुबंधित मां महामाया स्वसहायता समूह का सेवा से पृथक कर दिया है। कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश पर की गई। निरीक्षण में समूह द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार नहीं पहुंचाया जाना पाया गया था।

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